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शुक्रवार, 5 जुलाई 2013

हिंदी सिनेमा के नृत्य पर "एक्सप्रेस स्क्रीन" में मेरी आवरण कथा



इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के लोकप्रिय रहे हिंदी फिल्म अखबार "एक्सप्रेस स्क्रीन" के 3 दिसंबर 1993 के अंक में हिंदी सिनेमा में नृत्य और नृत्य निर्देशकों पर आधारित मेरी शोधपरक रिपोर्ताज आवरण कथा बतौर प्रकाशित हुई थी। इसका शीर्षक था "नाच ? कवायद ? कसरत ? " उस वक्त उदया तारा नायर "स्क्रीन" के अंग्रेजी और हिंदी संस्करण की संपादक थीं। हिंदी संस्करण की सहायक संपादक और प्रभारी रेखा देशपांडे थीं। बहरहाल, मेरी इस आवरण कथा को हिंदी फिल्म जगत में बेहतर प्रतिसाद मिला था। इसमें वरिष्ठ शास्त्रीय नृत्यांगना और नृत्य निर्देशक सितारा देवी, बिरजू महाराज, नर्तक-नायक और नृत्य निर्देशक गोपीकृष्ण, इनके भाई नर्तक और नृत्य निर्देशक माधव किशन, नृत्य निर्देशक पी.एल.राज, सरोज खान, दक्षिण भारतीय फिल्मों से मुंबई आए नई पीढ़ी के  नृत्य निर्देशक चिन्नी प्रकाश और उनकी पत्नी, नृत्य निर्देशक रेखा चिन्नी प्रकाश के अलावा पुरानी हिंदी फिल्मों की मशहूर नर्तकी मधुमती, हेलन, कल्पना अय्यर, बिंदु, लक्ष्मीछाया, जयश्री टी. और नृत्य में माहिर पुराने- नए प्रमुख नायक-नायिकाओं से हुई बातचीत पेश की गई थी। गौरतलब है कि हिंदी फिल्मों में एक दौर ऐसा आ गया जब मजाक में यह कहा जाने लगा कि "आधी फिल्म फाइट मास्टर "डाइरेक्ट" कर देते हैं, आधी फिल्म डांस डाइरेक्टर! फिल्म के डाइरेक्टर के लिए कुछ बचता ही नहीं।" काफी हद तक यह मजाक एक सच्चाई भी था। कमोवेश, आज भी कुछ अपवादों को छोड़ दें तो ऐसा ही हो रहा है।                                     
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