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बुधवार, 21 अक्तूबर 2015

हैदराबाद की प्रदूषित हुसैन सागर झील

चार मीनार की तरह हुसैन सागर झील भी हैदराबाद (तेलंगाना) की पहचान को रेखांकित करती है| यह कृत्रिम झील है, जो वर्ष 1562 में में मूसी नदी की सहायक नदी पर निर्मित की गई थी| इस झील की अधिकतम लंबाई करीब 3.2 कि.मी. और चौड़ाई करीब 2.8.कि.मी. है| इसकी अधिकतम गहराई 32 फुट है| यह झील हैदराबाद और इसके जुड़वा शहर सिकंदराबाद को विभाजित करती है| इस झील की शोभा बढ़ाने के लिए  वर्ष 1992 में मध्य भाग स्थित टापू पर गौतम बुद्ध की ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई थी| इस झील के चारों ओर पर्यटन और धार्मिक स्थल भी हैं, जो इसके आकर्षण में वृद्धि करते हैं| मसलन,जल विहार, लुम्बिनी गार्डन, एनटीआर गार्डन, स्नो वर्ल्ड, नेकलेस रोड, बिरला निर्मित संग्रहालय,मंदिर आदि| लेकिन दुःख का विषय यह है कि झील पिछले तीन दशक से निरंतर प्रदूषित हो रही है| इसका पानी बेहद प्रदूषित हो गया है| आसपास के आवासीय और औद्योगिक क्षेत्र का प्रदूषित जल इस झील में प्रवाहित किया जा रहा है| शासन प्रशासन द्वारा प्रदूषण पर अंकुश लगाने अब तक कोई ठोस उपाय नहीं किये गये हैं| और न ही सामाजिक संस्थाओं द्वारा भी इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल की जा रही है| गौरतलब है कि हैदराबाद और सिकंदराबाद के लोगों द्वारा इस झील में ही हर वर्ष हजारों की संख्या में छोटी बड़ी गणेश और दुर्गा प्रतिमाएं भी विसर्जित की जाती है| इस दौरान पूरा  महानगर उमड़ पड़ता है| इससे चारों और गन्दगी पसर जाती है| मोदी जी का स्वच्छ भारत अभियान यहां नजर नहीं आता| साफ़ सफाई राम भरोसे है|
@ दिनेश ठक्कर बापा
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