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रविवार, 22 सितंबर 2013

प्रधानमंत्री के छत्तीसगढ़ प्रवास से चौड़ी हुई सियासी खाई



प्रधानमंत्री डॉ  मनमोहन सिंह के सीपत (जिला बिलासपुर, छत्तीसगढ़) प्रवास के दौरान एक बार फिर से केंद्र सरकार और राज्य की भाजपा सरकार के बीच बनी खाई और चौड़ी हो गई। यही नहीं बल्कि पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के कोरबा और बिलासपुर जिले के प्रवास के दौरान उनके उद्बोधन से उपजे सियासी समीकरण पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपनी सरकार को अव्वल दर्जे की बताते हुए छत्तीसगढ़ को पोसने का श्रेय लेने से नहीं चूके। केंद्र सरकार की धनराशि  से छत्तीसगढ़ को बिजली के क्षेत्र में आगे ले जाने की बात कहकर मनमोहन सिंह ने रमन  सिंह को यह जता  दिया कि उनके सहयोग के बगैर छत्तीसगढ़ राज्य को पॉवर हब नहीं बना सकते। एनटीपीसी का सीपत सुपर थर्मल पावर स्टेशन राजीव गांधी के नाम कर मनमोहन सिंह ने गांघी परिवार के प्रति अपनी वफादारी भी दिखाई।.        
गुरूवार,19 सितम्बर को आयोजित सीपत एनटीपीसी के लोकार्पण समारोह में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बिजली संबंधी मंतव्य को केन्द्रीय उर्जा राज्य मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी अपने भाषण में दोहरा कर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह को केंद्र पर आश्रित रहने का अहसास दिलाया। हर घर में बिजली पहुँचाने का भरोसा दिला कर उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी को भी लपेटे में लिया। गौरतलब है कि  आडवाणी ने पिछले दिनों कोरबा और बिलासपुर जिले में अपने भाषण में विद्युत् विकास के मामले में गुजरात को नंबर एक राज्य करार दिया था। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी सीपत में अपने भाषण में विद्युत् उत्पादन के सन्दर्भ में केंद्र की महत्ता प्रतिपादित की। जाहिर है, पॉवर हब के मुद्दे पर चल रहे सियासी दांवपेंच का सिलसिला आसन्न विधानसभा और लोकसभा चुनाव तक यूँ ही चलता रहेगा।
सीपत में अपने संबोधन के दौरान छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह की पीड़ा भी उजागर हुई। उनका यह कहना कि बिजली की आवश्यकता के अनुरूप उसका उत्पादन संभव नहीं हो पा रहा है , समय रहते कोयले की आपूर्ति की समस्या का निराकरण यदि नहीं होगा तो प्रधानमंत्री की कार्ययोजना कैसे सफल होगी। केंद्र और भाजपा की राज्य सरकार के टकराव के चलते सरगुजा में 4000 मेगावाट वाला अल्ट्रा मेगा पॉवर प्रोजेक्ट प्रभावित हुआ है। नो गो एरिया में इस प्रोजेक्ट के आने के कारण केंद्र के मंत्रिमंडलीय समूह द्वारा इसे रद्द कर दिए जाने पर रमन सिंह ने अफ़सोस जाहिर कर ही दिया। कोल ब्लॉक कंट्रोवर्सी के चलते इस प्रोजेक्ट को भी कोल ब्लॉक मुहैय्या नहीं कराया जा रहा है। मौका पाकर गुरूवार  को रमन सिंह ने आखिरकार अपने भाषण में इसकी मांग प्रधानमंत्री से कर ही डाली।
वहीँ दूसरी ओर मनमोहन सिंह के इस प्रवास के दौरान कांग्रेस की दलगत राजनीति में भी समीकरण बनते-बिगड़ते दिखे। एसपीजी की सुरक्षा नीति के बहाने प्रधानमंत्री के सभा मंच पर पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को स्थान न देकर उन्हें सामने बने वीआईपी खंड में बैठाना चर्चा का विषय बना रहा। जोगी ने भी इस मुद्दे पर स्पष्ट किया कि उन्हें पहले से ही ज्ञात था कि सुरक्षा कारणों से उन्हें मंच पर बैठने नहीं दिया जाएगा। हालांकि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ही उन्हें इस समारोह में आने का न्यौता दिया था। सनद रहे कि सीपत प्लांट की बुनियाद अजीत जोगी के शासनकाल के दौरान ही रखी गई थी। 28 जनवरी 2002 को तात्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस पावर प्लांट का भूमिपूजन और शिलान्यास किया था। बहरहाल, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा अपने भाषण के दौरान इस प्लांट की नींव के सन्दर्भ में जोगी का जिक्र तक न किया जाना उनके सियासी कद को कम करने जैसा ही था। ऐसा पहली दफे हुआ है जब अजीत जोगी को किसी सार्वजनिक समारोह में मंच से दूर रखा गया हो और उनका नाम लेना जरूरी नहीं समझा गया। हेलीपैड में भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से उन्हें मिलने का मौक़ा नहीं दिया गया। यद्यपि उनकी पत्नी रेणु जोगी के अलावा बिलासपुर की महापौर वाणी राव सहित कुछ प्रदेश कांग्रेस नेताओं को स्वागत करने का अवसर दिया गया, क्योंकि इनके नाम पहले से तय कर लिए गए थे। रेणु जोगी को छोड़कर बाकी कांग्रेस नेताओं ने ज्योतिरादित्य सिंधिया से कुछ क्षण गुफ्तगू अवश्य की। उधर, जोगी के धुरविरोधी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री डॉ चरणदास महंत मंच पर आसीन थे। हालाँकि उन्हें भी बोलने का मौका नहीं दिया गया। वे कठपुतली की तरह मंच पर बैठे रहे।.समारोह के दौरान पंडाल में महंत और जोगी गुट के समर्थकों की आपसी दूरी भी साफ़ झलक रही थी।

- दिनेश ठक्कर "बापा"
  (चित्र : साभार जन सम्पर्क विभाग)   
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