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बुधवार, 6 मई 2015

मासूम सवाल

धरती कांपी, कांप उठी रूह
पल भर में सब कुछ तबाह
बड़ों के आशियाने
छोटों के ठिकाने
जमींदोज़ हुए जिंदगी के शामियाने
लाशों का अंबार लगा रूलाने

मलबे से झांकता नन्हा हाथ
उसे मिला मददगारों का साथ
बाहर निकाला दबा चमत्कार
मौत को झटका देकर
जिंदा निकली बालिका
बाहर निकाला शव मां का
गिरा था इनकी झोपड़ी पर
बगल का बड़ा बंगला
अफ़सोस
आपदा में भी बड़ों से दबने की नियति

मंदिर सुरक्षा-कर्मी पिता रहा सलामत
पत्नी का शव देख कर हो गया विचलित
खुशी के आंसू निकले पुत्री से लिपट कर    
हो गया वह निरूत्तर
जब मासूम बेटी ने रोते हुए पूछा -
आपके भगवान ने खुद को बचा लिया,
उनका घर नहीं गिरा !
फिर हमारा क्यों गिरा,
मां को क्यों नहीं बचाया?

@ दिनेश ठक्कर 'बापा"
(चित्र : गूगल से साभार)
   



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