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बुधवार, 17 सितंबर 2014

साबरमती आश्रम के अश्रु

साबरमती आश्रम का ह्रदय कुंज
निवास रहा है सत्य अहिंसा का
साक्षी रहा है सत्य के प्रयोग का
स्थल रहा है संबोधन विशेष का
मोहनदास करमचंद गांधी से
महात्मा गांधी बनने की धड़कन
झकझोरती रही ह्रदय कुंज को
स्वराज्य पाने की प्रतिज्ञा
आधार बनी थी दांडी कूच की
सफल वापसी की प्रतिज्ञा
गर्वित करती रही ह्रदय कुंज को
स्वराज्य प्राप्ति के कर्मयोग ने
मिलन केंद्र बनाया ह्रदय कुंज को
सत्य अहिंसा के हाथ से चला था
स्वराज्य का चरखा
किंतु अब मौन है यह चरखा
ह्रदय कुंज की धड़कनें
शांत हो गई हैं बंद कमरे में
आदर्श संदेश और स्मृतियां
शेष रह गई हैं प्रदर्शनी तक
अपनी ही खादी के ताने बाने में
तड़प रही है
महात्मा गांधी की आत्मा
राजनीति के चरखे से
अब काते जा रहे हैं स्वार्थ के सूत
देश का नमक अदा करने में
मारी जा रही है दांडी
सत्य के प्रयोग का पक्षधर
साबरमती आश्रम का ह्रदय
अब द्रवित है झूठी गांधीगिरी से
महात्मा की आत्मा का रूदन देख
अनवरत बह रहे हैं
साबरमती आश्रम के अश्रु

@ दिनेश ठक्कर "बापा"
     (चित्र : प्रीति ठक्कर)


 















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