अभिव्यक्ति की अनुभूति / शब्दों की व्यंजना / अक्षरों का अंकन / वाक्यों का विन्यास / रचना की सार्थकता / होगी सफल जब कभी / हम झांकेंगे अपने भीतर

मंगलवार, 2 जुलाई 2013

यादें - धर्मयुग में सरगुजा के उपेक्षित पुरातात्विक स्थलों पर आलेख


 टाइम्स ऑफ इंडिया ग्रुप की लोकप्रिय रही पत्रिका "धर्मयुग" (मुम्बई) के 31 जनवरी 1988 के अंक में सरगुजा के उपेक्षित पुरातात्विक स्थलों पर मेरा आलेख प्रकाशित हुआ था। उस वक्त गणेश मंत्री जी इस पत्रिका के कार्यवाहक संपादक थे। इस आलेख में मैंने रामगढ की प्राचीन नाट्य-शाला, जोगीमारा सीता बेन्गरा गुफा के मौर्यकालीन ब्राम्ही लिपि में उत्कीर्ण अभिलेख, रंगीन भित्ति चित्रों के अलावा महेशपुर,लक्ष्मणगढ़, देवगढ-सतमहला, डीपाडीह के मंदिरों के भग्नावशेष और अन्य पुरातात्विक संपदाओं की उपेक्षा और दुर्दशा पर प्रकाश डाला था। यह आलेख वाला अंक आज भी मेरे संग्रह में सुरक्षित रखा है, जो मेरे लिए धरोहर और यादगार स्वरूप है। इसकी छाया प्रति मित्र -पाठकों के लिए सादर प्रस्तुत है।             ,       
एक टिप्पणी भेजें