अभिव्यक्ति की अनुभूति / शब्दों की व्यंजना / अक्षरों का अंकन / वाक्यों का विन्यास / रचना की सार्थकता / होगी सफल जब कभी / हम झांकेंगे अपने भीतर

गुरुवार, 11 दिसंबर 2014

दिलीप कुमार को जन्म दिन की बधाई और मंगल कामनाएं


हमारा यह सौभाग्य है कि वर्ष 1995 में दिलीप साहब द्वारा टीवी जगत के प्रदत्त पहले लम्बे इंटरव्यू का अवसर "जी सिनेमा" में  प्रसारित होने वाले टीवी न्यूज सीरियल "अनबन" के लिए मिला था। उन पर बने आधे-आधे घंटे के दो एपिसोड टेलीकास्ट हुए थे। संजू सिन्हा द्वारा निर्देशित इस सीरियल का तब मैं पटकथा लेखक और मुख्य सहायक निर्देशक था। दिलीप साहब के साक्षात्कार का फिल्मांकन उनके पाली हिल, बांद्रा, मुम्बई स्थित बंगले में सुबह से शाम तक किया गया था। पहले साक्षात्कार के अलावा उस रोज उनके साथ व्यतीत अंतरंग क्षण, स्नेह और पारिवारिक व्यवहार मेरे जीवन के लिए यादगार और अविस्मरणीय हैं। इस दौरान दिलीप साहब की सेवाभावी धर्मपत्नी सायराबानो से प्राप्त स्नेह और आतिथ्य सत्कार की यादें आज भी जीवंत हैं। गौरतलब है कि दिलीप साहब का यह साक्षात्कार फिल्म "कलिंगा" के निर्माता सुधाकर बोकड़े के साथ हुई उनकी अनबन पर आधारित था। दिलीप साहब के निर्देशन में फिल्म "कलिंगा" के निर्माण में विलम्ब को लेकर सुधाकर बोकाड़े के साथ उनके बीच विवाद, आरोप प्रत्यारोप का लम्बा दौर चला था, जो फिल्म इंडस्ट्री में चर्चा का विषय बन गया था। दिलीप साहब ने हमें इसी शर्त पर उन पर तत्संबंधी दो एपिसोड बनाने की मंजूरी दी थी कि वे अपनी बात लगातार एक ही बैठक में बोलेंगे। उनके इशारे पर ही कैमरा ऑन और अॉफ होगा। केवल लंच के वक्त ही वे अपने कमरे में जाएंगे। फ़ाइनल एडिटिंग और प्रतीकात्मक तौर पर फिल्म के दृश्यों की मिक्सिंग भी उनके मन मुताबिक और निज सचिव की मौजूदगी में ही होगी ताकि विषय और साक्षात्कार के साथ न्याय हो सके। हमने भी दिलीप साहब की गरिमा और मान सम्मान के मद्देनजर शर्तों का पालन भी किया। उल्लेखनीय है कि दूसरे एपिसोड में ही निर्माता सुधाकर बोकाड़े ने अपने इंटरव्यू में दिलीप साहब से अपने आरोप और बयान पर माफी मांग ली थी। दूसरे एपिसोड के टेलीकास्ट होने के बाद दोनों के मध्य विवाद का पटाक्षेप भी हो गया। इस खुशी में दिलीप साहब ने होटल ताज में पार्टी दी और वहीं प्रेस कांफ्रेंस लेकर हमारे सीरियल "अनबन" को श्रेय देते हुए अपने विवाद की समाप्ति की घोषणा भी की। बॉलीवुड के विवादास्पद विषयों पर आधारित यह साप्ताहिक न्यूज कंट्रोवर्सी सीरियल उन दिनों बेहद लोकप्रिय हुआ था। 31 दिसंबर 1995 की शाम को जी टीवी पर भी प्रसारित हुए "अनबन 95 स्पेशल" कार्यक्रम में भी इन दोनों कड़ियों की मुख्य झलकियाँ शामिल थीं। दैनिक भास्कर बिलासपुर सहित देश के विभिन्न अख़बारों और पत्रिकाओं में इसकी समीक्षा रपट भी प्रकाशित हुई थी। ईश्वर से कामना है कि दिलीप साहब स्वस्थ और दीर्घायु हों।      
(ग्रुप फोटो में दिलीप साहब के साथ दृष्टिगोचर निर्देशक संजू सिन्हा और मैं )  
@ दिनेश ठक्कर "बापा"

एक टिप्पणी भेजें