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बुधवार, 25 नवंबर 2015

रामेश्वरम को जोड़ने वाला पम्बन रेलवे और रोड ब्रिज





रामेश्वरम द्वीप को तमिलनाडु राज्य के शेष हिस्से से जोड़ने वाला पम्बन रेलवे और रोड ब्रिज से गुजरना रोमांचकारी क्षण होता है। बताया जाता है कि ढाई मील चौड़ी खाड़ी को पार करने के लिए प्राचीन समय में यहां  केवल नावों का ही सहारा था। करीब चार सौ साल पहले राजा कृष्णप्पा नायकं ने इस पर पत्थरों का बड़ा पुल बनवाया था, जो कालान्तर में समुद्री तूफ़ान के कारण टूट गया था। फिर अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान जर्मन इंजीनियर की सहायता से उस टूटे पुल की जगह रेल सेवा के लिए आकर्षक पुल निर्मित किया गया। वर्ष 1963 में यह पम्बन रेलवे ब्रिज पुनः क्षतिग्रस्त हो गया। रेल प्रशासन ने इसके पुनर्निर्माण के लिए छह माह की अवधि निर्धारित की थी, किन्तु इस इलाके के इंचार्ज अफसर ने यह अवधि घटा कर तीन माह कर दी और इसकी जिम्मेदारी केरल निवासी सिविल इंजीनियर ई. श्रीधरन को सौंप दी गई। आश्चर्य की बात यह है कि उन्होंने केवल 45 दिनों के अंदर यह कार्य पूर्ण करके दिखा दिया। ज्ञात हो कि कोलकाता,  दिल्ली मेट्रो और कोंकण रेल सेवा भी पद्म विभूषण से सम्मानित ई. श्रीधरन के प्रखर मस्तिष्क, कुशल योजना, कार्यप्रणाली और सक्षम नेतृत्व की ही देन है।रामेश्वरम निवासी मिसाइल मैन डा.ए. पी.जे. अब्दुल कलाम के साथ मेट्रो मैन ई. श्रीधरन के आत्मीय संबंध थे। बहरहाल.पम्बन ब्रिज पहले जहाजों के आवागमन के लिए मध्य भाग से खुल कर ऊपर उठ जाया करता था। इस स्थान पर हिन्द महासागर का पानी दक्षिण से उत्तर की तरफ प्रवाहित होता दिखाई देता है। रामेश्वरम से चेन्नई करीब सवा चार सौ मील दूर दक्षिण पूर्व में है।समानांतर पम्बन रोड ब्रिज से भी आवागमन का आनंद अविस्मरणीय रहता है, बशर्ते मौसम अनुकूल हो।
@ दिनेश ठक्कर बापा
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