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शुक्रवार, 8 मई 2015

सोई हुई दुम को कुचलोगे तो ....

सड़क पर घूमते, सोते कुत्ते
गली मुहल्ले में टहलते कुत्ते
विरासत में मिलती बेचारगी    
जूठन पर पलती है ये जिंदगी

जरूरत नहीं इन्हें खसरा पट्टा
डालता नहीं कोई गले में पट्टा
मारता हर आदमी हट्टा कट्टा
लगाता है साख पर खुद बट्टा

दुत्कार, फटकार सहते ये कुत्ते
आदमी की पशुता से ये दबते
निवाला देख कर दुम हिलाते
मुफ्त के चौकीदार होते ये कुत्ते

दर दर की ठोकरे खाते ये कुत्ते
भूखे पेट बेमौत मरते ये कुत्ते
जब सिर उठाते ये लाचार कुत्ते
दबंगों के सिर झुका देते ये कुत्ते

प्रेम धन देकर इन्हें पुचकारोगे
द्वार पर जान न्योछावर कर देंगे
अगर सोई हुई दुम को कुचलोगे  
तो फिर ये बोटी बोटी नोंच खाएंगे

@ दिनेश ठक्कर "बापा"
 (चित्र :गूगल से साभार)      
 
   





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