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रविवार, 3 अप्रैल 2016

खून से सने हुए हाथ

उनकी नसों
उनकी अस्थियों
उनकी सोच में बागी हो चुका है खून
उनके सिर पर सवार है खून
जंगल लाल कर रहे हैं बहा कर खून
हालात जाकर देखोगे समझोगे
तो पूरी दास्तां बयां कर देंगे
उनके खून से सने हुए हाथ

उनको विश्वास नहीं है
अहिंसा के आदर्शों पर
उनको भरोसा नहीं है
सरकार के सिद्धांतों पर
उनको विश्वास नहीं है
नीयत और नीतियों पर
उनको केवल भरोसा है
अपने खूनी आतंक पर
उनको सिर्फ विश्वास है
समानांतर सरकार पर
उनको काबिज रहना है
अकूत वन संपदाओं पर
उनको हुकूमत करना है
निरीह आदिवासियों पर  

लेकिन
हमारा अटूट विश्वास है
मददगार मानवता पर
हमारा पुख्ता भरोसा है
जीवनदायी प्रयासों पर
हमारा संपूर्ण विश्वास है
सर्व प्रगति की पहल पर
बेहतर नतीजे हासिल होंगे  
जब तक हम दिखाते रहेंगे
सरकार को भी आइना !

@ दिनेश ठक्कर बापा
(चित्र गूगल से साभार)
 


 


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