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रविवार, 7 अप्रैल 2013

हनुमान जी जीवन प्रबंधन के गुरू हैं- पं. मेहता

जीवन के हर क्षेत्र में स्थितियों और समस्याओं से कैसे निपटा जाए ,हनुमान जी का चरित्र हमें यह सिखाता है। वे श्रीराम के परम भक्त हैं। हनुमान जी जीवन प्रबंधन के गुरू हैं। जब हम हनुमान जी को अपने जीवन में उतारते हैं तो हम भी भक्त होने लगते हैं और भौतिक समस्याओं के निराकरण में भक्त की अपनी विशिष्ट शैली होती है। यह विचार शनिवार की शाम को बिलासपुर, छत्तीसगढ़ के श्याम मंदिर भवन में  जीवन प्रबंधन गुरु पं विजय शंकर मेहता ने बातचीत के दौरान व्यक्त किए। 
पं मेहता ने एक प्रश्न के जवाब में कहा कि आज के समय में हर कार्य को संक्षेप , शीघ्रता और दक्ष होकर करने की उम्मीद  की जाती है।  गोस्वामी तुलसीदासजी ने हनुमान चालीसा नामक ऐसा ही  सक्षिप्त साहित्य लिखा है जिसका पाठ 3 से 5 मिनट में पूरा हो जाता है। हनुमान चालीसा के माध्यम से ध्यान करने पर जीवन अलग ही दिव्य रूप ले लेता है। हनुमान चालीसा की प्रत्येक पंक्ति में जीवन की हर समस्या का समाधान निहित है। ऐसा इसलिए है कि इसके हर शब्द में हनुमानजी स्वयं अवतरित हुए हैं। हनुमान चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति की परेशानी , अशांति और असफलता दूर हो जाती है। 
हनुमानजी का जीवन प्रबंधन से क्या वास्ता है? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि हनुमानजी का जीवन चरित्र ,उनका हर काम नियोजित रहता था। आज के दौर में व्यक्ति के जीवन में हनुमानजी का जीवन चरित्र आगे बढ़ने में बेहद सहायक है। उन्होंने कहा कि मनुष्य किसी भी क्षेत्र का हो उसे ज्ञान, कर्म और उपासना के मार्ग पर चलने से ही लक्ष्य की प्राप्ति होगी। 
"हमारे हनुमान" और "एक शाम हनुमान के नाम" जैसे अपने आध्यात्मिक कार्यक्रमों  के राजनीतिकरण के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आरोप बेबुनियाद है। आयोजक किसी भी वर्ग या पार्टी विशेष का हो ,यह मायने नहीं रखता। हम तो उसी घाट पर जाते हैं जहाँ शेर और बकरी दोनों पानी पीने  आते हैं। मेरा प्रयास रहता है कि आध्यात्मिक कार्यक्रमों  के जरिए शांति स्थापित हो।पाकिस्तान में भी मैंने अपने आख्यान में मजहब को जिस्मानी और रूहानी तौर पर अलग-अलग उपयोग के साथ समझाया था। हनुमानजी और ध्यान  के उदहारण के साथ उन्होंने बताया कि बिना ख्यालात के सांस लेने पर अपने इष्ट से रूहानी जुडाव संभव है। वैज्ञानिकों द्वारा गॉड पार्टिकल्स की खोज के सम्बन्ध में उन्होंने बताया कि धर्म और आध्यात्म अनुभूति का मामला है जबकि विज्ञानं प्रमाण मांगता है। सभी धर्मों में अपने अपने इष्ट की प्रार्थना का चलन है और प्रार्थना ही ईश्वर से मिलाने का एकमात्र माध्यम है। वैज्ञानिक  इसी प्रार्थना से ईश्वर के अंश तलाश करने की जुगत में हैं। फिल्मों और टीवी सीरियल में हनुमानजी के किरदार को न्याय की कसौटी पर तौलते हुए उन्होंने कहा कि निर्देशक तो थोड़ी-बहुत छूट ले सकता है लेकिन हनुमानजी के जीवन चरित्र के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। 
पत्रकार वार्ता के बाद रात नौ बजे तक गुजराती समाज भवन टिकरापारा में पं मेहता ने अपने आख्यान में हनुमानजी के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए जीवन प्रबंधन के गुर बताए। उल्लेखनीय है कि पं मेहता की मौजूदगी में रामनवमीं ( 19 अप्रैल) की संध्या 7 से 8 बजे की बीच रायपुर के पुलिस ग्राउंड में श्रीहनुमानचालीसा के सवा करोड़ जप का महायोजन राज्य स्तर पर एक ही समय में  किया जाएगा जिसका प्रसारण  आस्था चैनल के जरिए होगा।  इस बार पं मेहता के महापाठ  का विषय राष्ट्रीयता का बोध होगा  जिसमें धर्म और नैतिकता को अपनाने और भ्रष्टाचार तथा अपराध को नकारने पर जोर दिया जाएगा।
-दिनेश ठक्कर
(दैनिक भास्कर भूमि, राजनांदगांव में प्रकाशित)  
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