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शुक्रवार, 20 सितंबर 2013

अब नई ऊर्जा के साथ चल सकती है जोगी एक्सप्रेस


छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की जाति के मामले में हाई कोर्ट से बुधवार को उनकी याचिका निराकृत होने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। सियासी गलियारों में जोगी के आदिवासी मुद्दे पर नए समीकरण बनने शुरू हो गए हैं। जोगी  की परंपरागत और घरेलू आदिवासी सीट मरवाही से पुनः उनके चुनाव लड़ने का रास्ता साफ़ हो गया है। इनके साथ ही उनके पुत्र अमित के लिए भी आदिवासी सीट का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पहले कांग्रेसी मुख्यमंत्री होने का श्रेय पाने वाले अजीत जोगी  मरवाही सीट से उपचुनाव जीते थे। हालाँकि इसके पहले रायगढ़ लोकसभा सीट से वे जब पहली बार सांसद निर्वाचित हुए थे तब से उनकी कंवर जाति  को लेकर विवाद खड़ा होता रहा है। राज्य बनने के बाद से ही जोगी को, जाति को लेकर राजनैतिक दांव पेंच में ज्यादा उलझा दिया गया था। सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा नेताओं ने जोगी को न्यायालयीन मामले से घेर कर उन्हें कमजोर करने की कवायद जारी रखी थी। आदिवासी भाजपा नेता नन्दकुमार साय , संत राम  नेताम और कोरबा क्षेत्र के बनवारीलाल अग्रवाल ने अपनी ओर से कोई कसर बाकी नहीं रखी थी । पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष बनवारीलाल अग्रवाल ने वर्ष 2002 में तात्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के जाति प्रमाण पत्र की सीबीआई जांच कराए जाने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट में वर्ष 1967 से अब तक जारी जोगी के सभी जाति प्रमाण पत्रों की प्रतियां और इस मामले में अब तक सुप्रीम कोर्ट सहित विभिन्न न्यायालयों के फैसले की प्रतियाँ पेश की गई थी। हाई कोर्ट ने 6 मई 2013 को बनवारीलाल अग्रवाल की याचिका ख़ारिज कर दी थी।
वहीँ दूसरी ओर वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अजीत जोगी के जाति के मामले में उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति से जांच होनी चाहिए। लेकिन चौकाने वाली बात यह है कि  इस समिति ने दो साल तक चुप्पी साधे  रखी। जब प्रदेश में विधानसभा के चुनाव निकट आए तब इसे दृष्टिगत रखते हुए यह समिति एकाएक सक्रिय हो गई। उसने विजिलेंस सेल को ताबड़तोड़ जांच करने का जिम्मा सौप दिया। फिर विजिलेंस सेल ने एकतरफा दो जांच रिपोर्ट तैयार कर उच्च स्तरीय जाति  छानबीन समिति के सुपुर्द कर दी। अजीत जोगी ने किसी तरह इसकी प्रतियाँ हासिल कर अपने अधिवक्ता के जरिए हाई कोर्ट में जांच रिपोर्ट को निरस्त करने की मांग को लेकर याचिका दायर कर दी। आखिरकार जोगी के अधिवक्ता के तर्क उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति और राज्य शासन पर भारी पड़े और दोनों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए दोनों जांच रिपोर्ट वापस ले ली। जिसके कारण हाई कोर्ट ने अजीत जोगी की याचिका निराकृत कर दी।
बुधवार को ही अजीत जोगी की पत्नी डॉ रेणु  जोगी सुबह से ही बिलासपुर के सर्किट हॉउस में डेरा डाल कर फैसले का इन्तजार कर रही थी। याचिका निराकृत होने  के बाद जोगी के वकील राहुल त्यागी ने मीडिया से बातचीत कर पूरा ब्यौरा बताया फिर डॉ  रेणु जोगी ने भी ख़ुशी का इजहार करते हुए मीडिया से कहा कि हाई कोर्ट का यह निर्णय मेरे और मेरे परिवार के लिए अच्छा निर्णय है। इससे हमें राहत मिली है। चुनाव नजदीक होने से यह हमारे लिए चिंता का सबब बना हुआ था। आखिकार सच की जीत हुई। स्वयं अजीत जोगी भी इस निर्णय से बेहद खुश हैं।
हालांकि गुरुवार को समीकरण कुछ बदले नजर आये जब वे सीपत में एनटीपीसी के सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन  के लोकार्पण समारोह में गए थे। वहां वे प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह से मुखातिब नहीं हो सके। राजनैतिक खींचतान के चलते उन्हें मनमोहन सिंह से दूर रखा गया। उन्हें मंच के बजाय सामने बने वीआईपी दर्शक खंड में बैठाया गया। हेलीपेड में भी उन्हें मनमोहन सिंह से मिलाना मुनासिब नहीं समझा गया। खुद मनमोहन सिंह ने अपने भाषण में अजीत जोगी का जिक्र तक नहीं किया। जबकि 28 जनवरी 2002 में जब तात्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा सीपत प्लांट का भूमिपूजन और शिलान्यास किया गया था, तब जोगी छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार में मुख्यमंत्री थे। प्रधानमंत्री द्वारा उपेक्षित किये जाने के बाद भी जोगी अपने इरादे पर अटल हैं। अगले कुछ दिनों में अब वे एक नई उर्जा और रणनीति के साथ जोगी एक्सप्रेस चलाने की मुहिम में जुट सकते हैं। अपने दलगत विरोधियों पर भी वे अब भारी पड़ेंगे।

- दिनेश ठक्कर "बापा"

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