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गुरुवार, 13 अगस्त 2015

भूखे इंसानों के बनाए देवी देवता

दो वक्त की रोटी की चाहत में
बस्ती के मुहाने पर
सड़क के किनारे तंबू लगा कर
भूखे इंसानों का परिवार
पत्थरों को तराश कर
ईमानदारी से गढ़ रहा है
देवी देवताओं का परिवार
उनकी छेनी हथौड़ी का प्रहार
आस्था को दे रहा है आकार
बेबस अशक्त और निर्धन हाथ
बेजान पत्थरों में प्राण फूंक कर
रच रहे शक्ति और धन की देवी
अन्न संकट से जूझ रही काया
रच रही संकट मोचन की काया
जमाने की दुत्कार झेलता हुनर
पत्थरों को दे रहा पूज्य आकार

भूखे इंसानों के बनाए देवी देवता
बिकने के लिए हो गए हैं तैयार
सज गए हैं वे सड़क के किनारे
रोजी रोटी मिलेगी इनके सहारे
इनकी कोई कीमत तय नहीं है
मोलभाव से ही इन्हें बिकना है
पिपासु क्रेता की पारखी नजर
देवी देवताओं का करेंगी उद्धार
जिनकी होगी भव्य प्राण प्रतिष्ठा
उनकी बढ़ेगी भक्तजनों में निष्ठा
जल्द बिक गए ऊंचे दाम पर
चमक दमक वाले देवी देवता
देर से बिके औने पौने दाम पर
सादे रूप रंग वाले देवी देवता
बिके बिना धरे रहे सड़क पर
ज्ञान और बुद्धि के देवी देवता

उधर, तंबू के पीछे आश्रम में
उच्च तकनीक से हुए हैं तैयार
अत्याधुनिक देवी और देवता
आशाओं के ये बाबा बापू माता
नाच कर इन्हें रिझाना आता
भक्तों को गोद में बैठ-बिठा कर
झप्पी देकर चूना लगाना भाता
सभा में कृपा की कर रहे बौछार
कचौड़ी पकौड़ी चटनी खिला कर
दिव्य शक्ति का सपना दिखा कर
दुख भरे दिन बीतने का दावा कर
भक्तों की जेब पर डाल रहे हैं डाका
लूटखसोट का छोड़ते नहीं हैं मौका

तंबू के सामने जब गुजरा काफिला
तब भूखे इंसानों का परिवार
रथारूढ़ देवी देवताओं को देख कर
दुबक गया एक किनारे
पाखंडियों का प्रपंच देख कर
दुखी हो गया शिल्पकार परिवार
मासूम बेटी ने पिता से पूछा -
इन देवी देवताओं को किसने बनाया
ये तो पत्थर के नहीं हैं ?
पिता ने रूंधे स्वर में जवाब दिया -
इन्हें अंधभक्तों ने बनाया है
इनका ह्रदय पत्थर का है !

@ दिनेश ठक्कर बापा
(चित्र : गूगल से साभार)






 

 


 

 


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