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शुक्रवार, 4 मार्च 2016

"रावण" की मौत

बचपन से ही बड़ा बनना चाहता था वह
सब कुछ पढ़ा, बन गया ज्यादा होशियार
चालाक होने के बावजूद भोले का भक्त था
बड़ा हुआ तो घुटा राजनीतिज्ञ बन गया वह
सभी दांवपेंच सीख कर सिंहासन पर जा बैठा
समयानुसार दसों मुंह से बोल कर छलने लगा
अपने खास दसों सिरों से बाहुबली बन गया
सिंहासन का जादू सिर चढ़ कर बोलने लगा
सत्ता का अहंकार दसों सिर पर हावी हो गया
बीसों हाथों से शक्ति का दुरूपयोग करने लगा
मायावी प्रपंचों से उसका अत्याचार बढ़ता गया
समस्त लक्ष्मण रेखाएं निर्भयता से लांघने लगा
स्व हित साधने सामाजिक मर्यादा भूलता गया
पराया धन कब्जे में कर आकाश में उड़ने लगा
दूसरों की लक्ष्मी अपनी वाटिका में लाते गया
राज महल से विभीषण बाहर निकलने लगा
सोने वाला भी जाग गया
एक दिन
उसकी सोने की लंका जल गई
और वह
"रावण" की मौत मारा गया !

@ दिनेश ठक्कर बापा
(चित्र गूगल से साभार)
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