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सोमवार, 28 मार्च 2016

आहत भावनाएं

इस संवेदनशील समय में
दुखी हैं गुरुघंटाल
क्योंकि
कुछ दिनों से
हो गए हैं मजाकिए गंभीर
हो गए है वे सचेत
अपने से बड़े मसखरों के प्रति
नकल में अकल लगाना
अब सुहाता नहीं है उन्हें
खतरे से खाली नहीं है यह
हास्य व्यंग्य को रोते देखना
समझदारी लगती नहीं उन्हें

मजाकियों की सजगता से
आहत हुई है भावनाएं
गुरूघंटालों की
हो गई है उन्हें असहनीय
मजाकियों की सहनशीलता
इसमें भी लग रही है साज़िश
प्रबल विरोधियों की उन्हें

उधर
सब देख-सह रहा है ऊपर वाला
लीलाबाज गुरूघटालों को
सशंकित है वह
कहीं उस पर भी न लग जाय
असहिष्णु होने का आरोप
इसीलिए
भौंडी नकल उतारने वाले गुरुघंटाल
खुद बन गए हैं बहुत बड़े कलाकार
बाहुबली हो गए हैं स्वयंभू अवतार
कुर्सी पर बैठाने हो गए हैं मददगार !

@ दिनेश ठक्कर बापा
(चित्र गूगल से साभार)


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