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मंगलवार, 9 अप्रैल 2013

आदि ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ महादेव


यत्र गंगा च यमुना च।
यत्र प्राची सरस्वती।
यत्र सोमेश्वरो देवः।
तत्र माममृतं कृधि।
इन्द्रायेन्दो परिस्त्रव।
(ऋग्वेद खिलसूक्त)       
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