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बुधवार, 6 नवंबर 2013

बिलासपुर जिले की सात विधान सभा सीट के सियासी समीकरण

प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित किये जाने के बाद छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सातों विधान सभा क्षेत्रों में सियासी हलचलें बढ़ गई हैं। चुनावी समर के योद्धाओं की स्थिति भी स्पष्ट हो गई है।17 उम्मीदवारों द्वारा मैदान छोड़ने के बाद जिले में अब105 प्रत्याशी सत्ता संग्राम में अपना कौशल दिखाएंगे। सबसे कम प्रत्याशी अजीत जोगी की मौजूदा सीट मरवाही में है। यहाँ उनके पुत्र अमित समेत दस प्रत्याशी मैदान में हैं, जबकि जोगी पत्नी डा रेणु की कोटा सीट में सर्वाधिक 19 प्रत्याशी हैं।
तखतपुर और मस्तूरी को छोड़ कर बाकी पांच सीट पर भाजपा और कांग्रेस उम्मीदवार के बीच सीधी टक्कर होने के आसार दिख रहे हैं।
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी इस बार अपनी सुरक्षित मरवाही सीट से खुद न लड़ कर अपने बेटे अमित जोगी को खड़ा कर उसे सक्रिय राजनीति के अखाड़े में उतार दिया है। जनता के कमिया (सेवक) बन कर मरवाही को प्रदेश में वीआईपी सीट का तमगा दिलाने वाले अजीत जोगी ने यहाँ अपने पुत्र और कांग्रेस प्रत्याशी अमित की जीत का दावा किया है। अमित ने भी उत्तराधिकारी बतौर पिता की तरह मरवाही का कमिया बनने का ऐलान किया है। मध्यप्रदेश की सीमा से लगे मरवाही विधान सभा क्षेत्र का चुनाव परिणाम जोगी पुत्र के राजनैतिक भविष्य की दिशा और दशा का निर्धारण करेगा। इसके साथ ही अजीत जोगी की तरह अमित भी अब आदिवासी होने या न होने के विवाद जाल में उलझ जायेंगे। अमित की जाति और नागरिकता पर भाजपा प्रत्याशी समीरा पैकरा की आपत्ति निरस्त कर निर्वाचन अधिकारी द्वारा अमित का नामांकन पत्र वैध घोषित किये जाने के बावजूद यह विवाद भी भविष्य में कोर्ट तक पहुँच सकता है। जाहिर है मरवाही की इस हाई प्रोफाइल सीट पर अब चुनावी हथकंडे भी खूब अपनाए जाएंगे। जिले के सात विधान सभा क्षेत्रों में सबसे कम दस प्रत्याशी यहाँ अपनी किस्मत आजमा रहे है। पहली बार चुनाव लड़ने वाले अमित जोगी का सीधा मुकाबला भाजपा प्रत्याशी कु. समीरा बाई पैकरा से होना है। दो दफे जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतने वाली समीरा मरवाही के विधान सभा चुनाव समर में सियासी ताकत और धन बल के मद्देनजर कमजोर साबित हो सकती हैं। अमित जोगी की जाति और नागरिकता के शपथ पत्र को झूठा बताने वाली समीरा पैकरा का पॉलिटिकल पैकअप कराने जोगी परिवार जुगत में है, तो दूसरी तरफ भाजपा के स्थानीय बागियों और असंतुष्ट कार्यकर्ताओं के भितरघात से कमल खिलने से पहले ही मुरझा सकता है। राष्ट्रीय गोंडवाना पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती उर्मिला मार्को यहाँ मुकाबले को त्रिकोणीय करने के फेर में है। बहुजन समाज पार्टी के तपेश्वर मरावी, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के सुमन सिंह वाकड़े और पांच निर्दलीय प्रत्याशी अपनी जमानत बचा लें तो यही उनकी उपलब्धि होगी।    
अजीत जोगी की पत्नी और कोटा की मौजूदा विधायक डा रेणु जोगी इस बार फिर कांग्रेस के हाथ के साथ कोटा के चुनाव मैदान में अपना वजूद कायम रखने जोर आजमाइश कर रही हैं। इस सामान्य सीट पर सर्वाधिक 19 प्रत्याशी चुनावी मोर्चा लिए हुए हैं।यहाँ डा रेणु जोगी का सीधा मुकाबला भाजपा के नए चहेरे- प्रत्याशी काशीराम साहू से है। इस बार फिर यहाँ भाजपाई भितरघाती चुनावी तालाब से कमल का अस्तित्व मिटाने और खुन्नस का कीचड़ फ़ैलाने में शायद ही कोई कसर बाकी रखे। ख़ास बात यह भी है कि नाम का भ्रम पैदा करने के लिए जोगी का साथ देते हुए छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच ने भी अपना प्रत्याशी काशीराम साहू को चुनाव मैदान में उतारा है। हालाँकि भाजपा प्रत्याशी के नाम की समानता का लाभ इन्हे शायद ही मिले। यहाँ बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी महेश दीवाकर, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रत्याशी मनोहर लाल ध्रुव और लोकजन शक्ति पार्टी के उम्मीदवार श्याम कार्तिक के अलावा तेरह निर्दलीय प्रत्याशियों को भी अपनी जमानत बचाने जद्दोजहद करनी पड़ेगी।        
बिलासपुर जिले की तीसरी चर्चित सीट बिल्हा है। यहाँ से विधान सभा अध्यक्ष और भाजपा प्रत्याशी धरमलाल कौशिक निरंतर दूसरी दफे जीत का सेहरा बांधने चुनाव समर में हैं। इनसे पिछली बार हारे सियाराम कौशिक को कांग्रेस ने राहुल फार्मूले को दरकिनार कर फिर अपना प्रत्याशी बनाया है। पूर्व में यहाँ से एक बार कांग्रेस के विधायक रह चुके सियाराम कौशिक का दावा है कि इस चुनाव में धरमलाल को उसके करम ले डूबेंगे। जबकि धरमलाल ने भरोसा जताया है कि बिल्हा क्षेत्र में हुए करोड़ों के विकास कार्यों के कारण जनता उन्हें फिर जिताएगी। इस सामान्य सीट पर कुल पंद्रह प्रत्याशी चुनावी जंग में शामिल हैं। कुर्मी जाति के राजनैतिक प्रभाव वाले इस विधान सभा क्षेत्र में बहुजन समाज पार्टी की तरफ से प्रत्याशी जगदीश कौशिक अपने पुराने गुरू धरमलाल की सियासी बाजी पलटाने का प्रपंच रच रहे हैं। वे इस वक्त बोदरी नगर पंचायत के अध्यक्ष भी हैं। भाजपा से तरजीह न मिलने के कारण अलग होकर उन्होंने नगर पंचायत का चुनाव निर्दलीय लड़ा था और जीते थे। तब से वे धरमलाल से खुन्नस रखते हैं। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के कुछ वोट बसपा से बागी हुए दिलीप कुमार कोसले और सीपीआई (एमएल) रेडस्टार के प्रत्याशी रमेश कुमार सतनामी काटेंगे।
बिलासपुर सामान्य सीट भी नगरीय प्रशासन, स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल और कांग्रेस की मेयर श्रीमती वाणी राव के प्रत्याशी होने के कारण हाई प्रोफाइल हो गई है। यहाँ कुल पंद्रह प्रत्याशी मैदान में में हैं, लेकिन सीधा मुकाबला अमर अग्रवाल और वाणी राव के मध्य होना है। छत्तीसगढ़ राज्य बनने से पूर्व यानी वर्ष 1998 के विधान सभा चुनाव से निरंतर जीत रहे अमर अग्रवाल ने चौथी बार अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगाई है, लेकिन इस बार अनिल टाह जैसा कमजोर और वाकओवर देने वाला कांग्रेस प्रत्याशी नहीं है बल्कि जुझारू और पढ़ी लिखी तेजतर्रार महापौर वाणी राव को राहुल गांधी ने चुनाव समर में उतारा है। इस दफे अमर की नींद उड़ना स्वाभाविक है। अमर के द्वारा पूरी ताकत लगा देने के बावजूद वाणी राव ने मेयर के सीधे चुनाव में भाजपा की प्रत्याशी मंदाकिनी पिंगले को करीब दस हजार वोट से हराया था। इसलिए भी अमर को इस बार का मुकाबला कांटे का लग रहा है।
तखतपुर सामान्य सीट में इस दफे पंच कोणीय मुकाबला होने की संभावना है। यहाँ कुल सोलह उम्मीदवार मैदान में हैं। यहाँ के पूर्व कांग्रेस विधायक बलराम सिंह ठाकुर के बेटे और कांग्रेस प्रत्याशी आशीष सिंह ठाकुर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चरणदास महंत के चेले हैं। उन्हें चौतरफा कड़े मुकाबले से उबारने महंत ने सियासी गोटिया बिछा दी है, किन्तु उसका फायदा शायद ही मिलेगा। कांग्रेस के बागी और जिला पंचायत सदस्य शिवा माली निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में आशीष को बददुआ देते हुए उसे निपटाने की जुगत में लगे है। इसी तरह मौजूदा विधायक और भाजपा प्रत्याशी राजू सिंह क्षत्री को भी बागी हुए भाजपा के पूर्व विधायक और शिव सेना प्रत्याशी जगजीत सिंह मक्कड़ पटखनी देने कमर कस चुके हैं। इन सबकी लड़ाई का फायदा उठाने बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी संतोष कौशिक अपने पक्ष में माहौल बनाने जुटे है।
बेलतरा सामान्य सीट पर भाजपा के वर्त्तमान विधायक और बुजुर्ग प्रत्याशी बद्रीधर दीवान और कांग्रेस के प्रत्याशी भुवनेश्वर यादव के बीच सीधी टक्कर होनी है। पिछली बार भुवनेश्वर को पराजय मिली थी। इस बार उन्हें जीत का भरोसा है, लेकिन जातिगत समीकरण फिलहाल दीवान के पक्ष में दिख रहे हैं। बेलतरा में कुल सत्रह प्रत्याशी चुनाव समर में उतरे हैं।
मस्तूरी सुरक्षित सीट पर भी मौजूदा भाजपा विधायक डा कृष्णमूर्ति बांधी तीसरी बार चुनाव लड़ रहे है। उनका मुकाबला कांग्रेस के नए चहेरे और प्रत्याशी दिलीप लहरिया से होना है। लहरिया इस क्षेत्र के नामी लोक कलाकार है। अपनी कला प्रतिभा के जरिये वे यह चुनाव जीतने की मंशा पाले हुए हैं, किन्तु यहाँ बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी तुकाराम जोशी, निर्दलीय प्रत्याशी राजेश्वर भार्गव कांग्रेस प्रत्याशी दिलीप की जड़ों में मठा डालने की कोशिश कर रहे है। इसीलिये भाजपा प्रत्याशी बांधी को अपनी जीत की आशा बंधी हुई है। यहाँ कुल तेरह उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।    

- दिनेश ठक्कर "बापा"                                                                               .    .        
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