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बुधवार, 2 अक्तूबर 2013

बिलासपुर की मेयर ने अफसरों के खिलाफ खोला मोर्चा

बिलासपुर नगर पालिक निगम की सामान्य सभा के विशेष सम्मलेन के बाद निगम की राजनीति में उबाल आ गया है। विधान सभा चुनाव के मद्देनजर महापौर और भाजपा पार्षदों की सियासी खींचतान बढ़ गई है। नगरीय प्रशासन मंत्री और स्थानीय भाजपा विधायक अमर अग्रवाल की शह पर भाजपा पार्षदों ने तीन अक्टूबर को होने वाली सामान्य सभा में महापौर को व्यापार विहार के विवादित भूखंड के मामले में घेरने रणनीति तैयार कर ली है। जबकि महापौर ने भी मंत्रालय और संभाग आयुक्त को विशेष सम्मेलन बाबत अपनी शिकायत भेजी है।
सोमवार को टाउन हाल में हुए नगर पालिक निगम की सामान्य सभा के विशेष सम्मेलन की वैधानिकता को लेकर नाराज महापौर श्रीमती वाणी राव ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने एकतरफा संपन्न हुए विशेष सम्मलेन को अवैध बताते हुए यह मामला मंत्रालय तक पहुंचा दिया है। उन्होंने मुख्य सचिव सुनील कुमार, नगरीय प्रशासन सचिव एमके राउत और बिलासपुर संभाग आयुक्त को शिकायती पत्र भेज कर पारित सभी प्रस्तावों को निरस्त किये जाने की मांग की है। उन्होंने अपने शिकायती पत्र में सवाल उठाया है कि संभाग आयुक्त से आदेश करा कर नगर निगम के अधिकारियों को विशेष सम्मेलन बुलाने की आवश्यकता क्यों पड़ गई। ऐसी कौन सी आपदा आ गई। महापौर ने निगम आयुक्त अवनीश शरण, निगम सचिव उमाशंकर शर्मा और सभापति अशोक विधानी पर निगम एक्ट के खिलाफ जाकर अवैध रूप से विशेष सम्मलेन कराने और नियम विरूद्ध प्रस्तावों को पारित कराने का आरोप लगाया है। महापौर के कथन के मुताबिक़ विशेष सम्मेलन में निर्धारित एजेंडे से बाहर अतिरिक्त प्रस्ताव पर चर्चा कराये जाने का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए सभी पारित प्रस्तावों को रद्द कर दिया जाना चाहिए।
इसके अलावा अपनी ही पार्टी के गुटीय पार्षदों के विरोध से जूझ रही महापौर ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चरणदास महंत से भी मिल कर विशेष सम्मलेन को अवैध करार देते हुए उन्हें राज्य और नगर पालिक निगम के अधिकारियों के कारनामों से अवगत कराया। नगर पालिक निगम  एक्ट के होने वाले उल्लंघन का ब्यौरा भी दिया। साथ ही महापौर ने गुट विशेष से जुड़े कांग्रेसी पार्षदों द्वारा वाक आउट में उनका साथ न दिए जाने पर भी रोष जताया और तीन अक्टूबर को आयोजित सामान्य सभा के लिए सभी कांग्रेसी पार्षदों को व्हीप जारी करने का अनुरोध किया।
सनद रहे कि सोमवार को महापौर और एमआईसी मेंबर के वाक आउट के बाद भी आधे घंटे तक उनके विरोधी छह कांग्रेसी पार्षद सदन में बैठे रहे। यह असहयोग महापौर को नागवार गुजरा है। महापौर के मुताबिक़ इससे कांग्रेस की एकजुटता खंडित और छवि धूमिल हुई है। महापौर ने अपने खिलाफ अगले कुछ दिनों में संभावित कानूनी कार्रवाई और राज्य सरकार द्वारा उन्हें  बर्खास्त किये जाने की रणनीति बनाए जाने के मद्देनजर कांग्रेस आलाकमान को भी इस पूरे मामले का ब्यौरा भेजा है। ताकि पार्टी स्तर पर उनका बचाव हो सके और विधान सभा चुनाव के लिए बिलासपुर से टिकट की दावेदारी भी प्रभावित न हो सके। .

-दिनेश ठक्कर "बापा"  .                    
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