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रविवार, 22 फ़रवरी 2015

सावधान, आदमखोर शेर पहुंच गया है

आदमखोर शेर अपने कुनबे के साथ
अब पहुंच गया है
बस्ती के मुंहाने पर
घात लगा कर वे छिप गए हैं
लोकतंत्र के झुरमुट में
आसान शिकार की अपेक्षाओं के साथ

डराने वाली अहंकारी गुर्राहट
दबंगई युक्त रौबदार दहाड़
जो गूंज रही है
कोलाहल के बीच
दरअसल यह उत्पन्न प्रतिध्वनि है
रक्त पिपासु जीभ, मांस प्रिय दांतों
और खूनी पंजों की जुगलबंदी की        
इसे अगर तुम नजरअंदाज करोगे
तो लेने के देने पड़ जाएंगे
मौका मिलते ही यह तुम्हें
दबोच लेगा, चीर देगा
फिर रूतबे से खाएगा कुनबे के साथ
निरीह, निहत्था इंसान निरंतर
इसका आसान शिकार बनता रहेगा
क्योंकि जानवरों से कहीं ज्यादा
उसे पसंद है इंसानी गोश्त
वैसे भी इंसानियत खतरे में है!

इंसानी खून के प्यासे, गोश्त के भूखे
अन्य शातिर शेर भी चल पड़े हैं
अपाहिज होते जंगलों से
आ रहे हैं अब बस्ती की ओर
आसान शिकार की लालसा में

सचेत रहना होगा इस मिथक से
कि शेर जंगल का राजा होता है
उससे इलाका सुरक्षित रहता है
सतर्क रहो बस्ती के बिचौलियों से
वे बरगलाएंगे, भरमाएंगे, कहेंगे तुम्हें
किसी का बाल भी बांका न हो पाएगा
बल्कि उनसे बस्ती का उद्धार होगा
हमारा नेतृत्व शक्तिशाली हो जाएगा
मन की सही बात नहीं बताएंगे तुम्हें
बचना होगा बिचौलियों के जाल से
इनकी मिलीभगत है आदमखोरों से
वे चाहते हैं तुम बापू के बंदर बने रहो
शेर निकट देख उछलकूद मत मचाना
उसकी गुर्राहट, दहाड़ पर ध्यान न देना
विरोधस्वरूप आवाज बुलंद न करना
अपनी अपनी झुग्गियों में दुबके रहना
लोकतंत्र के झुरमुट की ओर न झांकना
क्योंकि वहां छिपा आका आदमखोर शेर
कहीं स्वयं जनता का शिकार न बन जाय

अगर तुम जागृत होने की कोशिश करोगे
तो बिचौलिए प्रलोभनों से बिचकाएंगे तुम्हें
झुग्गियों में ही कैद रखने का प्रयास करेंगे
अंधेरी रात में अच्छे दिन का सपना दिखाएंगे
दाल रोटी खाकर प्रभु के गुण गाने कहेंगे
किंतु तुम इनके झांसे में कतई न आना
भूख के खिलाफ क्रांति गीत गाना होगा तुम्हें
अपने भीतर का पौरूष जगाना होगा तुम्हें
बिचौलियों को बेनकाब करना होगा तुम्हें
शेर की खाल ओढ़े लोगों को पहचानना होगा
सर्वप्रथम इनको निपटाना होगा, उसके बाद
लोकतंत्र के झुरमुट में छिपे आदमखोर शेर
और भक्षकों का काम तमाम करना होगा

अन्यथा बस्ती में भी जंगल राज हो जाएगा
पुरखों की जमीन आदमखोरों की हो जाएगी
इंसानियत भूखे शेरों का निवाला बन जाएगी
सब एक होने की आवाज अगर नहीं निकलेगी
अपनी सुरक्षा, समृद्धि का अधिकार तज दोगे
तो पूरी बस्ती आदमखोरों की मांद बन जाएगी
इंसानियत की नई पीढ़ी कोख में ही मर जाएगी
फिर भेड़ियों, गिद्धों का भी जमावड़ा हो जाएगा
तब तुम कहीं के न रहोगे, न घर के न घाट के
घर के साथ साथ मुंह पर भी ताला लग जाएगा
विरोध के अस्त्र तुम्हारे साथ जमींदोज़ हो जाएंगे
इसलिए हर समय आंख कान मुंह खुले रखो
दिल और दिमाग में सामंजस्य बनाए रखो
सावधान, अब आदमखोर शेर कुनबे के साथ
बस्ती के अंदर पहुंच गया है!

@ दिनेश ठक्कर "बापा"
(चित्र गूगल से साभार)
 

 

 
 

 



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