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शनिवार, 24 अक्तूबर 2015

अगर मिटाना ही है तो .....
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धर्म, जात-पांत के नाम पर
दंगे, खून खराबा कराना
देश के लिए ठीक नहीं
अपने सिंहासन की खातिर
लोगों को आपस में लड़ाना
लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं

हिंदू अथवा मुस्लिम
सिख अथवा ईसाई
दलित अथवा सवर्ण
गरीब अथवा अमीर
सबका रक्त एक जैसा
इनमें भेदभाव ठीक नहीं
स्वार्थ की जमीन पर
विद्वेषी दीवार ठीक नहीं

मिट्टी में दफ़न
रक्तरंजित अतीत कुरेदना
विवादों के गड़े मुर्दे उखाड़ना
वर्तमान के लिए ठीक नहीं
अतीत के अपराध की सजा
भविष्य को देना ठीक नहीं

हर किसी का सूरज
किसी साँझ ढल जाएगा
दूसरे के हिस्से की घूप
हड़पना कतई ठीक नहीं
अपनी लकीर बढ़ाने हेतु
दूसरों की लकीर मिटाना
कतई ठीक नहीं
अगर मिटाना ही है
तो भूख गरीबी मिटाएं
साथियों
साम्प्रदायिक सद्भाव मिटाना
इंसानियत के लिए ठीक नहीं !
@ दिनेश ठक्कर बापा
(चित्र गूगल से साभार)
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