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गुरुवार, 24 अप्रैल 2014

अपेक्षित हैं अच्छे दिन

माली को है पूरा यकीन
मेहनत न जाएगी बेकार
हरा भरा होगा गुलज़ार
अपेक्षित हैं अच्छे दिन
 
पतझड़ बीते आएगी बहार
बदलेगा नजारा इस बार
हर शाख अब होगी हरियर
फूल खिलेंगे हर गुलशन

हरियाली होगी मनभावन
खुशबू फैलाएंगे हर सुमन
भौंरों का होगा अब गुंजन
परिंदों का होगा ये चमन

विफल होगा कुल्हाड़ी वार
दरख़्तों पर न होगा प्रहार
जड़ें मजबूत हैं अबकी बार
ये हौंसला रहेगा बरकरार
अपेक्षित हैं अच्छे दिन ?

- दिनेश ठक्कर "बापा"


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