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गुरुवार, 7 नवंबर 2013

बागियों ने बिगाड़ा बिलासपुर जिले का चुनावी समीकरण


छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सात विधान सभा क्षेत्रों में तखतपुर ही एक मात्र ऐसी सामान्य सीट जो भाजपा और कांग्रेस के बागियों के चुनाव समर में डटे रहने के कारण पंचकोणीय मुकाबले वाली सीट हो गई है। जबकि मस्तूरी में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं। इसी तरह बेलतरा में फिलहाल भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर दिखाई दे रही है, लेकिन अंतिम क्षणों में अनुसूचित जाति के बसपा और निर्दलीय प्रत्याशी सीधे मुकाबले को उलझा भी सकते हैं। .      
तखतपुर सामान्य सीट में इस दफे पंच कोणीय मुकाबला होने की संभावना है। यहाँ कुल सोलह उम्मीदवार मैदान में हैं। मुख्य राष्ट्रीय दलों के प्रत्याशियों द्वारा प्रलोभन दिए जाने के बावजूद यहाँ किसी भी बागी और निर्दलीय उम्मीदवार ने नामांकन पत्र वापस नहीं लिया है। यहाँ के पूर्व कांग्रेस विधायक बलराम सिंह ठाकुर के बेटे और कांग्रेस प्रत्याशी आशीष सिंह ठाकुर अपने ही दल के बागी शिवा माली से आक्रांत हैं। आशीष प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चरणदास महंत के चेले हैं। उन्हें चौतरफा कड़े मुकाबले से उबारने महंत ने सियासी गोटिया बिछा दी है किन्तु उसका फायदा शायद ही मिलेगा। टिकट न मिलने से नाराज कांग्रेस के बागी और जिला पंचायत सदस्य शिवा माली निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में आशीष को बददुआ देते हुए उसे निपटाने की जुगत में लगे है। इसी तरह मौजूदा विधायक और भाजपा प्रत्याशी राजू सिंह क्षत्री को भी बागी हुए भाजपा के पूर्व विधायक और शिव सेना प्रत्याशी जगजीत सिंह मक्कड़ पटखनी देने कमर कस चुके हैं। इन सबकी लड़ाई का फायदा उठाने बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी संतोष कौशिक अपने पक्ष में माहौल बनाने जुटे है. वे भी जिला पंचायत के सदस्य हैं, इसलिए उनकी क्षेत्र में पकड़ मजबूत बनी हुई है। खासकर अनुसूचित जाती के मतदाताओं में उनकी गहरी पैठ है। वे यहाँ का सियासी समीकरण बदलने की क्षमता रखते हैं। सही तस्वीर इस हफ्ते स्पष्ट हो जायेगी।
जबकि बेलतरा सामान्य सीट पर भाजपा के वर्त्तमान विधायक और बुजुर्ग प्रत्याशी बद्रीधर दीवान और कांग्रेस के प्रत्याशी भुवनेश्वर यादव के बीच सीधी टक्कर होनी है। पिछली बार भुवनेश्वर यादव को पराजय मिली थी। इस बार उन्हें जीत का भरोसा है. लेकिन जातिगत समीकरण फिलहाल भाजपा के ब्राह्मण प्रत्याशी बद्रीधर दीवान के पक्ष में दिख रहे हैं।.बहुजन समाज पार्टी को पिछले चुनाव में वोट करने वाले अनुसूचित जाति के कई परंपरागत मतदाता कार्यकर्ता भाजपा से जुड़ गए है। इसका सीधा फायदा भाजपा प्रत्याशी बद्रीधर दीवान को मिल सकता है। हालांकि अंतिम क्षणों में बहुजन समाज के प्रत्याशी देवकुमार कनेरी सहित अनुसूचित जाति के एक दो निर्दलीय प्रत्याशी जातिगत समीकरणों के चलते सीधे मुकाबले को उलझा सकते हैं।    बेलतरा में कुल सत्रह प्रत्याशी चुनाव समर में उतरे हैं। यहाँ भी भाजपा और कांग्रेस द्वारा कुछ निर्दलीय प्रत्याशियों को नाम वापस लेने आर्थिक प्रलोभन दिया गया था, ताकि दो ईवीएम लगाने की नौबत न आए और नोट बटन का भय उत्पन्न न हो।  
वही दूसरी तरफ मस्तूरी सुरक्षित सीट पर भी त्रिकोणीय मुकाबला  होने की संभावना प्रबल है। यहाँ के मौजूदा भाजपा विधायक डा कृष्णमूर्ति बांधी तीसरी बार चुनाव लड़ रहे है। उनका मुकाबला कांग्रेस के नए चहेरे और प्रत्याशी दिलीप लहरिया से होना है। लहरिया इस क्षेत्र के नामी लोक कलाकार है। अपनी कला प्रतिभा के जरिये वे यह चुनाव जीतने की मंशा पाले हुए हैं.किन्तु यहाँ बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी तुकाराम जोशी, निर्दलीय प्रत्याशी राजेश्वर भार्गव कांग्रेस प्रत्याशी की जड़ों में मठा डालने की कोशिश कर रहे है। इसीलिये भाजपा प्रत्याशी बांधी को अपनी जीत की आशा बंधी हुई है। यहाँ कुल तेरह उम्मीदवार मैदान में हैं। ज्ञात हो कि मस्तूरी सीट अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व है। इस इलाके में सूर्यवंशी और सतनामी समाज के लोगों की संख्या लगभग बराबर है। सतनामी समाज के अग्रणी लोगों का इस बात पर विरोध कायम है कि कांग्रेस ने उनके समाज के व्यक्ति को टिकट नहीं देकर उपेक्षा की है।जिला पंचायत सदस्य और निर्दलीय प्रत्याशी राजेश्वर भार्गव कांग्रेस की टिकट के आकांक्षी थे। टिकट न मिलने से नाराज होकर बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे राजेश्वर भार्गव की नजर में कांग्रेस प्रत्याशी दिलीप लहरिया भाजपा प्रत्याशी डा बांधी की तुलना में बेहद कमजोर उम्मीदवार हैं। इसलिए लहरिया की सामाजिक और राजनैतिक कमजोरी का लाभ उन्हें मिलेगा।              

- दिनेश ठक्कर "बापा"                                                   
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