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बुधवार, 11 जून 2014

हम हैं उम्मीदों के रखवाले

हम हैं उम्मीदों के रखवाले
सुनेंगे सबके दर्द भरे नाले
विकास करेंगे हम मतवाले
देश को हैं आगे बढ़ाने वाले

इधर बैठे या फिर बैठे उधर
हम चलेंगे सामूहिकता पर
हमें भरोसा नहीं संख्या पर
सबका भला करेंगे मिल कर
हम हैं उम्मीदों के रखवाले....

आशाओं को है पूरा करना
कसौटी पर है खरा उतरना
सिर ऊंचा कर आगे बढ़ना
सीना तान कर है चलना
हम हैं उम्मीदों के रखवाले....

अब हर हाथ को काम मिले
गरीबों का चूल्हा जरूर जले
लाचारों को भी शिक्षा मिले
आओ गांवों का जीवन बदलें
हम हैं उम्मीदों के रखवाले....

मजदूर किसान का हो भला
आंसू पोंछने का मौका मिला
आलोचना से है संबल मिला
मिट्टी का कर्ज चुकाने चला
हम हैं उम्मीदों के रखवाले....

अच्छाई के पथ पर हम चलें
बुराइयों को किनारे कर लें
भाईचारे के साथ गले मिले
हम हैं उम्मीदों के रखवाले....

-दिनेश ठक्कर "बापा"
  (चित्र : गूगल से साभार) 
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