अभिव्यक्ति की अनुभूति / शब्दों की व्यंजना / अक्षरों का अंकन / वाक्यों का विन्यास / रचना की सार्थकता / होगी सफल जब कभी / हम झांकेंगे अपने भीतर

शुक्रवार, 30 अक्तूबर 2015

भविष्य जड़वत है जमीं पर

हैदराबाद के हुसैन सागर के निकट सड़क किनारे बैठे  वार्निश से पुते बच्चे को भीख माँगते देख कर ह्रदय उद्वेलित हो गया| आँखें नम हो गई| कुछ देर बाद इस बच्चे का पिता, जो शराब के नशे में धुत्त था, आया और सिक्के बटोर कर चला गया| सवाल करने पर यह बच्चा मौन साध कर मूर्तिवत बैठा रहा| इस नजारे को देख कर कुछ पंक्तियाँ लिपिबद्ध हो गई .....
भविष्य जड़वत है जमीं पर
--------------
कितना बेबस है बचपन
बदन है चांदी जैसा
फिर भी है कंगाल
किया गया है विवश
हाथ फैलाने के लिए
बैठाया गया है मूर्तिवत
भीख मागने के लिए
हाथ में होनी थी किताबें
थामे है भीख का कटोरा
बैठना था पाठशाला में
बैठाया गया फुटपाथ पर
तारे बैठे है बेबस जमीं पर
भविष्य जड़वत है जमीं पर
पिता नशे में उड़ते आसमां पर !
@ दिनेश ठक्कर बापा
एक टिप्पणी भेजें