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सोमवार, 25 मई 2015

जिंदा इंसान की तरह जीना होगा

शोषण के कुचक्र में फंसा जीवन
आखिर हम क्यों जियें
इसे हम कतई बर्दाश्त न करें
अपने सोये जमीर को जगाना होगा
स्वाभिमान से समझौता नहीं करें
संघर्ष का रास्ता हमें अपनाना होगा
शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद करें
आक्रोश की मशाल को जलाना होगा
खुद्दारी का चूल्हा खुद प्रज्ज्वलित करें
रोटी पर अपना भी हक जताना होगा

सोद्देश्य, सार्थक, सम्मानित जीवन
हमें भी जीना होगा, हम जरूर जियें
प्रताड़ना और बेबसी के साथ न जियें
भूख के कारण मरना मंजूर न करें
पेट पर पड़ने वाली लात चिंहित करें
समय पर उन्हें सबक सिखाना होगा
लक्ष्य ऊंचा हो तो शोषण खत्म होगा

आओ, हम संघर्ष पथ पर प्रस्थान करें
जुमलेबाजों के झूठे सपनों का जीवन
आखिर हम क्यों जियें
इसे हम हरगिज स्वीकार न करें
मौलिक अधिकार के साथ जीना होगा  
जिंदा इंसान की तरह जीना होगा  

@ दिनेश ठक्कर बापा
(चित्र : गूगल से साभार)

 

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