अभिव्यक्ति की अनुभूति / शब्दों की व्यंजना / अक्षरों का अंकन / वाक्यों का विन्यास / रचना की सार्थकता / होगी सफल जब कभी / हम झांकेंगे अपने भीतर

रविवार, 22 सितंबर 2013

जनता की पसंद पर पीएम के लिए मोदी के नाम का एलान- शाहनवाज

"भारतीय जनता पार्टी ने जनता की आवाज सुन कर प्रधानमंत्री पद के लिए गुजरात के लोकप्रिय मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम का एलान किया है। जनता पहले से ही कह रही थी कि नरेन्द्र मोदी को ही प्रधानमंत्री बनना चाहिए। हम जनता की पसंद को ही तरजीह देते हैं।" यह बात भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सांसद शाहनवाज हुसैन ने शुक्रवार, 20 सितम्बर की शाम को पत्रकारों से कही। वे बिलासपुर में मुस्लिम समाज के पांच विभिन्न भवनों का लोकार्पण करने आए थे।
पत्र-वार्ता में शाहनवाज हुसैन ने आगे कहा कि  बीजेपी के पूरे लोग इकट्ठे  होकर नरेन्द्र मोदी के साथ खड़े हैं। नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री बतौर प्रोजेक्ट किए जाने पर कोई भी वरिष्ठ नेता नाराज नहीं है। नरेन्द्र मोदी को प्रोजेक्ट किए जाने से पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में सकारात्मक असर पड़ेगा। उनकी छवि का फायदा पार्टी को मिलेगा। मोदी की छवि के अलावा  मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में विकास के मुद्दे पर हम चुनाव जरूर जीतेंगे और राजस्थान व दिल्ली कांग्रेस से छीनेंगे। जहाँ तक मीडिया में लालकृष्ण आडवाणी की इस सम्बन्ध में नाराजगी की चर्चा का सवाल है ,वह सही नहीं है। स्वयं आडवाणी जी ने नरेन्द्र मोदी को उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद मिठाई खिलाई है, उन्हें आशीर्वाद दिया है। बिलासपुर, कोरबा में उन्होंने उनकी तारीफ भी की है जिसके आप लोग साक्षी हैं। रूठे लालकृष्ण आडवाणी द्वारा नरेन्द्र मोदी की तारीफ करना क्या दलगत और सियासी मजबूरी है? इस सवाल के जवाब में शाहनवाज हुसैन ने स्पष्ट तौर पर कहा कि  यह उनकी कोई भी मजबूरी नहीं है। आडवाणी जी हमेशा सच्ची बात कहते रहे हैं। जिसने भी अपने राज्य में विकास किया है वे सब आडवाणी जी के सिपहसलार हैं।
आरएसएस के दबाव पर प्रधानमंत्री के पद के लिए नरेन्द्र मोदी के नाम का एलान किए जाने के सवाल के जवाब पर श्री हुसैन ने सफाई दी कि कौन पीएम, एमपी और एमएलए का उम्मीदवार होगा, यह सुझाव आरएसएस नहीं देता है। आरएसएस केवल सांस्कृतिक संगठन है। वह बीजेपी के राजनैतिक विचार को दिशा देता है। पीएम की उम्मीदवारी को लेकर जो निर्णय हुआ है वह बीजेपी का अपना निर्णय है।
हिन्दू-मुस्लिम धर्म की राजनीति करने वालों पर उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि मुसलमानों की टोपी जो पहन ले इसका मतलब यह नहीं हुआ कि वह उनका हमदर्द है।टोपी इबादत के लिए होती है,सियासत के लिए नहीं। जिस नेता को टोपी पहनना है, पहन ले, जिसको तिलक लगाना है, लगा ले लेकिन दोनों को एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए।
गुजरात के दंगे में नरेन्द्र मोदी की भूमिका के प्रश्न पर उन्होंने साफ किया कि अदालत ने अभी तक गुजरात के मुख्यमंत्री पर अंगुली नहीं उठाई है। बारह साल से वहां कोई दंगा नहीं हुआ है। नरेन्द्र मोदी का नाम दंगों में घसीटना कांग्रेसियों की पुरानी  आदत है। जबकि हमने कभी नेहरू, इंदिरा और राजीव गाँधी का नाम विभिन्न बड़े दंगों के सिलसिले में नहीं लिया और न ही उन्हें जिम्मेदार ठहराया। उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर के दंगे पर उनका कहना था कि वहां दंगे रोकने में अखिलेश यादव की सरकार नाकाम रही है। मीडिया ने अपने स्टिंग आपरेशन में दंगे का सच जाहिर कर दिया है। यूपी के दंगे समाजवादी पार्टी के शोकाल्ड दंगे है। वोट के लालच में वहां सांप्रदायिक भाईचारा तोड़ने का काम किया गया है। इसमें समाजवादी पार्टी की राज्य सरकार के साथ साथ केंद्र सरकार की भी भागीदारी है। जबकि बीजेपी हमेशा सांप्रदायिक एकता का प्रयास करती रही है।
कांग्रेस की आलोचना करते हुए उन्होंने चुटकी ली कि कांग्रेस एक मुंह से नहीं बल्कि दस मुंह से बोलने वाली पार्टी हो गई है। जब हम उनके बयान को पकड़ लेते है तो वे हायतौबा मचाते हैं। मनमोहन सिंह की सरकार देश में हर मोर्चे पर विफल रही है। मनमोहन सिंह को पहले बहुत बड़ा अर्थशास्त्री  माना जाता था पर उनका अर्थशास्त्र किसी काम का नहीं निकला। देश में बेरोजगारी,महंगाई ,भ्रष्टाचार और घोटाले बढ़े  है। लोग उनकी सरकार से उब गए हैं।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा सीपत में एनटीपीसी के सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन राजीव गाँधी के नाम पर किए जाने पर उन्होंने व्यंग्य कसा कि कांग्रेसियों का यदि बस चले तो वे हर पत्ते और दरख़्त का नाम गाँधी परिवार के नाम पर कर दे।
बिलासपुर के विधायक और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल की तारीफ में कसीदे गढ़ते हुए उन्होंने कहा कि वे इस क्षेत्र के मुसलमानों के बड़े नेता है क्योंकि यहाँ सांप्रदायिक सद्भाव दिखता है।
पत्रकारों को सवाल पूछने दीजिये
शाहनवाज हुसैन पर जब सवालों की लगातार बौछार हो रही थी तब स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल को यह नागवार गुजरा और उन्होंने इशारा कर बीजेपी के एक स्थानीय नेता बेनी गुप्ता को पत्रकार वार्ता समाप्त करने की घोषणा करानी चाही। बेनी गुप्ता ने चलती पत्रकार वार्ता के दौरान ही बीच में जब दूसरी बार माइक लेकर पत्रकारों से कहा कि वे अब सवाल पूछना बंद करें। तब शाहनवाज हुसैन को उनका यह रवैया पसंद नहीं आया और उन्होंने बड़े सलीके से कहा कि आप इन्हें क्यों रोक रहे हैं। पत्रकारों को सवाल पूछने दीजिए। हमको भी मजा आ रहा है।

- दिनेश ठक्कर "बापा"

एक टिप्पणी भेजें