अभिव्यक्ति की अनुभूति / शब्दों की व्यंजना / अक्षरों का अंकन / वाक्यों का विन्यास / रचना की सार्थकता / होगी सफल जब कभी / हम झांकेंगे अपने भीतर

मंगलवार, 28 मार्च 2017

काँटे

काँटा
निकालता है काँटे को
अपनी तीव्र चुभन से
दर्द देते हैं दोनों ही
कँटकित शाखा को
छोड़ देने के बाद भी
चुभना नहीं छोड़ते
और
रास्ते का रोड़ा
बने रहते हैं
काँटे

जमीन
एक न एक दिन
मिला देती है
मिट्टी में काँटे को
चुपचाप कर देती है
जमींदोज़ काँटे को
माटी बना देती है
चुभने वालों को
जमीन !

@ दिनेश ठक्कर बापा
(चित्र गूगल से साभार) 
एक टिप्पणी भेजें