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सोमवार, 7 मार्च 2016

आस्तीन के सांप

आतंकियों को आदर्श मानने वाले
उनकी मौत का मातम मनाने वाले
आस्तीन के सांप
देश की एकता अखंडता को डंसते
अलगाव का जहर लगातार उगलते
महसूस करने लगे हैं
कि वे हो गए हैं महा विषधर
बढ़ गई है उनकी महत्वाकांक्षा
अब वे चाहते हैं पूजित होना
आकाओं के गले का हार बन कर
चाहते हैं अमृत पीना
जन आस्था से लिपट कर
लेकिन यह उनका मुगालता है
सच तो यह है
कि जब वे
सियासी सपेरों के कब्जे में होंगे
तब निर्ममता से तोड़ दिए जाएंगे
उनके विष के दांत
गुलामी के पिटारे में वे कैद हो जाएंगे
जन प्रदर्शन के जीव बना दिए जाएंगे
तब वे केवल
स्वार्थ की बीन के आगे
फन उठा कर
फूंफकार कर
अपना सर्प धर्म निभाएंगे
और
आकाओं की भूख मिटाएंगे !

@ दिनेश ठक्कर बापा
(चित्र गूगल से साभार)
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