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रविवार, 2 अगस्त 2015

सफेदपोश

सफेदपोश अपने चेहरे में
सभी कालिख छिपा लेते
सफेद उजले परिधानों में
काले कारनामे ढक लेते
काली करतूतों की देह में
बेईमानी की दुर्गंध दबा लेते  
अमीरी की नकली सुगंध से
गरीबी की नाक में दम करते
काले धन से भरी तिजोरी में
ईमान और शर्म भी रख देते
संरक्षकों की कृपा के फेर में  
सुरा-सुंदरी भी मुहैया कराते
मद्य निषेध और बेटी बचाने  
छलावा मात्र सदैव आगे रहते

राक्षसी प्रवृत्ति से धनी बन कर
दैविक कार्यों का दिखावा करते
समाज की आंखों में धूल झोंकते
अपने काले धन को सफेद करने
सामजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि करने    
आड़े तिरछे हर हथकंडे अपनाते
मर्यादा की लक्ष्मण रेखा लांघते
कोई कसर वे बाकी नहीं रखते
प्रपंच के सभी सफेदपोश नुसखे  
इनके काले धंधे से ही निकले है  

सफेदपोशों के मुखौटे उतारने होंगे
असली चेहरे अनावृत्त करने होंगे
इनके काले धंधे उजागर करने होंगे
समय रहते इनके कुचक्र रोकने होंगे

@ दिनेश ठक्कर "बापा"
(चित्र : गूगल से साभार)

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