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मंगलवार, 10 दिसंबर 2013

चुनाव नतीजों के बाद बिलासपुर जिले के बने नए सियासी समीकरण

* भाजपा की नई सरकार में अमर का बढ़ सकता है वजन  
* बद्रीधर दीवान का बढ़ सकता है ओहदा 
* रेणु और अमित जोगी बदल सकते हैं कांग्रेस की दशा-दिशा 
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में से तीन भाजपा और चार सीट कांग्रेस के हाथ आने से सियासी समीकरण में बदलाव के आसार दिख रहे हैं। बिलासपुर से लगातार चौथी बार जीत कर इतिहास रचने वाले अमर अग्रवाल और बेलतरा के बुजुर्ग भाजपा प्रत्याशी बद्रीधर दीवान की जीत की हैट्रिक से प्रदेश में इन दोनों का राजनैतिक कद बढ़ना तय माना जा रहा है। भाजपा की नई सरकार में अमर अग्रवाल का वजन बढ़ने की पूरी संभावना है। दीवान का ओहदा भी बढ़ सकता है। बिल्हा से दिग्गज भाजपा प्रत्याशी और विधान सभा अध्यक्ष धरम लाल कौशिक तथा मस्तूरी से भाजपा प्रत्याशी और पूर्व मंत्री डा.कृष्णमूर्ति की करारी हार का सीधा सियासी फायदा अमर अग्रवाल और बद्रीधर दीवान को मिलेगा। जबकि मरवाही से जिले समेत पूरे प्रदेश में रिकार्ड मतों से जीतने वाले जोगी पुत्र अमित और कोटा से तीसरी दफे विजयी जोगी की पत्नी डा. रेणु छत्तीसगढ़ कांग्रेस की दशा और दिशा बदलने में अब अहम भूमिका अदा कर सकती हैं। खुद अजीत जोगी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चरणदास महंत के कमजोर प्रदर्शन को भुनाने का कोई मौक़ा अब हाथ से जाने नहीं देंगे। 
छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण से पहले भी अविभाजित मध्यप्रदेश के वक्त नई सरकार के मंत्रिमंडल में बिलासपुर और कोटा विधानसभा क्षेत्र से जीते प्रत्याशी का दबदबा रहा है। वर्ष 1951 से लेकर 1985 तक के विधान सभा चुनाव में बिलासपुर सीट पर कांग्रेस का वर्चस्व रहा। पहले कांग्रेस का अभेद्य गढ़ माने जाने वाले बिलासपुर से निरंतर कांग्रेस प्रत्याशी और पत्रकार बीआर यादव ने अपनी जीत की हैट्रिक बनाई थी। लेकिन वर्ष 1990 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी और हॉटल व्यवसायी मूलचंद खंडेलवाल से पराजित होने पर बीआर यादव शहर में लगातार चौथी बार जीत का इतिहास रचने से चूक गए थे। जबकि इस बार भाजपा प्रत्याशी और स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल ने लगातार चौथी बार जीत दर्ज कर शहर में सियासी इतिहास रचने का श्रेय हासिल किया है। उन्होने सीधे मुकाबले में कांग्रेस की प्रत्याशी और महापौर श्रीमती वाणी राव को 15599 मतों से पराजित कर कीर्तिमान स्थापित किया है।अमर अग्रवाल को कुल 72255 और श्रीमती वाणी राव को 56656 वोट मिले। इनके अलावा यहां से अन्य तेरह प्रत्याशी चुनाव समर में थे लेकिन इनमें से कोई भी 850 वोट भी हासिल न कर सका। इन तेरह प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। जबकि प्राप्त मत की दृष्टि से नोटा बटन (इनमें से कोई नहीं) तीसरे क्रम पर रहा। 3669 मतदाताओं ने नोटा बटन दबा कर किसी भी प्रत्याशी को योग्य नहीं माना।   
अमर अग्रवाल अपनी पिछली तीन चुनावी जीत से बनी साख को इस बार भी भुनाने में सफल रहे। वे शहर के निरंतर विकास के मुद्दे पर मतदाताओं का भरोसा जीतने कामयाब रहे। नागरिकों को सीवरेज प्रोजेक्ट से हुई परेशानियों से चिंतित और विचलित रहे अमर ने मदद का मरहम लगा कर नाराज लोगों को अपने पाले में कर लिया था। कांग्रेस प्रत्याशी महिला होने के कारण उन्होंने चुनाव प्रचार में रणनीति के तहत महिला कार्यकर्ताओं और महिला मतदाताओं को ज्यादा तव्वजो दी। बीते पांच साल के दौरान उन्होंने हर समाज समुदाय के प्रमुख लोगों से सतत संपर्क बनाये रखा। समाज के विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए अपनी विधायक निधि से लाखों रूपयों की सहायता राशि भी दी। अपने सिपहसलारों से यह जुमला भी प्रचारित कर रखा है कि "अमर भैय्या ने किसी को फायदा नहीं पहुँचाया है तो किसी का नुकसान भी नहीं किया है।" यह मिथक उनके नियोजित चुनाव प्रबंधन का एक हिस्सा है।बहरहाल, पिता स्वर्गीय लखीराम अग्रवाल की मजबूत राजनैतिक विरासत का लाभ लम्बे वक्त तक अमर अग्रवाल को मिलता रहा है लेकिन अब इन्होने स्वयं अपनी सुदृढ़ सियासी जमीन तैयार कर ली है। वित्त मंत्री रहने के दौरान उनके चर्चित इस्तीफा प्रकरण से हुआ सियासी गड्ढा भी कब का पट चुका है। आबकारी, स्वास्थ्य और नगरीय प्रशासन मंत्री रहते हुए अपने दामन को पाकसाफ रखने उन्हें काफी मशक्कत करनी पडी। लगातार चौथी बार जीत का झंडा लहराने वाले अब अमर कद्दावर भाजपा नेता के रूप में उभरे हैं। जाहिर है इस बार प्रदेश की नई सरकार में रमन सिंह उनका वजन बढ़ाने में कोई संकोच नहीं करेंगे। उनका दर्जा रमन मंत्रिमंडल में दूसरे नंबर के सदस्य बतौर रह सकता है। 
वहीं दूसरी तरफ बेलतरा विधान सभा से जीतने वाले भाजपा के उम्रदराज प्रत्याशी और छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष बद्रीधर दीवान का भी अब सियासी वजूद बढ़ गया है। अविभाजित मध्यप्रदेश के वक्त वे राज्य परिवहन निगम के उपाध्यक्ष थे। वे छतीसगढ़ विधान सभा के उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी भी सम्हाल चुके हैं। इनके राजनैतिक और प्रशासनिक अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार डा. रमन सिंह उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी दे कर समानित कर सकते हैं। सनद रहे कि बद्रीधर दीवान ने वर्ष 2003 के चुनाव में सीपत सीट से कांग्रेस प्रत्याशी रमेश कौशिक और वर्ष 2008 में परिसीमन के पश्चात नए नाम से बनी बेलतरा सीट से कांग्रेस के भुवनेशवर यादव को हराया था। इस बार फिर उनका मुकाबला भुवनेश्वर यादव से हुआ, जिसमें बद्रीधर दीवान 5728 मतों से विजयी हुए। बद्रीधर दीवान को कुल 50890 और भुवनेश्वर को 45162 वोट मिले। यहाँ सत्रह प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। जातिगत समीकरण और कांग्रेस के वोट काटू प्रत्याशियों की मौजूदगी का फायदा भी इन्हें मिला। इस तरह बद्रीधर दीवान जीत की हैट्रिक बनाने में सफल रहे।                         
जहाँ तक कांग्रेस खेमे में चुनावी नतीजों के बाद उपजे सियासी समीकारण का सवाल है तो इस परिप्रेक्ष्य में अजीत जोगी के कट्टर समर्थक सियाराम कौशिक की दलीय स्थिति भी मजबूत होगी। बिल्हा विधान सभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी सियाराम कौशिक ने भाजपा के दिग्गज प्रत्याशी और विधान सभा अध्यक्ष धरम लाल कौशिक को 10968 मतों से पराजित कर खलबली मचा दी है। सियाराम को कुल 83598 और धरम लाल को 72630 मत हासिल हुए। यहां कुल पंद्रह उम्मीदवार थे। सियाराम पूर्व में भी बिल्हा से कांग्रेस विधायक रह चुके हैं। अजीत जोगी ने अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगा कर राहुल फार्मूले को शिथिल करवा कर इन्हें टिकट दिलवाया था। इनके क्षेत्र में प्रचार और जन सभा की कामयाबी के मामले में अजीत जोगी नरेंद्र मोदी पर भारी पड़े। अब सियाराम को संगठन में जोगी सम्मानजनक पद दिलवा सकते हैं।   
वहीं दूसरी तरफ जोगी पत्नी और पुत्र का सियासी जलवा भी बढ़ गया है। कोटा विधान सभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी डा रेणु जोगी लगातार तीसरी बार जीती है। उन्होंने भाजपा के काशी राम साहू को 5089 मतों से हराया। डा. रेणु जोगी को कुल 58390 और काशी राम साहू को 53301वोट मिले। यहां 19 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। संगठन में अब तक उपेक्षित रही डा. रेणु जोगी को अब एक नए शक्ति केंद्र के रूप में उनके पति द्वारा प्रोजेक्ट करवाने में जुगत तेज कर दी जायेगी। अजीत जोगी द्वारा पुत्र अमित को अपनी मरवाही सीट से रिकार्ड मतों से चुनाव जीता कर नए राजनैतिक समीकरण का अहसास करा दिया है। राजनैतिक उत्तराधिकारी बतौर अमित जोगी अब संगठन में भूचाल ला सकते हैं।       
गौरतलब है कि मरवाही विधानसभा क्षेत्र से अमित जोगी 46250 रिकार्ड मतों से जीते हैं। उन्होने भाजपा प्रत्याशी समीरा पैकरा को हराया है। अमित जोगी को कुल 82909 और समीरा पैकरा को 36659 मत प्राप्त हुए। यहां कुल दस प्रत्याशी थे। अमित की जीत के आंकड़े जिले ही नहीं बल्कि पूरे राज्य में एक कीर्तिमान स्वरूप है। अमित ने अपने पिता की जीत का रिकार्ड भी तोड़ दिया है। 
अजीत जोगी ने इस बार मस्तूरी विधान सभा क्षेत्र से भी अपनी साख दांव पर लगा दी थी। उन्होंने यहाँ से कांग्रेस का टिकट नए चहेरे दिलीप लहरिया को दिलाया था। इस क्षेत्र के जनप्रिय लोक कलाकार दिलीप ने भाजपा सरकार के पूर्व मंत्री डा. कृष्णमूर्ति बांधी को 24146 मतों से करारी शिकस्त दी। दिलीप लहरिया को कुल 86509 और डा. कृष्णमूर्ति बांधी को 62363 वोट मिले। यहां कुल तेरह प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे थे। डा. बांधी की शर्मनाक हार की असली वजह क्षेत्र में उनकी निष्क्रियता, दुर्व्यवहार और दुष्कर्म संबंधी लगे आरोप को मानी जा रही है। विजयी दिलीप को भी संगठन में सक्रिय कराने की कवायद में अजीत जोगी जुटे हैं।
- दिनेश ठक्कर "बापा"

शुक्रवार, 22 नवंबर 2013

मतदान के आंकड़ों से लगाये जा रहे जीत हार के कयास



बिलासपुर जिले के सात विधान सभा क्षेत्रों में हुए मतदान के अंतिम आकड़ें आने के बाद उम्मीदवारों, उनके समर्थकों और चुनाव विश्लेषकों द्वारा जीत हार के कयास लगाने शुरू हो गए हैं। अपने अपने क्षेत्र का मतदान प्रतिशत और बूथवार रूझान देख कर जीत हार का गुणा भाग लगाने की कवायद हो रही है। जिले में सर्वाधिक 83.66 फीसदी मतदान मरवाही सीट में होने पर कांग्रेस प्रत्याशी अमित जोगी रिकार्ड मतों से जीत का दावा कर रहे हैं। तो वहीं दूसरी तरफ बिलासपुर विधान सभा क्षेत्र में अप्रत्याशित रूप से सबसे कम 60.44 प्रतिशत मतदान होने के बावजूद भाजपा प्रत्याशी अमर अग्रवाल ने चौथी बार भी जीतने का भरोसा जताया है।  
छत्तीसगढ़ विधान सभा चुनाव के लिए मंगलवार को हुए मतदान के अंतिम आंकड़ें जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा बुधवार को जारी किये जाने के बाद प्रत्याशियों, समर्थकों और चुनाव विश्लेषकों ने जीत हार का कयास लगाना शुरू कर दिया है। पिछले विधान सभा चुनाव के मुकाबले इस बार जिले में 6.08 प्रतिशत मतदान अधिक हुआ है। जिले के सात विधान सभा क्षेत्रों में इस दफे कुल 73.76 फीसदी मतदान होने पर सियासी कयासों और चुनावी नतीजों के आंकलन का दौर प्रारम्भ हो गया है। सबसे अधिक 83.66 प्रतिशत मतदान मरवाही में हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने अपनी चर्चित मरवाही सीट से इस बार अपने पुत्र अमित जोगी का राजनैतिक भविष्य संवारने बतौर कांग्रेस प्रत्याशी उसे चुनाव लड़वाया है। जिले में सबसे कम 60.44 प्रतिशत मतदान बिलासपुर विधान सभा क्षेत्र में दर्ज किया गया है। यह सीट भी नगरीय प्रशासन मंत्री और नगर भाजपा विधायक अमर अग्रवाल और कांग्रेसी महापौर वाणी राव के कारण सुर्ख़ियों में है। अधिक मतदान के मामले में दूसरे क्रम में कोटा सीट रही, जहाँ 77.20 फीसदी मतदान हुआ। यहाँ से अजीत जोगी की पत्नी और विधायक डा. रेणु जोगी के फिर चुनाव लड़ने से यह सीट हाई प्रोफाइल बन चुकी है। तखतपुर में 77.06, विधान सभा अध्यक्ष धरम लाल कौशिक की बिल्हा सीट में 76.58, मस्तूरी में 74.73 और बेलतरा सीट में 69.37 प्रतिशत मतदान हुआ। जिले इस बार महिलाओं ने पुरूषों की अपेक्षा मतदान करने में दिलचस्पी ज्यादा दिखाई है। महिलाओं का मतदान प्रतिशत 73.80 और पुरूषो का मतदान प्रतिशत 73.71 रहा।
जिले में मतदान का प्रतिशत बढ़ने पर कांग्रेस की बांछे खिली हुई है। इस मामले में जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अरूण तिवारी का कहना है कि भीड़ जुटने, जुलूस निकलने का मतलब विरोध होता है। इस बार राज्य की भाजपा सरकार और स्थानीय भाजपा विधायक के खिलाफ विरोध जताने, वोट डालने मतदाताओं की भीड़ उमड़ पडी थी। जहाँ तक महिलाओं के अधिक मतदान प्रतिशत की बात है तो यह झलियामार समेत समूचे राज्य में महिलाओं के प्रति हुए शोषण, अत्याचार की घटनाओं का बदला है। ज्यादा मतदान कर महिलाओं ने रमन सरकार और उनके नुमाइंदों के खिलाफ अपना आक्रोश प्रकट किया है। तो वहीं जिला भाजपा अध्यक्ष राजा पांडे का मानना है कि अधिक मतदान होना जिले समेत समूचे राज्य में भाजपा सरकार की लोकप्रियता और विकास कार्यों का ही नतीजा है। जबकि बिलासपुर में कम मतदान को लेकर उनका दावा है कि इससे कांग्रेस को ही नुकसान होगा। भाजपा की जीत सुनिश्चित है। 
जिले के सात विधान सभा क्षेत्रों में तुलनात्मक रूप से सबसे कम 60.44 फीसदी मतदान बिलासपुर विधान सभा क्षेत्र में होना प्रतिद्वंदी भाजपा प्रत्याशी अमर अग्रवाल और कांग्रेस प्रत्याशी वाणी राव के लिए चिंता का सबब बन गया है। गौरतलब है कि बिलासपुर में वर्ष 2003 में 62.40 प्रतिशत और 2008 के विधान सभा चुनाव में 61.17 फीसदी मतदान हुआ था। पिछले दो विधान सभा चुनाव के मुकाबले इस बार बिलासपुर जैसी हाई प्रोफाइल सीट में मतदान का प्रतिशत लगातार घटना चुनाव विश्लेषकों की नजर में जीत की लीड कम होने और अप्रत्याशित चुनावी नतीजे आने का स्पष्ट संकेत है। हालांकि मौजूदा विधायक और भाजपा उम्मीदवार अमर अग्रवाल को चौथी दफे भी जीत की उम्मीद है। शहर के बढ़ते विकास के नाम पर वे जीत के प्रति आश्वस्त हैं। जबकि महापौर और निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस प्रत्याशी राव बदलाव के बयार की बात कह रही हैं। वे चुनावी इतिहास रचने का दावा कर रही हैं। उनके मुताबिक शहर की बदहाली और नागरिकों को सीवरेज से हुई परेशानियां ही अमर अग्रवाल की हार का कारण बनेंगी।        
अमित जोगी ने रिकार्ड मतों से जीतने का किया दावा
जिले के मरवाही विधान सभा क्षेत्र जैसे पिछड़े और सीमावर्ती इलाके में इस बार सर्वाधिक 83.66 मतदान होने को लेकर राजनैतिक चर्चाएं सरगर्म हैं। यहाँ कुल मतदाता 168269 है। यहाँ मतदान करने के मामले में पुरूष आगे रहे। पुरूष मतदान 83.73 और महिला मतदान प्रतिशत 83.59 रहा। यह सीट छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी की रही है। पेंड्रा रोड के समीप स्थित ग्राम जोगीसार में जन्में अजीत जोगी का गहरा जनाधार इस इलाके में तो है ही, साथ ही समूचे बिलासपुर जिले को वे अपनी कर्म भूमि मानते है। अनुसूचित जन जाति के लिए आरक्षित मरवाही सीट से तीन बार विधायक रहे अजीत जोगी ने यहाँ से सर्वाधिक मतों से जीतने का रिकार्ड भी बनाया था। अपनी इसी सियासी भूमि पर इस बार उन्होंने अपने पुत्र अमित जोगी को कांग्रेस के युवा योद्धा बतौर उतारा ताकि वह भी अपना पोलिटिकल कैरियर बना सके। यहाँ अजीत जोगी के समर्थकों की पूरी फ़ौज अमित के प्रचार में जुटी थी। अजीत जोगी ने यहाँ ज्यादा वक्त भी नहीं दिया था। उन्होंने मरवाही क्षेत्र में अमित को अपनी स्वतन्त्र छवि और राजनैतिक अस्तित्व बनाने के मद्देनजर अकेला छोड़ दिया था। इस बार हुए सबसे ज्यादा मतदान को लेकर खुद अमित जोगी भी अपने पिता की तरह बेहद उत्साहित और प्रसन्न हैं। मतदान के अंतिम आंकड़े आने के बाद अमित ने दावा किया कि उन्हें चुनाव के दौरान क्षेत्र के सभी वर्गों से भरपूर सहयोग, स्नेह और आशीर्वाद मिला। वे भी अपने पापा की तरह रिकार्ड मतों से जीतेंगे। वे आगे भी पापा की तरह क्षेत्र के लोगों की सेवा कमिया बन कर करते रहेंगे। भाजपा प्रत्याशी समीरा पैकरा को क्षेत्र की जनता नकार चुकी है। आठ दिसंबर को आने वाले चुनाव नतीजों से यह बात स्पष्ट भी हो जायेगी।   

-दिनेश ठक्कर "बापा"     .                  

शुक्रवार, 8 नवंबर 2013

कांग्रेस सरकार ने देश को लूटने का कार्य किया - सुषमा

केंद्र में कांग्रेस की सरकार ने देश को लूटने का कार्य बरसों तक किया है। भ्रष्टाचार और घोटालों में लगातार बढ़ोत्तरी हुई है। जबकि भाजपा शासित राज्य सरकारों ने अपने प्रदेश को आर्थिक रूप से मजबूत किया है और लोगों को सुशासन दिया है। यह बात गुरूवार को भाजपा की स्टार प्रचारक सुषमा स्वराज ने छत्तीसगढ़ के तखतपुर विधानसभा क्षेत्र के तहत् आने वाले ग्राम गनियारी और मस्तूरी सीट के सीपत क्षेत्र में आयोजित चुनावी सभा के दौरान कही।
भाजपा नेत्री और लोकसभा की नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने गनियारी और सीपत की चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में रमन सिंह की सरकार ने विकास के अनेक कार्य किए हैं। रमन सिंह ने अपने सुशासन और विकास कार्यों के बदौलत छत्तीसगढ़ राज्य का नाम देश के अग्रणी विकसित राज्यों की सूची में दर्ज करा दिया है। यह गौरव की बात है। रमन सिंह की पीडीएस की योजना की तारीफ पूरे देश में हो रही है। रमन सिंह ने किसानों के साथ-साथ युवाओं की भलाई के लिए भी काफी कार्य किए हैं। उनको दी जाने वाली सुविधाओं में इजाफा किया है। इसलिए भाजपा प्रत्याशियों को जनता जरूर जिताएगी, ऐसा मेरा विश्वास है और राज्य में फिर से रमन सिंह की सरकार बनेगी। तीसरी बार भाजपा की सरकार बनने के बाद किसानों को धान पर 300 रूपए प्रति क्विंटल बोनस दिया जाएगा। इसके अलावा अन्य कई महात्वाकांक्षी योजनाओं पर भी अमल किया जाएगा, जिससे छत्तीसगढ़ के नागरिकों को भरपूर फायदा मिलेगा।
भीड़ जुटाने में असफल रहे भाजपाई
सुषमा स्वराज ने गनियारी और सीपत में करीब पंद्रह-पंद्रह मिनट अपना भाषण दिया। वे गनियारी में करीब निर्धारित समय से 25 मिनट देर से पहुंची थी। भाषण शुरू करने से पहले ही उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया था कि वे ज्यादा नहीं बोलेंगी, क्योंकि उन्हें शाम तक कुछ अन्य सभाएं भी लेनी हैं। गौरतलब है कि गनियारी और सीपत में सुषमा स्वराज के सभास्थल में ग्रामीणों की भीड़ काफी कम थी। दोनों जगह पंडाल का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा खाली नजर आया। यहां भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं द्वारा भीतरघात और असहयोग किए जाने के कारण अपेक्षा के अनुरूप सभास्थल में ग्रामीणों की भीड़ जुटा पाने में प्रत्याशियों के समर्थक असफल रहे। तखतपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के प्रत्याशी राजू सिंह क्षत्री और मस्तूरी से भाजपा प्रत्याशी डा. कृष्णमूर्ति बांधी को उम्मीद थी कि पार्टी की स्टार प्रचारक और कुशल वक्ता सुषमा स्वराज को सुनने के लिए ग्रामीण मतदाताओं की भीड़ उमड़ पड़ेगी। जबकि ऐसा नहीं हो सका। ये दोनों सभाएं पूरी तरह फ्लॉप दिखीं।

-दिनेश ठक्कर "बापा"
 (चित्र - साभार रतन जैसवानी)  

केंद्र में हमारी सरकार बनी तो देश के हालात बदल देंगे - राजनाथ

देश में 55 वर्षों तक कांग्रेस ने केंद्र में सरकार चलाई, फिर भी वह आज तक महंगाई कम नहीं कर सकी। देश में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और घोटाले लगातार तेजी से बढ़े हैं। नेहरू परिवार द्वारा देश में लंबे समय तक हुकुमत करने के बावजूद अब तक गरीबी दूर नहीं हो सकी है। दुनिया के एक तिहाई गरीब इसी देश में हैं। आज बेरोजगार रोजगार की तलाश में दर-दर ठोकरें खा रहे हैं। अगर हमें इस बार केंद्र में सरकार बनाने का मौका मिलेगा तो हम देश के हालात बदल देंगे। यह बात भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने गुरूवार को छत्तीसगढ़ के बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम भाड़ी में चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कही।
बिलासपुर से 35 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम भाड़ी में भाजपा के पक्ष में प्रचार करने पहुंचे राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में सोनिया और राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि देश की आजादी के बाद से लगभग 55 वर्षों तक सत्ता में रहने वाली कांग्रेस की सरकार ने देश को क्या दिया ? जो काम कांग्रेस की सरकारों ने बीते वर्षों में नहीं किया, उससे भी अधिक काम छत्तीसगढ़ की रमन सरकार ने 10 साल में कर दिखाया है। जब रमन सिंह 10 वर्षों के भीतर छत्तीसगढ़ की तस्वीर बदल सकते हैं, तो नेहरू, इंदिरा, राजीव, सोनिया गांधी ने आखिर इतने वर्षों में देश की तस्वीर क्यों नहीं बदली। राहुल गांधी दौरे पर जब जाते हैं, तो प्रायोजित मीडिया के जरिए लुभावनी तस्वीरें खिंचवाकर जनता को गुमराह करते हैं। लंबे समय तक यदि राजनीति करना हो, तो लोगों की आंखों में धूल झोंककर नहीं, लोगों का दिल जीतकर राजनीति की जाती है। राहुल गांधी आज के नौजवानों को गुमराह कर रहे हैं। सोनिया गांधी भी यही कार्य कर रही है। इनके परिवार ने देश की जनता को धोखा दिया है। जनता को छला है। जिस दिन भारत कांंग्रेस मुक्त होगा, तब देश बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार से भी मुक्त हो जाएगा। देश में संसाधनों और श्रम शक्ति की कमी नहीं है, बल्कि इसका सही सदुपयोग होना चाहिए। देश में महंगाई, घोटाले, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी हद से अधिक बढ़ चुके हैं और इसकी जिम्मेदार सिर्फ कांग्रेस है। अगर केंद्र और राज्य में हमारी सरकार आई तो आगामी पंद्रह बरसों के भीतर देश से गरीबी और बेरोजगारी का नामोनिशान मिटा देंगे।
श्री सिंह ने मनमोहन सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उन्होंने सौ दिन के भीतर महंगाई कम करने का वादा किया था, लेकिन हजार दिन बीत जाने के बावजूद महंगाई नहीं थमी है। केंद्र सरकार महंगाई घटाने में विफल रही है, जबकि अटल बिहारी की सरकार के दौरान छह वर्षों तक महंगाई को बढऩे से रोका गया था। अटलजी के कार्यकाल के दौरान अमेरिका जाने वाले भारतीय नागरिकों को सम्मान की नजरों से देखा जाता था, जबकि आज मनमोहन सरकार के वक्त देश के नागरिकों को अमेरिका में बेहद गरीब माना जाता है। मनमोहन सिंह आज हाथ फैलाकर विदेशी निवेश की बात करते हैं, दरअसल वे देश को विदेशी पूंजीपतियों के हवाले करना चाहते हैं।
 राजनाथ सिंह ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह की तारीफ में कसीदे गढ़ते हुए कहा कि रमन सरकार ने 10 वर्षों में जो काम किया है, वह हिन्दुस्तान के किसी दूसरे राज्य में देखने को नहीं मिला है। 2003 से 2013 तक यदि हमने जनता के भलाई के लिए काम किया है, तो इस चुनाव में भाजपा को वोट दीजिएगा। वैसे भाजपा सरकार ने अपने कार्यकाल में हर वादे को निभाया है। अगर हमने अपनी सत्ता के दौरान जनता को धोखा किया है, आंखों में धूल झोंकी है, तो मेरे पते पर दिल्ली में एक चिट्ठी लिखकर भेज दीजिए। कभी भी हमने गलत बात कही हो तो इसके लिए हम क्षमा चाहते हैं। 2003 के चुनाव के बाद हमने 1 और 2 रूपए किलो चावल देने की योजना शुरू की थी। हमने चुनाव में इसका वादा भी नहीं किया था, लेकिन योजना शुरू की, जिसकी तारीफ देश भर ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी हुई है। छत्तीसगढ़ में रमन सरकार ने हर माह गरीबों को 35 किलो चावल देने का जो कानून लागू किया है, वह किसी भी राज्य में नहीं है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि 10 साल पहले प्रदेश में किसानों से धान की खरीदी भी ठीक ढंग से नहीं होती थी और न ही इसकी उचित कीमत उन्हें मिलती थी। वर्तमान में हर क्षेत्र में धान खरीदी केंद्र भी बढ़े हैं। किसानों को धान की कीमत के अलावा 270 रूपए प्रति क्विंटल बोनस भी दिया जा रहा है, जो किसी दूसरे राज्य में नहीं दिया जाता है। एक माह बाद जब भाजपा सरकार तीसरी बार सत्ता में आएगी तो किसानों को धान का बोनस 300 रूपए प्रति क्विंटल दिया जाएगा। विभिन्न योजनाओं के तहत् दी जा रही पेंशन भी दोगुनी की जाएगी।
कांग्रेस की सरकार मीडिया के सर्वे से विचलित
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने आमसभा के बाद मंच के पास पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कांग्रेस की सरकार मीडिया द्वारा कराए जा रहे सर्वेक्षण से विचलित हो गई है और उस पर रोक लगाने के उपाय कर रही है। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कुठाराघात है। मीडिया देश का चौथा स्तंभ है। इस तरह के सर्वे पर रोक नहीं लगनी चाहिए। भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष करूणा शुक्ला द्वारा पार्टी छोडऩे और बगावत किए जाने के मामले में उन्होंने कहा कि करूणा शुक्ला का इस्तीफा हमें मिल गया है और उसे हमने स्वीकार भी कर लिया है। जहां तक बगावत किए जाने का सवाल है तो इससे पार्टी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। भाजपा से बगावत करने वाले बागी प्रत्याशियों के पक्ष में करूणा शुक्ला द्वारा प्रचार-प्रसार किए जाने से भी भाजपा को कोई नुकसान नहीं होगा। भाजपा के प्रति करूणा शुक्ला द्वारा दिए गए विरोधी बयानों का कोई आधार नहीं है। वे पूरी तरह बेबुनियाद हैं।
बिना अनुमति के वाहनों से रोजी पर लाया गया ग्रामीणों को
राजनाथ सिंह की आमसभा में भीड़ जुटाने के लिए लगभग 40 वाहनों को लगाया गया था। यही नहीं बल्कि आसपास के गांवों से रोजी पर ग्रामीणों को एकत्रित कर उन्हें वाहनों से आमसभा स्थल तक लाया गया था। ट्रेक्टर, मेटाडोर और अन्य वाहनों को सभास्थल के पास बड़ी संख्या में देखा गया, जबकि चुनाव आयोग द्वारा इस तरह किसी को भी लाए जाने पर रोक लगाई गई है। वहीं  दूसरी ओर बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के चुनाव प्रभारी द्वारा ग्रामीणों को प्रलोभन देने के लिए सभास्थल के आसपास चाय-नाश्ते के ठेले भी लगवाए गए थे। वहां ग्रामीणों को मुफ्त चाय-नाश्ता कराने की व्यवस्था की गई थी।
हैलीकाप्टर उतरा तो मची भगदड़
सभास्थल के बिलकुल निकट हैलीपैड बनाया गया था। सभा से पहले काफी तादाद में ग्रामीण हैलीकाप्टर देखने के लिए इकट्ठे हुए थे। जब राजनाथ सिंह का हैलीकाप्टर हैलीपैड पर उतरा तो आंधी-तूफान की तरह धूल इस कदर उड़ी कि मौके पर ग्रामीणों की भगदड़ मच गई। हैलीपैड के आसपास पुलिस प्रशासन की व्यवस्था लचर दिखाई दी। ऐसे में कोई हादसा भी हो सकता था, क्योंकि हैलीपैड मंच से ज्यादा दूर नहीं था और लैंडिंग के वक्त ऐसी स्थिति निर्मित हो गई थी। आंखों में धूल पडऩे से ग्रामीण काफी देर तक परेशान होकर आंखों को मलते रहे और भाजपाईयों को कोसते रहे।

-दिनेश ठक्कर "बापा"
  (चित्र : साभार रतन जैसवानी)


दबंग दुनिया में प्रकाशित चुनावी हलचल पर मेरी रपट


गुरुवार, 7 नवंबर 2013

बागियों ने बिगाड़ा बिलासपुर जिले का चुनावी समीकरण


छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सात विधान सभा क्षेत्रों में तखतपुर ही एक मात्र ऐसी सामान्य सीट जो भाजपा और कांग्रेस के बागियों के चुनाव समर में डटे रहने के कारण पंचकोणीय मुकाबले वाली सीट हो गई है। जबकि मस्तूरी में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार हैं। इसी तरह बेलतरा में फिलहाल भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर दिखाई दे रही है, लेकिन अंतिम क्षणों में अनुसूचित जाति के बसपा और निर्दलीय प्रत्याशी सीधे मुकाबले को उलझा भी सकते हैं। .      
तखतपुर सामान्य सीट में इस दफे पंच कोणीय मुकाबला होने की संभावना है। यहाँ कुल सोलह उम्मीदवार मैदान में हैं। मुख्य राष्ट्रीय दलों के प्रत्याशियों द्वारा प्रलोभन दिए जाने के बावजूद यहाँ किसी भी बागी और निर्दलीय उम्मीदवार ने नामांकन पत्र वापस नहीं लिया है। यहाँ के पूर्व कांग्रेस विधायक बलराम सिंह ठाकुर के बेटे और कांग्रेस प्रत्याशी आशीष सिंह ठाकुर अपने ही दल के बागी शिवा माली से आक्रांत हैं। आशीष प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चरणदास महंत के चेले हैं। उन्हें चौतरफा कड़े मुकाबले से उबारने महंत ने सियासी गोटिया बिछा दी है किन्तु उसका फायदा शायद ही मिलेगा। टिकट न मिलने से नाराज कांग्रेस के बागी और जिला पंचायत सदस्य शिवा माली निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में आशीष को बददुआ देते हुए उसे निपटाने की जुगत में लगे है। इसी तरह मौजूदा विधायक और भाजपा प्रत्याशी राजू सिंह क्षत्री को भी बागी हुए भाजपा के पूर्व विधायक और शिव सेना प्रत्याशी जगजीत सिंह मक्कड़ पटखनी देने कमर कस चुके हैं। इन सबकी लड़ाई का फायदा उठाने बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी संतोष कौशिक अपने पक्ष में माहौल बनाने जुटे है. वे भी जिला पंचायत के सदस्य हैं, इसलिए उनकी क्षेत्र में पकड़ मजबूत बनी हुई है। खासकर अनुसूचित जाती के मतदाताओं में उनकी गहरी पैठ है। वे यहाँ का सियासी समीकरण बदलने की क्षमता रखते हैं। सही तस्वीर इस हफ्ते स्पष्ट हो जायेगी।
जबकि बेलतरा सामान्य सीट पर भाजपा के वर्त्तमान विधायक और बुजुर्ग प्रत्याशी बद्रीधर दीवान और कांग्रेस के प्रत्याशी भुवनेश्वर यादव के बीच सीधी टक्कर होनी है। पिछली बार भुवनेश्वर यादव को पराजय मिली थी। इस बार उन्हें जीत का भरोसा है. लेकिन जातिगत समीकरण फिलहाल भाजपा के ब्राह्मण प्रत्याशी बद्रीधर दीवान के पक्ष में दिख रहे हैं।.बहुजन समाज पार्टी को पिछले चुनाव में वोट करने वाले अनुसूचित जाति के कई परंपरागत मतदाता कार्यकर्ता भाजपा से जुड़ गए है। इसका सीधा फायदा भाजपा प्रत्याशी बद्रीधर दीवान को मिल सकता है। हालांकि अंतिम क्षणों में बहुजन समाज के प्रत्याशी देवकुमार कनेरी सहित अनुसूचित जाति के एक दो निर्दलीय प्रत्याशी जातिगत समीकरणों के चलते सीधे मुकाबले को उलझा सकते हैं।    बेलतरा में कुल सत्रह प्रत्याशी चुनाव समर में उतरे हैं। यहाँ भी भाजपा और कांग्रेस द्वारा कुछ निर्दलीय प्रत्याशियों को नाम वापस लेने आर्थिक प्रलोभन दिया गया था, ताकि दो ईवीएम लगाने की नौबत न आए और नोट बटन का भय उत्पन्न न हो।  
वही दूसरी तरफ मस्तूरी सुरक्षित सीट पर भी त्रिकोणीय मुकाबला  होने की संभावना प्रबल है। यहाँ के मौजूदा भाजपा विधायक डा कृष्णमूर्ति बांधी तीसरी बार चुनाव लड़ रहे है। उनका मुकाबला कांग्रेस के नए चहेरे और प्रत्याशी दिलीप लहरिया से होना है। लहरिया इस क्षेत्र के नामी लोक कलाकार है। अपनी कला प्रतिभा के जरिये वे यह चुनाव जीतने की मंशा पाले हुए हैं.किन्तु यहाँ बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी तुकाराम जोशी, निर्दलीय प्रत्याशी राजेश्वर भार्गव कांग्रेस प्रत्याशी की जड़ों में मठा डालने की कोशिश कर रहे है। इसीलिये भाजपा प्रत्याशी बांधी को अपनी जीत की आशा बंधी हुई है। यहाँ कुल तेरह उम्मीदवार मैदान में हैं। ज्ञात हो कि मस्तूरी सीट अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व है। इस इलाके में सूर्यवंशी और सतनामी समाज के लोगों की संख्या लगभग बराबर है। सतनामी समाज के अग्रणी लोगों का इस बात पर विरोध कायम है कि कांग्रेस ने उनके समाज के व्यक्ति को टिकट नहीं देकर उपेक्षा की है।जिला पंचायत सदस्य और निर्दलीय प्रत्याशी राजेश्वर भार्गव कांग्रेस की टिकट के आकांक्षी थे। टिकट न मिलने से नाराज होकर बतौर निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव लड़ रहे राजेश्वर भार्गव की नजर में कांग्रेस प्रत्याशी दिलीप लहरिया भाजपा प्रत्याशी डा बांधी की तुलना में बेहद कमजोर उम्मीदवार हैं। इसलिए लहरिया की सामाजिक और राजनैतिक कमजोरी का लाभ उन्हें मिलेगा।              

- दिनेश ठक्कर "बापा"                                                   

बुधवार, 6 नवंबर 2013

बिलासपुर जिले की सात विधान सभा सीट के सियासी समीकरण

प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित किये जाने के बाद छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के सातों विधान सभा क्षेत्रों में सियासी हलचलें बढ़ गई हैं। चुनावी समर के योद्धाओं की स्थिति भी स्पष्ट हो गई है।17 उम्मीदवारों द्वारा मैदान छोड़ने के बाद जिले में अब105 प्रत्याशी सत्ता संग्राम में अपना कौशल दिखाएंगे। सबसे कम प्रत्याशी अजीत जोगी की मौजूदा सीट मरवाही में है। यहाँ उनके पुत्र अमित समेत दस प्रत्याशी मैदान में हैं, जबकि जोगी पत्नी डा रेणु की कोटा सीट में सर्वाधिक 19 प्रत्याशी हैं।
तखतपुर और मस्तूरी को छोड़ कर बाकी पांच सीट पर भाजपा और कांग्रेस उम्मीदवार के बीच सीधी टक्कर होने के आसार दिख रहे हैं।
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी इस बार अपनी सुरक्षित मरवाही सीट से खुद न लड़ कर अपने बेटे अमित जोगी को खड़ा कर उसे सक्रिय राजनीति के अखाड़े में उतार दिया है। जनता के कमिया (सेवक) बन कर मरवाही को प्रदेश में वीआईपी सीट का तमगा दिलाने वाले अजीत जोगी ने यहाँ अपने पुत्र और कांग्रेस प्रत्याशी अमित की जीत का दावा किया है। अमित ने भी उत्तराधिकारी बतौर पिता की तरह मरवाही का कमिया बनने का ऐलान किया है। मध्यप्रदेश की सीमा से लगे मरवाही विधान सभा क्षेत्र का चुनाव परिणाम जोगी पुत्र के राजनैतिक भविष्य की दिशा और दशा का निर्धारण करेगा। इसके साथ ही अजीत जोगी की तरह अमित भी अब आदिवासी होने या न होने के विवाद जाल में उलझ जायेंगे। अमित की जाति और नागरिकता पर भाजपा प्रत्याशी समीरा पैकरा की आपत्ति निरस्त कर निर्वाचन अधिकारी द्वारा अमित का नामांकन पत्र वैध घोषित किये जाने के बावजूद यह विवाद भी भविष्य में कोर्ट तक पहुँच सकता है। जाहिर है मरवाही की इस हाई प्रोफाइल सीट पर अब चुनावी हथकंडे भी खूब अपनाए जाएंगे। जिले के सात विधान सभा क्षेत्रों में सबसे कम दस प्रत्याशी यहाँ अपनी किस्मत आजमा रहे है। पहली बार चुनाव लड़ने वाले अमित जोगी का सीधा मुकाबला भाजपा प्रत्याशी कु. समीरा बाई पैकरा से होना है। दो दफे जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतने वाली समीरा मरवाही के विधान सभा चुनाव समर में सियासी ताकत और धन बल के मद्देनजर कमजोर साबित हो सकती हैं। अमित जोगी की जाति और नागरिकता के शपथ पत्र को झूठा बताने वाली समीरा पैकरा का पॉलिटिकल पैकअप कराने जोगी परिवार जुगत में है, तो दूसरी तरफ भाजपा के स्थानीय बागियों और असंतुष्ट कार्यकर्ताओं के भितरघात से कमल खिलने से पहले ही मुरझा सकता है। राष्ट्रीय गोंडवाना पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती उर्मिला मार्को यहाँ मुकाबले को त्रिकोणीय करने के फेर में है। बहुजन समाज पार्टी के तपेश्वर मरावी, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के सुमन सिंह वाकड़े और पांच निर्दलीय प्रत्याशी अपनी जमानत बचा लें तो यही उनकी उपलब्धि होगी।    
अजीत जोगी की पत्नी और कोटा की मौजूदा विधायक डा रेणु जोगी इस बार फिर कांग्रेस के हाथ के साथ कोटा के चुनाव मैदान में अपना वजूद कायम रखने जोर आजमाइश कर रही हैं। इस सामान्य सीट पर सर्वाधिक 19 प्रत्याशी चुनावी मोर्चा लिए हुए हैं।यहाँ डा रेणु जोगी का सीधा मुकाबला भाजपा के नए चहेरे- प्रत्याशी काशीराम साहू से है। इस बार फिर यहाँ भाजपाई भितरघाती चुनावी तालाब से कमल का अस्तित्व मिटाने और खुन्नस का कीचड़ फ़ैलाने में शायद ही कोई कसर बाकी रखे। ख़ास बात यह भी है कि नाम का भ्रम पैदा करने के लिए जोगी का साथ देते हुए छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच ने भी अपना प्रत्याशी काशीराम साहू को चुनाव मैदान में उतारा है। हालाँकि भाजपा प्रत्याशी के नाम की समानता का लाभ इन्हे शायद ही मिले। यहाँ बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी महेश दीवाकर, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रत्याशी मनोहर लाल ध्रुव और लोकजन शक्ति पार्टी के उम्मीदवार श्याम कार्तिक के अलावा तेरह निर्दलीय प्रत्याशियों को भी अपनी जमानत बचाने जद्दोजहद करनी पड़ेगी।        
बिलासपुर जिले की तीसरी चर्चित सीट बिल्हा है। यहाँ से विधान सभा अध्यक्ष और भाजपा प्रत्याशी धरमलाल कौशिक निरंतर दूसरी दफे जीत का सेहरा बांधने चुनाव समर में हैं। इनसे पिछली बार हारे सियाराम कौशिक को कांग्रेस ने राहुल फार्मूले को दरकिनार कर फिर अपना प्रत्याशी बनाया है। पूर्व में यहाँ से एक बार कांग्रेस के विधायक रह चुके सियाराम कौशिक का दावा है कि इस चुनाव में धरमलाल को उसके करम ले डूबेंगे। जबकि धरमलाल ने भरोसा जताया है कि बिल्हा क्षेत्र में हुए करोड़ों के विकास कार्यों के कारण जनता उन्हें फिर जिताएगी। इस सामान्य सीट पर कुल पंद्रह प्रत्याशी चुनावी जंग में शामिल हैं। कुर्मी जाति के राजनैतिक प्रभाव वाले इस विधान सभा क्षेत्र में बहुजन समाज पार्टी की तरफ से प्रत्याशी जगदीश कौशिक अपने पुराने गुरू धरमलाल की सियासी बाजी पलटाने का प्रपंच रच रहे हैं। वे इस वक्त बोदरी नगर पंचायत के अध्यक्ष भी हैं। भाजपा से तरजीह न मिलने के कारण अलग होकर उन्होंने नगर पंचायत का चुनाव निर्दलीय लड़ा था और जीते थे। तब से वे धरमलाल से खुन्नस रखते हैं। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस के कुछ वोट बसपा से बागी हुए दिलीप कुमार कोसले और सीपीआई (एमएल) रेडस्टार के प्रत्याशी रमेश कुमार सतनामी काटेंगे।
बिलासपुर सामान्य सीट भी नगरीय प्रशासन, स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल और कांग्रेस की मेयर श्रीमती वाणी राव के प्रत्याशी होने के कारण हाई प्रोफाइल हो गई है। यहाँ कुल पंद्रह प्रत्याशी मैदान में में हैं, लेकिन सीधा मुकाबला अमर अग्रवाल और वाणी राव के मध्य होना है। छत्तीसगढ़ राज्य बनने से पूर्व यानी वर्ष 1998 के विधान सभा चुनाव से निरंतर जीत रहे अमर अग्रवाल ने चौथी बार अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगाई है, लेकिन इस बार अनिल टाह जैसा कमजोर और वाकओवर देने वाला कांग्रेस प्रत्याशी नहीं है बल्कि जुझारू और पढ़ी लिखी तेजतर्रार महापौर वाणी राव को राहुल गांधी ने चुनाव समर में उतारा है। इस दफे अमर की नींद उड़ना स्वाभाविक है। अमर के द्वारा पूरी ताकत लगा देने के बावजूद वाणी राव ने मेयर के सीधे चुनाव में भाजपा की प्रत्याशी मंदाकिनी पिंगले को करीब दस हजार वोट से हराया था। इसलिए भी अमर को इस बार का मुकाबला कांटे का लग रहा है।
तखतपुर सामान्य सीट में इस दफे पंच कोणीय मुकाबला होने की संभावना है। यहाँ कुल सोलह उम्मीदवार मैदान में हैं। यहाँ के पूर्व कांग्रेस विधायक बलराम सिंह ठाकुर के बेटे और कांग्रेस प्रत्याशी आशीष सिंह ठाकुर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चरणदास महंत के चेले हैं। उन्हें चौतरफा कड़े मुकाबले से उबारने महंत ने सियासी गोटिया बिछा दी है, किन्तु उसका फायदा शायद ही मिलेगा। कांग्रेस के बागी और जिला पंचायत सदस्य शिवा माली निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में आशीष को बददुआ देते हुए उसे निपटाने की जुगत में लगे है। इसी तरह मौजूदा विधायक और भाजपा प्रत्याशी राजू सिंह क्षत्री को भी बागी हुए भाजपा के पूर्व विधायक और शिव सेना प्रत्याशी जगजीत सिंह मक्कड़ पटखनी देने कमर कस चुके हैं। इन सबकी लड़ाई का फायदा उठाने बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी संतोष कौशिक अपने पक्ष में माहौल बनाने जुटे है।
बेलतरा सामान्य सीट पर भाजपा के वर्त्तमान विधायक और बुजुर्ग प्रत्याशी बद्रीधर दीवान और कांग्रेस के प्रत्याशी भुवनेश्वर यादव के बीच सीधी टक्कर होनी है। पिछली बार भुवनेश्वर को पराजय मिली थी। इस बार उन्हें जीत का भरोसा है, लेकिन जातिगत समीकरण फिलहाल दीवान के पक्ष में दिख रहे हैं। बेलतरा में कुल सत्रह प्रत्याशी चुनाव समर में उतरे हैं।
मस्तूरी सुरक्षित सीट पर भी मौजूदा भाजपा विधायक डा कृष्णमूर्ति बांधी तीसरी बार चुनाव लड़ रहे है। उनका मुकाबला कांग्रेस के नए चहेरे और प्रत्याशी दिलीप लहरिया से होना है। लहरिया इस क्षेत्र के नामी लोक कलाकार है। अपनी कला प्रतिभा के जरिये वे यह चुनाव जीतने की मंशा पाले हुए हैं, किन्तु यहाँ बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी तुकाराम जोशी, निर्दलीय प्रत्याशी राजेश्वर भार्गव कांग्रेस प्रत्याशी दिलीप की जड़ों में मठा डालने की कोशिश कर रहे है। इसीलिये भाजपा प्रत्याशी बांधी को अपनी जीत की आशा बंधी हुई है। यहाँ कुल तेरह उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं।    

- दिनेश ठक्कर "बापा"                                                                               .    .        

जोगी पत्नी-पुत्र, धरम-अमर की सीट के सियासी हालात पर छपी मेरी रपट


सोमवार, 4 नवंबर 2013

जोगी ने जारी किया कांग्रेस का चुनावी घोषणा पत्र


छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेश चुनाव अभियान समिति के संयोजक अजीत जोगी ने सोमवार को दोपहर बारह बजे बिलासपुर के कांग्रेस भवन में चुनावी घोषणा पत्र जारी किया। छत्तीसगढ़ कांग्रेस कमेटी ने इस घोषणा पत्र के माध्यम से ढाई करोड़ छत्तीसगढ़िया लोगों की अपेक्षाओं और सपनों को साकार करने का प्रण लिया है। इसमें सभी वर्गों को लुभाने की कोशिश की गई है, जबकि किसानो के हितों पर खास फोकस किया गया है।.
छत्तीसगढ़ में 11 नवम्बर (18 विधानसभा क्षेत्र) और 19 नवम्बर (72 विधानसभा क्षेत्र) को होने वाले तीसरे विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सोमवार को अजीत जोगी ने चुनाव घोषणा पत्र जारी करते हुए बताया कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने पर किसानों से दो हजार रूपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की जायेगी। इस खरीदी मूल्य में से पांच सौ रूपये प्रति क्विंटल का भुगतान सीधे किसान परिवार के महिला सदस्य के नाम पर किया जायेगा। खाद कंपनी से सीधे सोसायटी गोदाम तक खाद पहुंचाया जाएगा। इसके अलावा पांच एचपी तक के  विद्युत पम्पों को मुफ्त बिजली दी जायेगी। सिंचाई हेतु नए पम्प कनेक्शन के लिए ट्रांसफार्मर शासन लगाएगा। इंदिरा गाँव गंगा योजना को फिर शुरू किया जायेगा। लघु औए सीमान्त सीमान्त किसानों के समस्त जल कर बकाये और सभी अल्पकालीन कृषि कर्ज को माफ़ किया जायेगा। उन्हें शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर कर्ज दिया जायेगा। गन्ने के बोनस और परिवहन दर में वृद्धि, दस हजार एकड़ के किसान तैयार हो तो शक्कर कारखाना स्थापित किया जाएगा। कृषि और बागवानी आधारित उद्योगों, पुष्प और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा, भूमिहींन कृषकों का एक लाख रूपये का एकमुश्त जीवन बीमा, बिजली की बढ़ी हुई दरों में उचित कमी, कृषि, घरेलू बिजली, लघु व्यवसाय हेतु बिजली की विशेष राहत दी जायेगी। नगरीय क्षेत्रो में जल कर और समेकित कर को प्रचलित दर से आधा किया जायेगा। संपत्ति कर  पूर्ववत कम दर पर लिया जायेगा। भागीरथी नल जल योजना को कनेक्शन शुल्क से मुक्त किया जायेगा। खुले भूखंड पर टैक्स नहीं लगेगा। स्टाम्प ड्यूटी का युक्तियुक्तकरण कर छोटे जमीन सौदों को राहत दी जायेगी। पसरा टैक्स की समाप्ति होगी। राज्य में एक दशक के दौरान हुए सभी तरह के भूअर्जन और भूमि हड़पने के सन्बन्ध में जांच आयोग का गठन किया जायेगा।
जोगी ने यह भी जानकारी दी कि राज्य के सभी एपीएल और बीपीएल परिवारों को (आयकर दाता को छोड़कर) 35 किलो चावल प्रति माह मुफ्त दिया जायेगा. बेरोजगारी भत्ते की दर में वृद्धि, विकलांगता पेंशन और सामाजिक सुरक्षा पेंशन में राज्यांश दोगुना, असंगठित श्रमिकों का बीमा दोगुना किया जायेगा। लड़कियों को सभी तरह के गैर तकनीकी और व्यवसायिक उच्च शिक्षा में मदद के अलावा शिक्षण शुल्क सीधे कालेज के खाते में जमा कराया जाएगा।  सरकारी सेवा की प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होने वाले आवेदकों से लिया जाने वाला शुल्क ख़त्म किया जायेगा। व्यापम के जरिये होने सभी परीक्षा फार्म के भारी शुल्क को भी समाप्त किया जायेगा। राज्य में सभी विभागों के खाली पदों को भरने भर्ती अभियान चला कर  बैकलॉग ख़त्म किया जायेगा। कलाकारों को नई राजधानी में रियायती दरों पर आवासीय भूखंड दिए जायेंगे। अनुसूचित जाति वर्ग का आरक्षण 12 से बढाकर 16 प्रतिशत किया जाएगा। उनके जाति प्रमाण पत्र प्रदान करने के नियमों का सरलीकरण किया जायेगा। उनके आर्थिक उत्थान के लिए विशेष वित्तीय योजना लागू होगी। अनूसूचित जनजाति के लोगों से वनोत्पादों को समर्थन मूल्य पर खरीदने की योजना बनेगी। वन अधिकार क़ानून के तहत वन भूमि में काबिज लोगों को पट्टा दिलाने सभी प्रकरणों का जल्द निपटारा किया जायेगा। नक्सल हिंसा या उसके प्रतिवाद में हुई हिंसा से प्रभावित लोगो के पुनर्वास और पुनर्स्थापन की विशेष योजना बनाई जायेगी। गोंड़ी और अन्य आदिवासी बोली तथा भाषाओँ के संरक्षण के लिए अकादमी की स्थापना होगी। बस्तर बटालियन की स्थापना होगी। अनूसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग के भी जाति प्रमाण पत्र प्रदान नियमो का सरलीकरण होगा। पिछड़ा वर्ग के विकास की योजना बनेगी। हर जिले में पिछड़ा वर्ग के लिए छात्रावास बनाये जायेंगे।
जोगी के मुताबिक नक्सल समस्या के निदान के लिए भी कुछ योजनाये बनाई जायेगी। विश्वास बहाली पर आधारित नीति बनेगी। वहाँ योजनाये बनाते समय ग्राम सभाओं की राय ली जायेगी। मुख्य धारा में आने वाले नक्सलियों के साथ सहानुभूति व्यवहार होगा। नक्सली क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों और सुरक्षा बालों को जोखिम भत्ता दिया जायेगा। नक्सली हिंसा में दिवंगत कोटवार के उत्तराधिकारियों को तीन लाख की अनुग्रह राशि और स्थाई अपंगता पर दो लाख रूपये दिए जायेंगे। झीरम घाटी को शहीद स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।
घोषणा पत्र के अन्य प्रमुख वादों का जिक्र करते हुए जोगी ने बताया कि पहुँचविहीन और दूरस्थ आदिवासी अंचलों से आपातकाल में मरीजों को शिफ्ट करने सरकारी एयर एम्बुलेंस की सुविधा दी जायेगी जो कि एम्बुलेंस 108 की तर्ज पर ही कार्य करेगी। इसके लिए बस्तर और सरगुजा में बेस कैम्प बनाये जायेंगे। वहीं दूसरी तरफ हाथी प्रभावित क्षेत्रों में जानमाल के नुक्सान के मुआवजे की प्रक्रिया में बदलाव किया जाएगा। जनहानि पर पांच लाख रूपये और फसल तथा मकान के वास्तविक नुकसान का आंकलन कर पूरा मुआवजा दिया जायेगा। रमन सरकार से नाराज चल रहे शिक्षा कर्मियों को समान काम समान वेतन देने की अवधारणा है। प्रबंधक लघु वनोपज संघ के प्रबंधकों, ग्राम पटेलों और कोटवारों का मानदेय दो गुना किया जाएगा। दिल्ली में एक छत्तीसगढ़ सहायता केंद्र की स्थापना की जायेगी जहाँ एक टोल फ्री नंबर के जरिये राज्य के नागरिकों को मार्गदर्शन और मदद मुहैया कराई जायेगी। राज्य के सतत और स्थाई विकास के लिए पर्यावरण हितैषी दीर्घकालीन योजना लागू की जायेगी।
घोषणा पत्र में राज्य के विकास संबंधी वादों के बारे में जोगी ने कहा कि बिलासपुर, जगदलपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, रायगढ़, कोरबा, अम्बिकापुर जैसे शहरों में  राज्यस्तरीय शिक्षण और अनुसंधान संस्थान स्थापित किये जायेंगे। साथ ही बिलासपुर, जगदलपुर,अंबिकापुर और कोरबा हवाई पट्टी के विकास के लिए आवश्यक पहल की जायेगी। राज्य की रेल कॉरीडोर योजना में गैर खनिज धारित क्षेत्रों में भी रेल लाइन बिछाई जायेगी। जोगी ने यह भी कहा कि भाजपा ने अभी तक अपना चुनाव घोषणा पत्र इसलिए जारी नहीं किया है क्योंकि वह हमारे पहले जारी किये गए घोषणा पत्र की नक़ल करना चाहती है।    

-दिनेश ठक्कर "बापा"                     

शनिवार, 26 अक्तूबर 2013

बहुरूपिया हैं अजीत जोगी - राजमहंत

 "छतीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी कांग्रेस हाईकमान और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को गुमराह कर नए, कमजोर और अस्तित्वहीन लोगो को टिकट दिला कर भाजपा को फायदा पहुंचा रहे हैं। कांग्रेस की जारी पहली और दूसरी सूची से साबित होता है कि अजीत जोगी छत्तीसगढ़ में भाजपा को फिर से सत्तारूढ़ कराना चाहते हैं।" यह गंभीर आरोप छत्तीसगढ़ के सतनामी समाज के राजमहंत दीवान चंद सोनवानी, दशेराम खांडेय और भारत सिंह खांडेकर ने शुक्रवार को संयुक्त पत्रवार्ता के दौरान लगाए।
बिलासपुर प्रेस क्लब में आयोजित संयुक्त पत्रवार्ता में राजमहंतों ने विधान सभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस टिकट के वितरण में अजीत जोगी की भूमिका पर नाराजगी जताते हुए कहा कि जोगी ने सतनामी समाज के धर्मगुरुंओं को टिकट से वंचित कराया है। वे कांग्रेस की तीसरी सूची में भी सतनामी समाज के योग्य नेताओं और राजमहंतों को टिकट से वंचित कराने की साजिश रच रहे हैं। जोगी चाहते हैं कि सतनामी समाज के धर्म गुरू परिवार में से किसी को भी कांग्रेस का टिकट न मिले। इसीलिए वे सतनामी समाज के कुछ लोगों के जरिये आरक्षण संबंधी फर्जी मुहिम चला रहे हैं। जोगी ने आरक्षण रक्षा समिति के अध्यक्ष केपी खांडे और कुछ राजमहंतों को धोखे में रख कर धर्म गुरूओं के प्रति फर्जी बयानबाजी करा रहे हैं। जोगी समझते है कि छत्तीसगढ़ का पूरा सतनामी समाज उनके साथ है, जबिक यह हकीकत नहीं है। जोगी परिवारवाद को बढ़ावा देकर अपना हित साध रहे हैं। उन्होंने अपने स्वार्थ की खातिर सतनामी समाज को चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है। सतनामी समाज अब जोगी की यह करतूत बर्दाश्त नहीं करेगा। इस चुनाव में उन्हें सबक सिखाया जाएगा।
सतनामी समाज की नजर में
बहुरूपिया हैं अजीत जोगी
राजमहंतों से जब यह पूछा गया कि अजीत जोगी को वे किस समाज का सदस्य मानते हैं? इसके जवाब में उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि जोगी का कोई समाज नहीं है। वे ईसाई समाज में जाते हैं तो ईसाई और सतनामी समाज में जाते हैं तो ईसाई बन जाते हैं।जबकि सच्चाई यह है कि सतनामी समाज की नजर में अजीत जोगी को बहुरूपिया समझा जाता है।
जोगी के कमजोर प्रत्याशियों के खिलाफ
लड़ाए जाएंगे निर्दलीय उम्मीदवार
राजमहंतों ने कांग्रेस टिकट वितरण के मामले ने अजीत जोगी को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि जोगी ने भाजपा नेताओं से सांठगांठ कर जानबूझ कर छत्तीसगढ़ में रिजर्व सीटों पर कांग्रेस के कमजोर प्रत्याशी खड़े करवाएं हैं। सतनामियों की बहुलता वाले विधान सभा क्षेत्रों में जोगी ने भाजपा को फायदा पहुँचाने की नीयत से कमजोर प्रत्याशी खड़े करवाए हैं। बिलासपुर जिले के मस्तूरी सीट से टिकट के लिए चार से ज्यादा काबिल दावेदार थे, लेकिन उनको अनदेखा कर वहां से नए और कमजोर दावेदार दिलीप लहरिया को टिकट दिलाया गया। इसी तरह अन्य जिलों में भी, जैसे मुंगेली सीट से चंद्रभान बारमते, जांजगीर चांपा जिले के पामगढ़ से शेषराज हरवंश, बेमेतरा जिले के नवागढ़ से अनिता पात्रे, राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ विधान सभा क्षेत्र से डा. थानेश्वर पाटिला को जोगी ने टिकट दिलाया है। ये सभी नए और कमजोर चहेरे हैं, इनका हारना तय है। इन सबके खिलाफ  सतनामी समाज अपने योग्य लोगों को निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में खड़ा करेगा। सबक सिखाने के उद्देश्य से बिलासपुर जिले के कोटा विधान सभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी और अजीत जोगी की पत्नी डा. रेणु जोगी के खिलाफ भी सतनामी समाज अपना उम्मीदवार उतारेगा। मरवाही से कांग्रेस प्रत्याशी और जोगी पुत्र अमित के विरूद्ध उम्मीदवार खड़ा इसलिए नहीं करेंगे क्योंकि वहां सतनामी ज्यादा नहीं हैं।  

-दिनेश ठक्कर "बापा"                                                                      

जोगी के खिलाफ राजमहंतों के आक्रोश पर दबंग दुनिया में छपी मेरी रपट



रविवार, 6 अक्तूबर 2013

टिकट मुद्दे पर जोगी की प्रतिष्ठा दांव पर, भाजपा में भी टांग खिंचाई


छत्तीसगढ़ विधान सभा चुनाव की तारीख के ऐलान के साथ आदर्श आचार संहिता लागू होते ही शुक्रवार की शाम से सियासी गतिविधियां तेज हो गई है। बिलासपुर जिले की विधानसभा सीटों में मतदान दूसरे चरण यानी19 नवम्बर को होगा।  इसके मद्देनजर भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी चयन की कवायद भी एकाएक तेज हो गई है। जिले में कांग्रेस की मानिंद इस बार भाजपा के टिकट दावेदारों का असंतोष भी पर्यवेक्षकों के समक्ष खुलकर मुखर हुआ है। दोनों दलों में दो तीन सीटों को छोड़ कर बाकी सीटों के लिए दावेदारों की कतार लग गई है। टिकट पाने की जुगत अब परस्पर टांग खिंचाई में तब्दील हो गई है।
बिलासपुर जिले में सात विधानसभा सीट आती है। इसमें पांच सामान्य सीट बिलासपुर, बेलतरा, बिल्हा, तखतपुर और कोटा है, जबकि दो सुरक्षित सीट मस्तूरी (अनुसूचित जाति) और मरवाही (अनुसूचित जनजाति) है। मुंगेली और लोरमी विधान सभा सीट अब नए बने जिले मुंगेली में चली गई है। हालांकि बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत यह दोनों सीट आती है, जबकि मरवाही विधानसभा क्षेत्र  कोरबा लोकसभा क्षेत्र में शामिल है। इस प्रकार बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र के तहत कुल आठ विधानसभा क्षेत्र शामिल है। इसलिए इन सबका सियासी जिला मुख्यालय बिलासपुर ही रहता है। टिकट दावेदारों की टोह लेने और उनकी मंशा जानने दोनों दलों के पर्यवेक्षक बिलासपुर में ही डेरा डालते हैं।
जहां तक कांग्रेस के टिकट के दावेदारों की होड़ का मसला है, तो विधायक अजीत जोगी की मरवाही सीट और उनकी विधायक पत्नी डा रेणु जोगी की कोटा सीट पर घमासान की स्थिति निर्मित नहीं हुई है। मरवाही से बूँदकुंवर और ओमवती पेन्द्रो और कोटा से नीरजा द्विवेदी की दावेदारी हाशिये पर है। महंत गुट के दबाव के कारण जोगी पुत्र अमित की बेलतरा सीट से टिकट की दावेदारी भी कमजोर पड़ गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चरण दास महंत के समर्थक बसंत शर्मा, भुवनेश्वर यादव और बैजनाथ चंद्राकर की दावेदारी अमित जोगी पर भारी पड़ रही है। बिलासपुर सीट से महापौर श्रीमती वाणी राव की दावेदारी सर्वाधिक मजबूत होने के कारण उनकी टिकट लगभग तय है। फिर भी अशोक अग्रवाल और महंत समर्थक अटल श्रीवास्तव टिकट के जुगाड़ में दिल्ली में डटे हुए हैं। बिल्हा सीट से पिछली बार हारे सियाराम कौशिक को अजीत जोगी इस बार फिर टिकट दिलाने अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगा दी है। तो वहीं चरण दास महंत अपने युवा सिपहसलार राजेन्द्र शुक्ला को टिकट दिलाने जुटे है। महंत तखतपुर सीट से अपने खासमखास चेले आशीष सिंह ठाकुर को भी खडा करने की जुगत में हैं। सतनामी वर्चस्व वाले मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र  से भी दावेदार दिलीप लहरिया, जयंत मनहर, राजेश्वर भार्गव आदि गुटीय प्रतिद्वंदिता में उलझे हुए हैं। यहाँ भी जोगी महंत गुट आमने सामने है। इस बार भी जिसकों टिकट नहीं मिलेगी वह अपने दल बल के साथ अधिकृत कांग्रेस प्रत्याशी को हराने उसके खिलाफ भितरघात करने- कराने से नहीं चुकेगा।           .
कांग्रेस जैसी गुटीय प्रतिस्पर्धा और टांग खिंचाई  इस बार भाजपा के टिकट दावेदारों में भी दिखाई दे रही है। अपवाद स्वरूप केवल बिलासपुर विधान सभा क्षेत्र में नगरीय प्रशासन मंत्री अमर अग्रवाल और बिल्हा विधान सभा क्षेत्र में स्पीकर धरम लाल कौशिक के सियासी वर्चस्व के चलते इन दोनों सीट से टिकट माँगने कोई भी भाजपाई हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। जबकि जिले की बाकी पाँचों सीट पर दावेदारों की असंतुष्ट फ़ौज खड़ी हो गई है। यहाँ भाजपा में टिकट को लेकर घमासान मचा हुआ है। इस बार बेलतरा, मस्तूरी और तखतपुर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायकों को टिकट कटने का खतरा नजर आ रहा है। इन तीनों सीट से टिकट माँगने वालों की संख्या सबसे ज्यादा है। बेलतरा से भाजपा के जिला अध्यक्ष राजा पाण्डेय समेत दस ब्राह्मण भाजपा नेताओं ने दावेदारी रखी है। कोटा सीट से नए चेहरे की तलाश भाजपा को है। बेलतरा और तखतपुर विधानसभा क्षेत्र में प्रत्याशी बदलने संगठन के दिग्गजों ने रणनीति बनाई है। इसकी भनक लगने के बावजूद भाजपा के बुजुर्ग विधायक बद्रीधर दीवान तथा अधेड़ विधायक राजू क्षत्री ने पर्यवेक्षकों और संगठन से फिर चुनाव लडऩे की मंशा जताई है और जीत का दावा भी किया है। श्री दीवान ने यहां तक कह दिया कि यदि उन्हे टिकट नहीं मिलती है तो उनके बेटे विजयधर दीवान को चुनाव लड़ाया जाए। वहीं राजू क्षत्री ने टिकट कटने की आशंका से अपनी पत्नी सुनिता क्षत्री का नाम आगे बढ़ाया है। वैसे तखतपुर से हर्षिता पाण्डेय और जगजीत मक्कड़ ने भी अपनी दावेदारी पेश की है।
इस बार भाजपा में टिकट वितरण को लेकर संगठन और दिग्गज नेता असमंजस की स्थिति में है। बेलतरा सीट से भाजपा की राष्ट्रीय नेता करूणा शुक्ला को टिकट दिलाने उनके समर्थक अड़े हुए हैं। वहीं आरएसएस की ओर से प्रफुल्ल शर्मा का नाम सामने आया है। तखतपुर से भाजपा के प्रदेश महामंत्री और धरम लाल कौशिक के साथी भूपेन्द्र सवन्नी को टिकट मिलने की संभावना प्रबल है लेकिन बाहरी होने का विरोध यहां हो सकता है। मस्तूरी से श्रीमती चांदनी भारद्वाज (जांजगीर की सांसद श्रीमती कमला पाटले की पुत्री) की दावेदारी भी प्रमुख रूप से मुखर हुई है।
कोटा विधानसभा क्षेत्र से इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष अंजना मुलकलवार ने दावेदारी पेश की है। पिछले चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी डा रेणु जोगी से हारे बिलासपुर निवासी मूलचंद खंडेलवाल का नाम इस दफे फिर उनके मित्र और मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने सुझाया है। पर्यवेक्षकों के सामने भाजपा के स्थानीय नेताओं ने भी यहां से टिकट की दावेदारी पेश की है। भाजपा ने अब तक मरवाही से प्रत्याशी को लेकर पत्ते नहीं खोले हैं। मरवाही से इस बार गंभीर सिंह भाजपा के प्रत्याशी हो सकते हैं।

-दिनेश ठक्कर "बापा"

दैनिक दबंग दुनिया में बिलासपुर से संबंधित प्रकाशित मेरी रपट


बुधवार, 2 अक्तूबर 2013

बिलासपुर की मेयर ने अफसरों के खिलाफ खोला मोर्चा

बिलासपुर नगर पालिक निगम की सामान्य सभा के विशेष सम्मलेन के बाद निगम की राजनीति में उबाल आ गया है। विधान सभा चुनाव के मद्देनजर महापौर और भाजपा पार्षदों की सियासी खींचतान बढ़ गई है। नगरीय प्रशासन मंत्री और स्थानीय भाजपा विधायक अमर अग्रवाल की शह पर भाजपा पार्षदों ने तीन अक्टूबर को होने वाली सामान्य सभा में महापौर को व्यापार विहार के विवादित भूखंड के मामले में घेरने रणनीति तैयार कर ली है। जबकि महापौर ने भी मंत्रालय और संभाग आयुक्त को विशेष सम्मेलन बाबत अपनी शिकायत भेजी है।
सोमवार को टाउन हाल में हुए नगर पालिक निगम की सामान्य सभा के विशेष सम्मेलन की वैधानिकता को लेकर नाराज महापौर श्रीमती वाणी राव ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने एकतरफा संपन्न हुए विशेष सम्मलेन को अवैध बताते हुए यह मामला मंत्रालय तक पहुंचा दिया है। उन्होंने मुख्य सचिव सुनील कुमार, नगरीय प्रशासन सचिव एमके राउत और बिलासपुर संभाग आयुक्त को शिकायती पत्र भेज कर पारित सभी प्रस्तावों को निरस्त किये जाने की मांग की है। उन्होंने अपने शिकायती पत्र में सवाल उठाया है कि संभाग आयुक्त से आदेश करा कर नगर निगम के अधिकारियों को विशेष सम्मेलन बुलाने की आवश्यकता क्यों पड़ गई। ऐसी कौन सी आपदा आ गई। महापौर ने निगम आयुक्त अवनीश शरण, निगम सचिव उमाशंकर शर्मा और सभापति अशोक विधानी पर निगम एक्ट के खिलाफ जाकर अवैध रूप से विशेष सम्मलेन कराने और नियम विरूद्ध प्रस्तावों को पारित कराने का आरोप लगाया है। महापौर के कथन के मुताबिक़ विशेष सम्मेलन में निर्धारित एजेंडे से बाहर अतिरिक्त प्रस्ताव पर चर्चा कराये जाने का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए सभी पारित प्रस्तावों को रद्द कर दिया जाना चाहिए।
इसके अलावा अपनी ही पार्टी के गुटीय पार्षदों के विरोध से जूझ रही महापौर ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चरणदास महंत से भी मिल कर विशेष सम्मलेन को अवैध करार देते हुए उन्हें राज्य और नगर पालिक निगम के अधिकारियों के कारनामों से अवगत कराया। नगर पालिक निगम  एक्ट के होने वाले उल्लंघन का ब्यौरा भी दिया। साथ ही महापौर ने गुट विशेष से जुड़े कांग्रेसी पार्षदों द्वारा वाक आउट में उनका साथ न दिए जाने पर भी रोष जताया और तीन अक्टूबर को आयोजित सामान्य सभा के लिए सभी कांग्रेसी पार्षदों को व्हीप जारी करने का अनुरोध किया।
सनद रहे कि सोमवार को महापौर और एमआईसी मेंबर के वाक आउट के बाद भी आधे घंटे तक उनके विरोधी छह कांग्रेसी पार्षद सदन में बैठे रहे। यह असहयोग महापौर को नागवार गुजरा है। महापौर के मुताबिक़ इससे कांग्रेस की एकजुटता खंडित और छवि धूमिल हुई है। महापौर ने अपने खिलाफ अगले कुछ दिनों में संभावित कानूनी कार्रवाई और राज्य सरकार द्वारा उन्हें  बर्खास्त किये जाने की रणनीति बनाए जाने के मद्देनजर कांग्रेस आलाकमान को भी इस पूरे मामले का ब्यौरा भेजा है। ताकि पार्टी स्तर पर उनका बचाव हो सके और विधान सभा चुनाव के लिए बिलासपुर से टिकट की दावेदारी भी प्रभावित न हो सके। .

-दिनेश ठक्कर "बापा"  .                    

सोमवार, 23 सितंबर 2013

जीतेंगे या हारेंगे यह राजनीति में पता नहीं रहता - चेतन भगत

जिन्दगी में झटके खाने की आदत डालनी होगी। जीवन में आत्मविश्वास, महत्वाकांक्षा रखने और लक्ष्य तय करने के  साथ साथ मेहनत भी करनी होगी, तभी सफलता हासिल होगी। इन्ही सब गुणों के कारण नरेन्द्र मोदी को उनकी पार्टी ने प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार बनाया हैं। यह बात प्रसिद्द लेखक और विचारक चेतन भगत ने रविवार की शाम को बिलासपुर के सीएमडी कालेज ग्राउंड में आयोजित एक शाम युवाओं के नाम कार्यक्रम के दौरान कही। छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग ने इसे आयोजित किया था।
बिलासपुर के बीजेपी विधायक और छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल के जन्म दिन की खुशी के बहाने आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता बतौर चेतन भगत ने आगे कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने कैरियर के शुरू में चाय बेचा करते थे। तमाम तकलीफों को झेलने के बावजूद उन्होंने झटके खाना नहीं छोड़ा। वे मेहनत करते रहे। अपने लक्ष्य को पाने में लगे रहे। गुजरात के मुख्यमंत्री बने और आज उन्हें उनकी पार्टी ने देश के प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार बनाया है। जीवन में सफलता पाने के लिए सिर्फ बुद्धिमता ही नहीं बल्कि लक्ष्य का निर्धारण करना भी जरूरी है। अन्यथा पराजय मिलती है।
उन्होंने जीवन में सफलता हासिल करने के मुख्य सूत्रों पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों और युवाओं से कहा कि जब जिन्दगी में कभी हार मिलती है तो उसका दुःख अवश्य होता है, लेकिन हार मिलने से उत्पन्न अवसाद के कारण अपने लक्ष्य और जारी कार्य को छोड़ना नहीं चाहिए। मैं खुद अपने लेखन के क्षेत्र में इसका अनुसरण करता हूँ। शुरू में मेरी कहानी को नब्बे फीसदी प्रकाशकों ने नकार दिया था। कई फिल्म निर्माताओं ने मेरी कहानी को ठुकरा दिया था लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। अपने लक्ष्य पर कायम रहा। जब मेरी लिखी किताब पर बनी फिल्म थ्री इडियट सफल हुई तब सब मेरी तारीफ करने लगे। मेरी लिखी कहानी पर जब फिल्म काई पोचे बनाना तय हुआ तब भी बहुत दिक्कत आई थी। इस फिल्म के लिए स्टार हीरो ने काम करने से इनकार कर दिया तब हमने टीवी सीरियल के नायक सुशांत सिंह को लेकर उसे इस फिल्म का नायक बनाया। आख़िरकार यह फिल्म भी सफल रही। अर्थात प्रसिद्धि पाने और स्थापित होने के बावजूद आगे भी मेहनत करना जरूरी होता है।
चेतन भगत ने देश के हालात पर कटाक्ष करते हुए कहा कि देश अभी बीमार है। पीएम खामोश रहते हैं। वे समझौतावादी हैं। वे गंभीर मामलों में भी टस से मस नहीं होते हैं। देश में अब सुधार की जरूरत है। लोगों को अपने वोट का मूल्य समझना होगा। सही व्यक्ति देखकर वोट देना होगा। चेतन भगत ने उपस्थित युवाओं से सफलता पाने से सम्बंधित सवाल भी पूछे और उनके विभिन्न रोचक सवालों के जवाब दिए।  
चेतन भगत से पहले स्वास्थ्य मंत्री ने अपने लम्बे उद्बोधन में राज्य सरकार की तारीफ में कसीदे गढ़े और केंद्र सरकार की खुलकर आलोचना की। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर उन्होंने युवा मतदाताओं को साधने का प्रयास किया। अमर अग्रवाल के लम्बे और उबाऊ भाषण के बाद जब चेतन भगत बोलने आये तब सबसे पहले उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि जब मैं पढ़ाई के दौरान हास्टल में रहता था, तब उन दिनों अगर किसी का बर्थ डे होता था तो हम लोग उसके मुंह में केक भर देते थे। ताकि वह कुछ बोल न सके। आज भी मेरा मन हो रहा था कि मंत्रीजी के मुंह में केक भर दूं। मीडिया वाले बैठे हैं, इसलिए यह छप जाएगा।  यह सुन कर अमर अग्रवाल झेंप गए। चेतन भगत ने फिर अमर अग्रवाल की तरफ देखते हुए यह भी कहा कि मेरे ख्याल से राजनीति से मुश्किल कोई दूसरा कार्य नहीं है। सारा दिन काम करते रहो फिर भी पता नहीं रहता कि जीतोगे या हारोगे। ऊपर से सबसे गालियाँ भी मिलती हैं। इतना सुनते ही अमर अग्रवाल का चहेरा उतर गया और वे बगले झाँकने लग गए। तत्पश्चात मामले को सम्हालते हुए चेतन भगत ने कहा कि बहुत कम लेखक होंगे जिन्हें ऐसे मौके पर बुलाया गया है। यहाँ आने से पहले मैं सोच रहा था कि अमर अग्रवाल कैसे नेता हैं, जिन्हें भीड़ नहीं चाहिए। ये अलग सोच के नेता हैं। वे चाहते तो ज्यादा भीड़ जुटाने के नाम पर कैटरीना कैफ, सलमान खान, दीपिका पादुकोण, या सोनम जैसे बालीवुड स्टार को बुला सकते थे। यह प्रशंसा सुनकर अमर अग्रवाल के चहेरे पर अंततः मुस्कराहट आ गई।    

-दिनेश ठक्कर "बापा"  

कांगेस की टिकट पाने दावेदारों में बढ़ी सियासी खींचतान

छत्तीसगढ़ में आसन्न विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बिलासपुर जिले में कांग्रेस की टिकट के लिए दावेदारों के मध्य होड़ और खींचतान बढ़ गई है। टिकट पाने की जुगत में दो बार दिल्ली जाकर अपने अपने आकाओं से मुलाक़ात करने के बाद दावेदार अगले कुछ दिनों में तीसरी दफे दिल्ली जाने वाले हैं। राहुल गांधी की टीम के सर्वेयर बिलासपुर जिले में भी जीतने योग्य दावेदार की टोह ले रहे हैं। खुफिया रिपोर्ट एवं पूर्व सर्वे के आधार पर टिकट के योग्य दावेदारों का फिर से ब्यौरा इकट्ठा किया जा रहा है। ब्लाक स्तर पर जिन नामों को प्रदेश कांग्रेस द्वारा दिल्ली भेजा गया है, उनकी संभावित जीत को टटोलने के लिए गोपनीय सर्वे भी जारी है। दावेदारों से चुनाव जीतने का रोडमैप बनाने को कहा गया है।
बिलासपुर, कोटा, तखतपुर, बिल्हा, मस्तूरी, बेलतरा तथा मरवाही विधानसभा क्षेत्र से टिकट पाने के लिए वरिष्ठ दावेदार नेताओं का सियासी गुणा भाग अभी तक जारी है। यद्दपि कोटा से वर्तमान विधायक डा रेणु जोगी तथा मरवाही से विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का ही नाम ब्लाक स्तर पर तय किया गया है। इसलिए इस दो सीट पर घमासान कम मचा हुआ है। लेकिन बिलासपुर, बेलतरा, बिल्हा, तखतपुर और मस्तूरी विधानसभा क्षेत्र से टिकट पाने के लिए दिग्गज दावेदारों द्वारा गुटीय प्रतिस्पर्धा के चलते एक दूसरे का कच्चा चट्ठा आलाकमान तक पहुंचाया जा रहा है। परस्पर मोर्चा खोल कर एक दूसरे की शिकायत करने का सिलसिला बदस्तूर जारी हैं। दावेदारों के खिलाफ पूर्व में छपी अखबारी ख़बरों की कतरनें, विरोधी बीजेपी नेताओं से मेलजोल की वीडियो सीडी आदि अपने केन्द्रीय आकाओं के जरिये हाई कमान तक भिजवाई गई है।
बिलासपुर विधानसभा क्षेत्र से स्थानीय बीजेपी विधायक और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल के खिलाफ फिलहाल महापौर श्रीमती वाणी राव को ही सक्षम और धनाड्य कांग्रेस प्रत्याशी माने जाने के कारण उनकी टिकट तय मानी जा रही है। लेकिन अंतिम क्षणों में उम्मीदवार का नाम बदले जाने की कांग्रेसी परम्परा को दृष्टिगत रखते हुए बाकी खांटी दावेदार अभी भी टिकट के प्रति आशान्वित हैं। बिलासपुर सीट से टिकट हासिल करने की कवायद में जुटे कांग्रेस नेता अशोक अग्रवाल, विजय पाण्डेय, अटल श्रीवास्तव, विवेक उर्फ़ चिका बाजपेयी तथा राजेश पाण्डेय ने अभी भी उम्मीद नहीं छोडी है। ये सभी दावेदार दिल्ली में मत्था टेक कर आ चुके हैं। इनका मानना है कि बी फ़ार्म आने तक टिकट का प्रयास करने में वे कोई कोताही नहीं बरतेंगे। दिल्ली में होने वाली स्क्रीनिंग कमेटी की हर बैठक पर ये सभी दावेदार नजर बनाए हुए हैं। वे अपने अपने सूत्रों से सूचनाएं ले रहे हैं। दिल्ली में 27 सितंबर को कांग्रेस की प्रदेश चुनाव समिति तथा स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक प्रस्तावित है जिसमें वर्तमान कांग्रेस विधायकों और कांग्रेस के शहीद नेताओं के परिवारों में से प्रत्याशी तय किए जाएंगे। अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में कांग्रेस के कुछ प्रमुख उम्मीदवारों के नाम की घोषणा होने की संभावना जताई जा रही है। पहली सूची में प्रमुख आसान सीटों पर प्रत्याशी तय होने की बात कही जा रही है।
वहीं दूसरी तरफ जिले में बूथ स्तर पर भी कार्यकर्ताओं को रिचार्ज करने ब्लॉक कांग्रेस कमेटी मशक्कत कर रही है। उन्हें संगठित होकर चुनाव में एकजुटता दिखाने का पाठ पढ़ाया जा रहा है। ताकि इस बार राज्य में कांग्रेस की सरकार बन सके।बिल्हा के बाद बेलतरा विधानसभा क्षेत्र की बैठक गत दिनों मोपका में ब्लाक कांग्रेस के नेतृत्व में हुई। राहुल गांधी के निर्देश पर प्रदेश प्रभारी बीके हरिप्रसाद द्वारा बेलतरा सीट के लिए नियुक्त समन्वयक रविन्द्र दलवी ने बैठक लेते हुए कांग्रेस जनों से कहा कि वे चुनाव की तैयारी में पूरी तरह जुट जाए और पार्टी की रीति- नीति को जन-जन तक पहुंचाएं। उन्होने कहा कि बेतलरा क्षेत्र के 201 मतदान केन्द्रों में पार्टी को बढ़त दिलाने हम सबको बूथ स्तर पर युवाओं की टीम खड़ी करना है। दलितों, आदिवासियों तथा पिछड़ा वर्गो को इसमें विशेष तौर पर जोडऩा है और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करनी है। दलवी ने यह भी कहा कि वे चुनाव होते तक क्षेत्र में रहकर बूथ स्तर तक दौरा करेंगे।
इस अवसर पर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अरूण तिवारी ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि कांग्रेस प्रत्याशी की जीत के लिए सबको अभी से एकजुट होकर कार्य करना है। दिल्ली से आए समन्वयक दलवी का परिचय कराते हुए ब्लाक अध्यक्ष साखन दर्वे ने कहा कि बेलतरा क्षेत्र को 11 सेक्टर में बांट कर इन पर पदाधिकारियों की नियुक्ति की गई है जो क्षेत्र में कांग्रेस उम्मीदवार को प्रचंड मतों से जिताएंगे। बहरहाल, इन तमाम सियासी कवायद के बावजूद स्थानीय कांग्रेस नेताओं में आपसी गुटबाजी कम होती नहीं दिख रही है। अगले कुछ दिनों में दलगत उठापटक अपेक्षाकृत ज्यादा बढ़ने के आसार साफ नजर आ रहे हैं।    

-दिनेश ठक्कर "बापा"


रविवार, 22 सितंबर 2013



जनता की पसंद पर पीएम के लिए मोदी के नाम का एलान- शाहनवाज

"भारतीय जनता पार्टी ने जनता की आवाज सुन कर प्रधानमंत्री पद के लिए गुजरात के लोकप्रिय मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम का एलान किया है। जनता पहले से ही कह रही थी कि नरेन्द्र मोदी को ही प्रधानमंत्री बनना चाहिए। हम जनता की पसंद को ही तरजीह देते हैं।" यह बात भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सांसद शाहनवाज हुसैन ने शुक्रवार, 20 सितम्बर की शाम को पत्रकारों से कही। वे बिलासपुर में मुस्लिम समाज के पांच विभिन्न भवनों का लोकार्पण करने आए थे।
पत्र-वार्ता में शाहनवाज हुसैन ने आगे कहा कि  बीजेपी के पूरे लोग इकट्ठे  होकर नरेन्द्र मोदी के साथ खड़े हैं। नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री बतौर प्रोजेक्ट किए जाने पर कोई भी वरिष्ठ नेता नाराज नहीं है। नरेन्द्र मोदी को प्रोजेक्ट किए जाने से पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में सकारात्मक असर पड़ेगा। उनकी छवि का फायदा पार्टी को मिलेगा। मोदी की छवि के अलावा  मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में विकास के मुद्दे पर हम चुनाव जरूर जीतेंगे और राजस्थान व दिल्ली कांग्रेस से छीनेंगे। जहाँ तक मीडिया में लालकृष्ण आडवाणी की इस सम्बन्ध में नाराजगी की चर्चा का सवाल है ,वह सही नहीं है। स्वयं आडवाणी जी ने नरेन्द्र मोदी को उन्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद मिठाई खिलाई है, उन्हें आशीर्वाद दिया है। बिलासपुर, कोरबा में उन्होंने उनकी तारीफ भी की है जिसके आप लोग साक्षी हैं। रूठे लालकृष्ण आडवाणी द्वारा नरेन्द्र मोदी की तारीफ करना क्या दलगत और सियासी मजबूरी है? इस सवाल के जवाब में शाहनवाज हुसैन ने स्पष्ट तौर पर कहा कि  यह उनकी कोई भी मजबूरी नहीं है। आडवाणी जी हमेशा सच्ची बात कहते रहे हैं। जिसने भी अपने राज्य में विकास किया है वे सब आडवाणी जी के सिपहसलार हैं।
आरएसएस के दबाव पर प्रधानमंत्री के पद के लिए नरेन्द्र मोदी के नाम का एलान किए जाने के सवाल के जवाब पर श्री हुसैन ने सफाई दी कि कौन पीएम, एमपी और एमएलए का उम्मीदवार होगा, यह सुझाव आरएसएस नहीं देता है। आरएसएस केवल सांस्कृतिक संगठन है। वह बीजेपी के राजनैतिक विचार को दिशा देता है। पीएम की उम्मीदवारी को लेकर जो निर्णय हुआ है वह बीजेपी का अपना निर्णय है।
हिन्दू-मुस्लिम धर्म की राजनीति करने वालों पर उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि मुसलमानों की टोपी जो पहन ले इसका मतलब यह नहीं हुआ कि वह उनका हमदर्द है।टोपी इबादत के लिए होती है,सियासत के लिए नहीं। जिस नेता को टोपी पहनना है, पहन ले, जिसको तिलक लगाना है, लगा ले लेकिन दोनों को एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए।
गुजरात के दंगे में नरेन्द्र मोदी की भूमिका के प्रश्न पर उन्होंने साफ किया कि अदालत ने अभी तक गुजरात के मुख्यमंत्री पर अंगुली नहीं उठाई है। बारह साल से वहां कोई दंगा नहीं हुआ है। नरेन्द्र मोदी का नाम दंगों में घसीटना कांग्रेसियों की पुरानी  आदत है। जबकि हमने कभी नेहरू, इंदिरा और राजीव गाँधी का नाम विभिन्न बड़े दंगों के सिलसिले में नहीं लिया और न ही उन्हें जिम्मेदार ठहराया। उत्तरप्रदेश के मुजफ्फरनगर के दंगे पर उनका कहना था कि वहां दंगे रोकने में अखिलेश यादव की सरकार नाकाम रही है। मीडिया ने अपने स्टिंग आपरेशन में दंगे का सच जाहिर कर दिया है। यूपी के दंगे समाजवादी पार्टी के शोकाल्ड दंगे है। वोट के लालच में वहां सांप्रदायिक भाईचारा तोड़ने का काम किया गया है। इसमें समाजवादी पार्टी की राज्य सरकार के साथ साथ केंद्र सरकार की भी भागीदारी है। जबकि बीजेपी हमेशा सांप्रदायिक एकता का प्रयास करती रही है।
कांग्रेस की आलोचना करते हुए उन्होंने चुटकी ली कि कांग्रेस एक मुंह से नहीं बल्कि दस मुंह से बोलने वाली पार्टी हो गई है। जब हम उनके बयान को पकड़ लेते है तो वे हायतौबा मचाते हैं। मनमोहन सिंह की सरकार देश में हर मोर्चे पर विफल रही है। मनमोहन सिंह को पहले बहुत बड़ा अर्थशास्त्री  माना जाता था पर उनका अर्थशास्त्र किसी काम का नहीं निकला। देश में बेरोजगारी,महंगाई ,भ्रष्टाचार और घोटाले बढ़े  है। लोग उनकी सरकार से उब गए हैं।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा सीपत में एनटीपीसी के सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन राजीव गाँधी के नाम पर किए जाने पर उन्होंने व्यंग्य कसा कि कांग्रेसियों का यदि बस चले तो वे हर पत्ते और दरख़्त का नाम गाँधी परिवार के नाम पर कर दे।
बिलासपुर के विधायक और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल की तारीफ में कसीदे गढ़ते हुए उन्होंने कहा कि वे इस क्षेत्र के मुसलमानों के बड़े नेता है क्योंकि यहाँ सांप्रदायिक सद्भाव दिखता है।
पत्रकारों को सवाल पूछने दीजिये
शाहनवाज हुसैन पर जब सवालों की लगातार बौछार हो रही थी तब स्वास्थ्य मंत्री अमर अग्रवाल को यह नागवार गुजरा और उन्होंने इशारा कर बीजेपी के एक स्थानीय नेता बेनी गुप्ता को पत्रकार वार्ता समाप्त करने की घोषणा करानी चाही। बेनी गुप्ता ने चलती पत्रकार वार्ता के दौरान ही बीच में जब दूसरी बार माइक लेकर पत्रकारों से कहा कि वे अब सवाल पूछना बंद करें। तब शाहनवाज हुसैन को उनका यह रवैया पसंद नहीं आया और उन्होंने बड़े सलीके से कहा कि आप इन्हें क्यों रोक रहे हैं। पत्रकारों को सवाल पूछने दीजिए। हमको भी मजा आ रहा है।

- दिनेश ठक्कर "बापा"

बीजेपी प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन की पत्र वार्ता दबंग दुनिया में


प्रधानमंत्री के सीपत प्रवास पर दबंग दुनिया में छपी मेरी रपट


प्रधानमंत्री के छत्तीसगढ़ प्रवास से चौड़ी हुई सियासी खाई



प्रधानमंत्री डॉ  मनमोहन सिंह के सीपत (जिला बिलासपुर, छत्तीसगढ़) प्रवास के दौरान एक बार फिर से केंद्र सरकार और राज्य की भाजपा सरकार के बीच बनी खाई और चौड़ी हो गई। यही नहीं बल्कि पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के कोरबा और बिलासपुर जिले के प्रवास के दौरान उनके उद्बोधन से उपजे सियासी समीकरण पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपनी सरकार को अव्वल दर्जे की बताते हुए छत्तीसगढ़ को पोसने का श्रेय लेने से नहीं चूके। केंद्र सरकार की धनराशि  से छत्तीसगढ़ को बिजली के क्षेत्र में आगे ले जाने की बात कहकर मनमोहन सिंह ने रमन  सिंह को यह जता  दिया कि उनके सहयोग के बगैर छत्तीसगढ़ राज्य को पॉवर हब नहीं बना सकते। एनटीपीसी का सीपत सुपर थर्मल पावर स्टेशन राजीव गांधी के नाम कर मनमोहन सिंह ने गांघी परिवार के प्रति अपनी वफादारी भी दिखाई।.        
गुरूवार,19 सितम्बर को आयोजित सीपत एनटीपीसी के लोकार्पण समारोह में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बिजली संबंधी मंतव्य को केन्द्रीय उर्जा राज्य मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी अपने भाषण में दोहरा कर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह को केंद्र पर आश्रित रहने का अहसास दिलाया। हर घर में बिजली पहुँचाने का भरोसा दिला कर उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी को भी लपेटे में लिया। गौरतलब है कि  आडवाणी ने पिछले दिनों कोरबा और बिलासपुर जिले में अपने भाषण में विद्युत् विकास के मामले में गुजरात को नंबर एक राज्य करार दिया था। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी सीपत में अपने भाषण में विद्युत् उत्पादन के सन्दर्भ में केंद्र की महत्ता प्रतिपादित की। जाहिर है, पॉवर हब के मुद्दे पर चल रहे सियासी दांवपेंच का सिलसिला आसन्न विधानसभा और लोकसभा चुनाव तक यूँ ही चलता रहेगा।
सीपत में अपने संबोधन के दौरान छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह की पीड़ा भी उजागर हुई। उनका यह कहना कि बिजली की आवश्यकता के अनुरूप उसका उत्पादन संभव नहीं हो पा रहा है , समय रहते कोयले की आपूर्ति की समस्या का निराकरण यदि नहीं होगा तो प्रधानमंत्री की कार्ययोजना कैसे सफल होगी। केंद्र और भाजपा की राज्य सरकार के टकराव के चलते सरगुजा में 4000 मेगावाट वाला अल्ट्रा मेगा पॉवर प्रोजेक्ट प्रभावित हुआ है। नो गो एरिया में इस प्रोजेक्ट के आने के कारण केंद्र के मंत्रिमंडलीय समूह द्वारा इसे रद्द कर दिए जाने पर रमन सिंह ने अफ़सोस जाहिर कर ही दिया। कोल ब्लॉक कंट्रोवर्सी के चलते इस प्रोजेक्ट को भी कोल ब्लॉक मुहैय्या नहीं कराया जा रहा है। मौका पाकर गुरूवार  को रमन सिंह ने आखिरकार अपने भाषण में इसकी मांग प्रधानमंत्री से कर ही डाली।
वहीँ दूसरी ओर मनमोहन सिंह के इस प्रवास के दौरान कांग्रेस की दलगत राजनीति में भी समीकरण बनते-बिगड़ते दिखे। एसपीजी की सुरक्षा नीति के बहाने प्रधानमंत्री के सभा मंच पर पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को स्थान न देकर उन्हें सामने बने वीआईपी खंड में बैठाना चर्चा का विषय बना रहा। जोगी ने भी इस मुद्दे पर स्पष्ट किया कि उन्हें पहले से ही ज्ञात था कि सुरक्षा कारणों से उन्हें मंच पर बैठने नहीं दिया जाएगा। हालांकि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ही उन्हें इस समारोह में आने का न्यौता दिया था। सनद रहे कि सीपत प्लांट की बुनियाद अजीत जोगी के शासनकाल के दौरान ही रखी गई थी। 28 जनवरी 2002 को तात्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इस पावर प्लांट का भूमिपूजन और शिलान्यास किया था। बहरहाल, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा अपने भाषण के दौरान इस प्लांट की नींव के सन्दर्भ में जोगी का जिक्र तक न किया जाना उनके सियासी कद को कम करने जैसा ही था। ऐसा पहली दफे हुआ है जब अजीत जोगी को किसी सार्वजनिक समारोह में मंच से दूर रखा गया हो और उनका नाम लेना जरूरी नहीं समझा गया। हेलीपैड में भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से उन्हें मिलने का मौक़ा नहीं दिया गया। यद्यपि उनकी पत्नी रेणु जोगी के अलावा बिलासपुर की महापौर वाणी राव सहित कुछ प्रदेश कांग्रेस नेताओं को स्वागत करने का अवसर दिया गया, क्योंकि इनके नाम पहले से तय कर लिए गए थे। रेणु जोगी को छोड़कर बाकी कांग्रेस नेताओं ने ज्योतिरादित्य सिंधिया से कुछ क्षण गुफ्तगू अवश्य की। उधर, जोगी के धुरविरोधी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और केन्द्रीय कृषि राज्य मंत्री डॉ चरणदास महंत मंच पर आसीन थे। हालाँकि उन्हें भी बोलने का मौका नहीं दिया गया। वे कठपुतली की तरह मंच पर बैठे रहे।.समारोह के दौरान पंडाल में महंत और जोगी गुट के समर्थकों की आपसी दूरी भी साफ़ झलक रही थी।

- दिनेश ठक्कर "बापा"
  (चित्र : साभार जन सम्पर्क विभाग)   

शुक्रवार, 20 सितंबर 2013

दैनिक दबंग दुनिया में जोगी पर प्रकाशित मेरी रपट

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में बुधवार को अजीत जोगी की जाति के मामले में याचिका के निराकृत होने और उसके सियासी असर पर दैनिक दबंग दुनिया में गुरूवार को प्रकाशित मेरी रपट।

अब नई ऊर्जा के साथ चल सकती है जोगी एक्सप्रेस


छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की जाति के मामले में हाई कोर्ट से बुधवार को उनकी याचिका निराकृत होने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। सियासी गलियारों में जोगी के आदिवासी मुद्दे पर नए समीकरण बनने शुरू हो गए हैं। जोगी  की परंपरागत और घरेलू आदिवासी सीट मरवाही से पुनः उनके चुनाव लड़ने का रास्ता साफ़ हो गया है। इनके साथ ही उनके पुत्र अमित के लिए भी आदिवासी सीट का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद पहले कांग्रेसी मुख्यमंत्री होने का श्रेय पाने वाले अजीत जोगी  मरवाही सीट से उपचुनाव जीते थे। हालाँकि इसके पहले रायगढ़ लोकसभा सीट से वे जब पहली बार सांसद निर्वाचित हुए थे तब से उनकी कंवर जाति  को लेकर विवाद खड़ा होता रहा है। राज्य बनने के बाद से ही जोगी को, जाति को लेकर राजनैतिक दांव पेंच में ज्यादा उलझा दिया गया था। सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा नेताओं ने जोगी को न्यायालयीन मामले से घेर कर उन्हें कमजोर करने की कवायद जारी रखी थी। आदिवासी भाजपा नेता नन्दकुमार साय , संत राम  नेताम और कोरबा क्षेत्र के बनवारीलाल अग्रवाल ने अपनी ओर से कोई कसर बाकी नहीं रखी थी । पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष बनवारीलाल अग्रवाल ने वर्ष 2002 में तात्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के जाति प्रमाण पत्र की सीबीआई जांच कराए जाने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट में वर्ष 1967 से अब तक जारी जोगी के सभी जाति प्रमाण पत्रों की प्रतियां और इस मामले में अब तक सुप्रीम कोर्ट सहित विभिन्न न्यायालयों के फैसले की प्रतियाँ पेश की गई थी। हाई कोर्ट ने 6 मई 2013 को बनवारीलाल अग्रवाल की याचिका ख़ारिज कर दी थी।
वहीँ दूसरी ओर वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अजीत जोगी के जाति के मामले में उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति से जांच होनी चाहिए। लेकिन चौकाने वाली बात यह है कि  इस समिति ने दो साल तक चुप्पी साधे  रखी। जब प्रदेश में विधानसभा के चुनाव निकट आए तब इसे दृष्टिगत रखते हुए यह समिति एकाएक सक्रिय हो गई। उसने विजिलेंस सेल को ताबड़तोड़ जांच करने का जिम्मा सौप दिया। फिर विजिलेंस सेल ने एकतरफा दो जांच रिपोर्ट तैयार कर उच्च स्तरीय जाति  छानबीन समिति के सुपुर्द कर दी। अजीत जोगी ने किसी तरह इसकी प्रतियाँ हासिल कर अपने अधिवक्ता के जरिए हाई कोर्ट में जांच रिपोर्ट को निरस्त करने की मांग को लेकर याचिका दायर कर दी। आखिरकार जोगी के अधिवक्ता के तर्क उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति और राज्य शासन पर भारी पड़े और दोनों ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए दोनों जांच रिपोर्ट वापस ले ली। जिसके कारण हाई कोर्ट ने अजीत जोगी की याचिका निराकृत कर दी।
बुधवार को ही अजीत जोगी की पत्नी डॉ रेणु  जोगी सुबह से ही बिलासपुर के सर्किट हॉउस में डेरा डाल कर फैसले का इन्तजार कर रही थी। याचिका निराकृत होने  के बाद जोगी के वकील राहुल त्यागी ने मीडिया से बातचीत कर पूरा ब्यौरा बताया फिर डॉ  रेणु जोगी ने भी ख़ुशी का इजहार करते हुए मीडिया से कहा कि हाई कोर्ट का यह निर्णय मेरे और मेरे परिवार के लिए अच्छा निर्णय है। इससे हमें राहत मिली है। चुनाव नजदीक होने से यह हमारे लिए चिंता का सबब बना हुआ था। आखिकार सच की जीत हुई। स्वयं अजीत जोगी भी इस निर्णय से बेहद खुश हैं।
हालांकि गुरुवार को समीकरण कुछ बदले नजर आये जब वे सीपत में एनटीपीसी के सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन  के लोकार्पण समारोह में गए थे। वहां वे प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह से मुखातिब नहीं हो सके। राजनैतिक खींचतान के चलते उन्हें मनमोहन सिंह से दूर रखा गया। उन्हें मंच के बजाय सामने बने वीआईपी दर्शक खंड में बैठाया गया। हेलीपेड में भी उन्हें मनमोहन सिंह से मिलाना मुनासिब नहीं समझा गया। खुद मनमोहन सिंह ने अपने भाषण में अजीत जोगी का जिक्र तक नहीं किया। जबकि 28 जनवरी 2002 में जब तात्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा सीपत प्लांट का भूमिपूजन और शिलान्यास किया गया था, तब जोगी छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार में मुख्यमंत्री थे। प्रधानमंत्री द्वारा उपेक्षित किये जाने के बाद भी जोगी अपने इरादे पर अटल हैं। अगले कुछ दिनों में अब वे एक नई उर्जा और रणनीति के साथ जोगी एक्सप्रेस चलाने की मुहिम में जुट सकते हैं। अपने दलगत विरोधियों पर भी वे अब भारी पड़ेंगे।

- दिनेश ठक्कर "बापा"

मंगलवार, 17 सितंबर 2013

कोप भवन से निकल कर आडवाणी ने किया नमो जाप

 भारतीय जनता पार्टी  के शीर्ष नेतृत्व द्वारा प्रधानमंत्री पद के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम का एलान करते ही रूठ कर कोप भवन में जाने वाले लालकृष्ण आडवाणी को आखिरकार नमो जाप करना ही पड़ा। सोमवार को छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान कोरबा में हसदेव थर्मल पॉवर प्लांट की सबसे बड़ी ५०० मेगावाट की यूनिट के उद्घाटन समारोह और बिलासपुर जिले के अरपा भैसाझार बैराज परियोजना के भूमिपूजन और शिलान्यास  के बाद जन सभा में भाजपा के वरिष्ट नेता और प्रधानमंत्री पद के आकांक्षी रहे लालकृष्ण आडवाणी  ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की तारीफ में जिस अंदाज में कसीदे गढ़े उससे भाजपा और आरएसएस के नेताओं ने राहत की सांस ली है।  श्री आडवाणी ने संघम शरणम गच्छामि की तर्ज पर नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा कर सियासी गलियारों में चल रहे कयासों पर फिलहाल अल्पविराम लगा दिया है।
श्री आडवाणी  ने कोरबा में अपने भाषण की शुरुआत बिजली की समस्याओं पर केन्द्रित की। छत्तीसगढ़ में बिजली के क्षेत्र में होने वाली तरक्की पर राज्य के मुख्यमंत्री डॉ  रमन  सिंह की पीठ भी थपथपाई। उन्होंने विषयांतर होते हुए नरेन्द्र मोदी के सन्दर्भ में कहा कि  मेरे साथी नरेन्द्र मोदी को पार्टी ने प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया है। गुजरात ने मोदी के नेतृत्व  में तेजी से विकास किया है। वहां बिजली की किल्लत नहीं है। गुजरात सहित भाजपा शासित राज्यों में सुशासन है। नरेन्द्र मोदी के पक्ष में इस अप्रत्याशित तारीफ को सुनकर मंच पर उपस्थित नेतागण और सामने बैठे कार्यकर्ताओं सहित प्रबुद्ध श्रोतागण चौक उठे। इसी तरह जब कोरबा में  मंच से उतरते समय आडवाणी  को मीडिया  ने ज्वलंत सियासी सवालों से घेरना चाहा तो वे तत्काल मीडिया की मंशा को भांप गए। उन्होंने नरेन्द्र मोदी से जुड़े एक ही सवाल का जवाब देकर किनारा कर लिया। उन्होंने जवाब में अपने भाषण में दिए गए भाव को ही उद्धृत किया।
श्री आडवाणी  बिलासपुर जिले में अरपा भैसाझार  बैराज परियोजना के भूमिपूजन और शिलान्यास के बाद हुई जन सभा में भी नमो जाप करने से नहीं चूकें। यहाँ उन्होंने कहा कि  नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद गुजरात राज्य की तरह देश भर में अच्छा काम होगा। यहाँ भी श्री आडवाणी अपने भाषण के दौरान बार बार विषयांतर हो रहे थे। सबसे पहले वे  छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण में अपनी स्वयं की भूमिका का उल्लेख करते हुए अपने मुंह मियां मिट्ठू बने और फिर एकाएक अंग्रेज शासनकाल के दौरान तात्कालीन सेन्ट्रल रेलवे की कार्यप्रणाली की आलोचना शुरू कर बैठे। उसके बाद उन्होंने आजादी के बाद भाषा के आधार पर बनाए  जाने वाले प्रान्तों को लेकर कांग्रेस सरकार की भी खिंचाई की। जब आडवाणी नरेन्द्र मोदी के पक्ष में बोल रहे थे तो छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह उन्हें टकटकी लगाकर देख रहे थे। मंच में किनारे बैठी क्षेत्रीय कांग्रेस विधायक डॉ  रेणु  जोगी भी मुस्कुरा उठी। मीडिया और उपस्थित जनसमूह में भी श्री आडवाणी  के अप्रत्याशित नमो जाप को लेकर जमकर चर्चा रही। रविवार की शाम तक मीडिया और सियासी गलियारों में यह कयास भी लगाया जा रहा था कि  श्री आडवाणी  का छत्तीसगढ़ प्रवास उनकी नाराजगी के चलते रद्द हो सकता है। श्री आडवाणी  ने छत्तीसगढ़ में आकर जिस अंदाज में अपने भाषण में नमो जाप किया उससे अब यह संकेत मिल गया है कि  वे संघ की लक्ष्मण रेखा को फिलहाल बलात पार करने के मूड में कतई नहीं हैं। भाजपा के वरिष्ट नेता होने के नाते उनकी यह मजबूरी भी साबित हुई है हालांकि बिलासपुर जिले के कार्यक्रम के बाद जिस अंदाज में उन्होंने मीडिया  से कन्नी काटी उससे यह भी सिद्ध हुआ कि वे सीधे तौर पर नरेन्द्र मोदी के खिलाफ में कोई भी बाईट देने का जोखिम उठाना नहीं चाहते हैं।
गौरतलब है कि  श्री आडवाणी  अपने भाषण के दौरान जब जब नरेन्द्र मोदी का जिक्र करते थे तब तब वे उन्हीं के समानान्तर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन  सिंह , मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का भी गुणगान करने से नहीं चूके। यह उनकी कूटनीतिक  चाल थी अथवा कुछ और सियासी दांव। अब देखना यह है कि  आगे चलकर ऊंट किस करवट बैठेगा। उन्होंने बिलासपुर जिले के कार्यक्रम में कुदाली चला कर जो गड्ढा खोदा है, वह किसके लिए इस्तेमाल होगा, यह तो वक्त ही बताएगा।

- दिनेश ठक्कर "बापा"

गुरुवार, 15 अगस्त 2013

आज का मणि भवन : अनूठा गांधी संग्रहालय




 मुंबई के लेबरनम रोड, गांवदेवी पर स्थित दो मंजिला मणि भवन आज भी गांधी जी के सत्रह बरसों (वर्ष 1917 से 1934)  के निवास की स्वर्णिम स्मृति संजोए हुए है। गांधी जी के सिद्धांतों, आदर्शों और गतिविधियों को सुरक्षित रखने गांधी स्मारक निधि ने 1955 में इस भवन को खरीद लिया था।
मणि भवन का हर हिस्सा मायने रखता है। दूसरी मंजिल पर जिस कमरे में गांधी जी का निवास था, जहां वे कार्य किया करते थे, उसे जस का तस रखने का पूरा प्रयास किया गया है। गांधी जी के कमरे के पास गुडिय़ों की प्रदर्शनी है। इसके जरिए उनके जीवन के महत्वपूर्ण 28 दृश्य पेश किए गए हैं। इसे सुशीला गोखले-पटेल ने निर्मित किया है।
अन्य एक कमरे में चित्रावली है, जिसमें खास प्रसंगों की झांकियां बनाई गई है। तस्वीरें, पत्रों की नकलें, गांधी जी के और उन पर लिखे लेख भी रखे हुए हैं। गांधी जी की वस्तुओं, पोरबंदर के जन्म स्थल, साबरमती और सेवाग्राम कुटीर की प्रतिकृतियां भी रखी गई हैं। मणि भवन में गांधी जी पर बने दस्तावेजी चलचित्र भी दिखाए जाते हैं। उनके भाषणों के ग्रामोफोन रिकार्ड सुनाने की भी व्यवस्था है।
मणि भवन के प्रवेश द्वार के पास बिक्री केंद्र है। यहां गांधी जी की तस्वीरें, डाक टिकट, चंद्रक और मूर्तियों का विक्रय किया जाता है। हाल के मध्य में गांधी जी की एक कांसे की तख्ती है। इसके नीचे चार शिल्प कृतियां हैं। इसमें वे रचनात्मक प्रवृत्तियां उकेरी गई हैं, जिनसे गांधी जी को लगाव था। पुस्तकालय भी समृद्ध है। एक प्रभाग संदर्भ ग्रंथों का है और दूसरा घर ले जाने वाली किताबों का। इसमें गांधी जी से संबंधित किताबें शामिल हैं। पहली मंजिल पर पुस्तकालय का कुछ हिस्सा और सभागृह है। यहां गांधी जी पर अभ्यास- वर्तुलकी बैठकें, सभाएं, परिसंवाद आदि कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं। मणि भवन की छत भी ऐतिहासिक मायने रखती है। 4 जनवरी 1932 को गांधी जी जिस तंबू (शयन स्थल) से गिरफ्तार किए गए थे, वहां अभी उनकी कांसे की तस्वीर रखी गई है। ये सभी धरोहर प्रेरणा स्त्रोत हैं।
- दिनेश ठक्कर
(10 अगस्त 1997 को जनसत्ता, मुंबई की रविवारीय पत्रिका "सबरंग" में प्रकाशित)

मुंबई, मणि भवन और गांधी जी

 वर्ष 1917, गांधी जी मुंबई आए। गांधी-भक्त रेवाशंकर बहुत खुश थे। उनका घर मणि भवन अब गांधी जी का निवास हो गया। गांधी जी के कदम पड़ते ही मणि भवन की चमक बढ़ गई। यह विशिष्ट स्थान हो गया। अंग्रेजी हुकूमत चौकन्नी हो गई। मुंबईवासी चहक गए। देश-भक्ति का अलख जग रहा था।
"धुनाई करा लो, धुनाई करा लो",  यह आग्रहमयी पुकार रोज गांधी जी सुनते थे। पिंजारा लेकर एक धुनिया प्रतिदिन मणि भवन के समीप से गुजरता था। पिछले नौ बरस में गांधी जी बुनाई के मायने जान गए थे। निर्धनता दूर करने में बुनाई उपयोगी थी। सो एक रोज गांधी जी ने उस बुनिए को बुलवाया। मणि भवन में बुनाई का काम शुरू करवाया। खुद गांधी जी इस काम में आगे रहते। बिस्तर पर रहते तो भी चरखा चलता था। वे सबको बताते- "मेरे कमरे में चरखा आनंद से गुनगुनाता है। मेरी तबियत ठीक रखता है।"
वे सबको स्वदेशी का पाठ पढ़ा रहे थे। अपनी भाषा, वेशभूषा और विचारों पर खूब लिखते और बोलते। वे हमेशा कहा करते- "समान बौद्धिक सामर्थ्य के साथ महिलाएं पुरुष की सहचारी हैं।" वे इस बात पर जोर देते- "सामाजिक सुधार होगा तो सबका सुधार होगा।"
वर्ष 1918, गांधी जी पेचिश की चपेट में आ गए। इलाज न करवाने से तबियत और बिगड़ गई थी। 13 दिसंबर को जब वे माथेरान से मणि भवन आए, तब वे काफी कमजोर दिख रहे थे। दूध नहीं पीने के कारण तबियत बिगड़ते ही जा रही थी। फूंकन पद्धति पर वे विरोध जता रहे थे। थन से दूध की आखरी बूंद निकालना उन्हें गंवारा नहीं था। घृणा हो गई थी। सो, दूध नहीं पीने की कसम खा ली। कस्तूरबा से रहा नहीं गया और कहा- "बकरी का दूध पीना ही पड़ेगा।" गांधी जी विवश हो गए। सत्याग्रह आंदोलन में शामिल होने का उनका जी मचल रहा था।
वर्ष 1919, जनवरी के पहले हफ्ते गांधी जी ने बकरी का दूध पीना शुरू कर दिया। तबियत कुछ सम्हली। 21 जनवरी को आपरेशन कामयाब रहा। वे फिर तंदुरूस्त हो गए। लेकिन ब्रिटिश सरकार बीमार सी हो गई। रौलट एक्ट पारित हो गया। इसे काला कानून कहा गया। रौलट समिति के प्रस्ताव अप्रत्याशित थे। गांधी जी चौंक गए। गुस्से की अग्नि भड़क गई। "मेरे विचार से यह विधेयक हमारे लिए खुली चुनौती है। हमारे खुश रहने का अर्थ होगा कि हमने इसे मंजूर कर लिया है।" गांधी जी के इस आह्वान से समूचा देश जागृत हो गया। जन-आंदोलन का यह पहला पड़ाव था। 24 फरवरी को गांधी जी ने तार में लिखा- "रौलट विधेयक के प्रकाशन के पश्चात् इसके बारे में अपनी स्थिति पर विचार कर रहा हूं। विधेयक में शासक वर्ग की आंतरिक बीमारी के स्पष्ट लक्षण हैं।"
गांधी जी से लोग मिले । विचार विमर्श का दौर चला। विरोध के लिए सत्याग्रह करना तय हुआ। मुंबई में ही सत्याग्रह सभा स्थापित हुई। गांधी जी को अध्यक्ष बनाया गया। मार्च में रौलट विधेयक के खिलाफ पहली सभा हुई। गांधी जी का गुजराती में लिखित भाषण पढ़ा गया- "सत्याग्रह डर नहीं, बल्कि सच्चाई है। यदि हम अपने इरादे पर अडिग रहे तो साम्राज्यवादी ताकतवर सरकार को भी हमारे आगे झुकना पड़ेगा। बुराई का जवाब अच्छाई से देने के लिए प्रयत्न करना हैं।" 'फिर सत्याग्रह की शुरुआत प्रतिबंधित साहित्य "हिंद स्वराज" और "सर्वोदय" की बिक्री की प्रतिज्ञा से हुई।
6 अप्रैल को गांधी जी ने अखिल भारतीय हड़ताल की अपील की।  यह सत्याग्रह अभियान के श्रीगणेश का संकेत था। इस रोज दूरदराज के गांवों और शहरों में हड़ताल सौ फीसदी सफल रही। इसी दिन मुंबई के सत्याग्रह प्रदर्शन पर गांधी जी ने स्पष्ट कहा- "कोई भी देश कभी इस तरह नहीं जागा। कोई भी देश बिना बलिदान के नही बना है।" 7 अप्रैल को गांधी जी ने अपने संपादन में साप्ताहिक "सत्याग्रही" मणि भवन से छापना शुरू कर दिया। इसका पंजीयन भी नहीं कराया गया। मूल्य रखा गया एक पैसा। गांधी जी ने इसमें सत्याग्रह के उद्देश्य लिखे। एक प्रति मुंबई के पुलिस आयुक्त को प्रेषित कर दी। सत्याग्रह की पत्रिकाएं भी रोज छपतीं। उसमें गांधी जी के दस्तखत रहते। इसके जरिए सत्याग्रह की खबरें दी जातीं।
19 अप्रैल को गांधी जी ने एकाएक सत्याग्रह स्थगित कर दिया। उनको लगा कि सविनय कानून भंग के मामले में लोग पूर्णतया अनुशासित नहीं हैं। उन्होंने कहा- "अगर मैं अंग्रेजों और भारतीयों के मध्य कटुता उत्पन्न करने के लिए हिंसा बढ़ाने सत्याग्रह का इस्तेमाल होने देता हूं, तो यह सत्याग्रह की भावना के मुताबिक नहीं होगा।" सत्य, अहिंसा के सिद्धांतों का उपदेश, स्वराज और स्वदेशी का संदेश देने गांधी जी ने 1919 में ही साप्ताहिक "यंग इंडिया" और "नवजीवन" का प्रकाशन मणि भवन निवास के दौरान शुरू किया। गुजराती और अंग्रेजी में छपने वाले ये साप्ताहिक, सत्याग्रह के नए हथियार बने।
वर्ष 1920, खिलाफत और असहयोग आंदोलन का सूत्रपात हुआ। मुसलमानों की सरकारी उपेक्षा ने खिलाफत आंदोलन को जन्म दिया। गांधी जी और उनके निवास मणि भवन ने हिंदू- मुस्लिम एकता के सिद्धांतों के प्रचार-प्रसार में खासा योगदान दिया। अली भाइयों के फैसलों को गांधी जी ने पूर्ण समर्थन दिया। 22 जून को गांधी जी ने मणि भवन से भारत के वाइसराय लार्ड चेम्सफोर्ड को कड़ा पत्र लिखा - "शांति शर्त और उनकी सुरक्षा के लिए आपके वचन भंग से भारतीय मुसलमानों की संवदेना को खासा धक्का लगा है, जिससे उनके लिए यथास्थिति में आना कठिन होगा। शर्तें शासकीय वचन को भंग ही नहीं करती, बल्कि मुसलमानों की भावनाओं का अपमान भी करती हैं। अगर उनके संकट में मैं साथ नहीं देता हूं, तो मैं भारतमाता का अयोग्य पुत्र ठहरूंगा।"
असहयोग आंदोलन की योजना के क्रियान्वयन के लिए गांधी जी ने 1 अगस्त को वाइसराय को विरोध पत्र में कैसर-ए-हिंद और बोअर युद्ध पदक को लौटाने के फैसले की सूचना दी। पत्र में उन्होंने पंजाब की घटनाओं के मामले में शर्मनाक अनभिज्ञता, हाउस ऑफ लार्ड्स द्वारा उपेक्षा और विश्वासघात की जमकर आलोचना की। 1 अगस्त गांधी जी के लिए आघात का दिन था। इस दिन लोकमान्य तिलक का निधन हो गया। पूरा देश शोक- संतप्त था। गांधी जी के मणि भवन में भी शोक छाया था। यहीं उन्होंने "यंग इंडिया" में श्रद्धांजलि दी- "वे जनता के अभिन्न अंग थे। एक नरकेसरी चला गया। शेर की आवाज शांत हो गई।"
वर्ष 1921, विदेशी कपड़ों के पूर्ण बहिष्कार का गांधीजी का नारा जोर पकड़ लिया। 31 जुलाई को मुंबई में गांधी जी ने विदेशी कपड़ों की होली जलवाई। इसके साथ राजनीति और सार्वजनिक जीवन में महिलाओं ने कदम रखे। एक अगस्त को चौपाटी की सभा में लोग उमड़ पड़े थे। यहां गांधी जी ने भरोसा दिलाया "कल मुंबई में जो आग की सुंदर ज्योति प्रज्वलित की गई है वह अमर रहेगी।"  फिर इस होली की ज्योति पूरे देश में फैल गई। दो माह की यात्रा के पश्चात अपने जन्म दिन 2 अक्टूबर को गांधी जी पुन: मुंबई आए। उनकी वापसी नए अंदाज में थी। कमर तक कपड़े में गांधी जी को देखने मणि भवन में भीड़ जुटने लगी। इस माह गांधी जी के बुलावे पर विभिन्न राज्यों के नेता मुंबई आए। मौलाना अबुल कलाम आजाद, अजमल खान, मोतीलाल नेहरू , सरोजनी नायडू, लाजपतराय, विट्ठल भाई पटेल, वल्लभ भाई पटेल, अब्बास तय्यबजी, जवाहर लाल नेहरू, सी राजगोपालाचारी, राजेंद्र प्रसाद आदि 50 नेताओं ने गांधी जी के घोषणा पत्र पर दस्तखत कर समर्थन व्यक्त किया। फिर इसे कई जगह पर पढ़ा गया।
17 नवंबर को प्रिंस ऑफ वेल्स भारत का जायजा लेने मुंबई उतरने वाले थे। दोपहर 1 बजे शहर में कई जगह तोडफ़ोड़ और दंगे हो गए। माहौल शांत होने के आसार नजर नहीं आ रहे थे। इसलिए गांधी जी ने 19 नवंबर को भोजन त्याग दिया। उनके इस प्रण को देख कर विभिन्न संप्रदाय के नेता उनसे मिलने पहुंचे। गांधी जी ने शर्त रखी- "यदि वे शहर में शांति स्थापित करने की जिम्मेदारी लेते हैं तो वे उपवास तोड़ देंगे।" शहर शांत होने पर 22 नवंबर को आखिर उन्होंने उपवास तोड़ा।
वर्ष 1922, 10 मार्च को गांधी जी को बंदी बना लिया गया। मुकदमा चलाया गया। राजद्रोही खबर और लेख लिखने के जुर्म में गांधी जी को छह साल के कारावास की सजा सुनाई गई। जेल में उनकी तबीयत खराब हो गई।
वर्ष 1924, गांधी जी का स्वास्थ्य इस बीच जेल में बेहद खराब हो गया था। इसलिए फरवरी में उन्हें छोड़ दिया गया। 28 अगस्त को मुंबई महानगरपालिका की तरफ से विट्ठल भाई की अध्यक्षता में सीजे हाल में बैठक हुई। इसमें गांधी जी के समक्ष नेतृत्व जारी रखने का प्रस्ताव रखा गया। इसी साल गांधी जी कांग्रेस के बेलगांव अधिवेशन की अध्यक्षता करके जब वापस मुंबई आए तो ग्लोब थिएटर में मुस्लिम लीग के सालाना जलसे में उनका भाषण हुआ।
वर्ष 1929, राष्ट्र व्यापी दमन अब बढ़ गया था। 24 मई को मुंबई में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक में गांधी जी की प्रतिरोध संबंधी योजना पर गहन विचार-विर्मश हुआ। 11 अगस्त को जब गांधी जी अहमदाबाद से मुंबई लौटे तो मणि भवन में फिर बैठकों का सिलसिला शुरू हो गया। गांधी जी नेहरू रिपोर्ट के बारे में मुसलमानों का अभिप्राय जानना चाहते थे। इसके अलावा वे नेहरू संविधान के बारे में मुसलमानों की मंजूरी के लिए जिन्ना के साथ समझौता करना चाहते थे। शाम को अली भाइयों ने मणि भवन में गांधी जी से एक घंटे से ज्यादा समय बातचीत की। महिलाओं को भी गांधी जी समय समय पर मार्गदर्शन देते रहे। 7 दिसंबर को गांधी जी ने विलेपार्लें में भगिनी सेवा मंडल का शिलान्यास कर जागृति को नव आयाम दिया।
वर्ष1930, गांधी जी स्वापर्ण से पूर्ण स्वराज्य को लेकर सक्रिय थे। 26 जनवरी को गांधी जी ने पूरे देश को स्वतंत्रता दिवस मनाने का आह्वान किया। उन्होंने अपील की "भारत में ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों को उनकी आजादी से ही वंचित नहीं किया है, बल्कि वह लोगों के शोषण पर टिकी हुई है। इस सरकार ने आर्थिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भारत को तहस-नहस कर डाला है। इसलिए हम ऐसा विचार प्रकट करते हैं कि भारत ब्रिटिश सरकार से अपना संबंध विच्छेद कर ले और  मुकम्मल आजादी या पूर्ण स्वराज प्राप्त करे।"
वर्ष 1931, गांधी जी की दांडी-यात्रा के प्रस्ताव से हलचल मच गई। राष्ट्र स्तर पर सामूहिक सविनय कानून भंग आंदोलन प्रारंभ हो गया। न केवल भारत बल्कि विश्व इससे वैचारिक तौर पर द्रवित हुआ। हालात देख कर 25 जनवरी को वाइसराय लार्ड इरविन ने गांधी जी और कार्यकारिणी सदस्यों को मुक्त कर दिया। इसके बाद गांधी जी ने नमक के अधिकार पर बल दिया।
26 जनवरी,1931 को स्वतंत्रता लेने की घोषणा के एक साल पूरे होने पर और गांधी जी की रिहाई से मुंबई में भी समारोह हुए। सामूहिक सभाएं हुई। इसी समय स्मृति प्रस्ताव भी पारित किया गया। गांधी जी मणि भवन में स्वतंत्रता दिवस मनाने के बाद इलाहाबाद रवाना हो गए। वहां मोतीलाल बेहद अस्वस्थ थे। फिर गांधी जी और इरविन में समझौता हुआ। मार्च के तृतीय सप्ताह गांधी जी मणि भवन में रहे। दो दिन खूब व्यस्त रहे। सोमवार को उनका मौन व्रत रहता था। लेकिन इस रोज शाम को उन्होंने सुभाषचंद्र बोस से खास भेंट के कारण व्रत तोड़ दिया। उस रोज वे 23 घंटे निरंतर व्यस्त रहे।
27 अगस्त को मुंबई के पुलिस आयुक्त को शिमला से तार मिला। जिसमें गांधी जी का पासपोर्ट तैयार करने को कहा गया ताकि वे लंदन के गोलमेज परिषद में कांग्रेस के मुख्य प्रतिनिधि बतौर जा सके। फिर 24 घंटे के भीतर गांधी जी का पासपोर्ट तैयार हो गया लेकिन जन्म तारीख गलत लिख दी गई। 28 दिसंबर को गांधी जी निराश होकर लंदन से मुंबई लौटे। इससे पहले यानी 24 दिसंबर को गफ्फार खां और 26 दिसंबर को जवाहर लाल नेहरू गिरफ्तार हो चुके थे। राष्ट्र की हालत गंभीर थी। हालांकि मुंबई में गांधी जी के आगमन पर भव्य स्वागत हुआ। बेलार्ड पीयर से मणि भवन तक रास्ता सुसज्जित था। लोग उमड़ पड़े थे। मणि भवन पहुंचने पर गांधी जी ने पत्रकारों को लंदन के अनुभव बताए। फिर शाम 5 बजे आजाद मैदान पर गांधी जी की जबरदस्त सभा हुई। 29 दिसंबर को मणि भवन की छत पर प्रार्थना सभा के बाद पचास से ज्यादा पददलित वर्ग के संगठनों ने गांधी जी का सम्मान किया। हालांकि उन्होंने उनसे कहा- "आरक्षण और विशेष प्रतिनिधित्व मिलने पर आप और सवर्ण हिंदुओं के बीच की खाई जारी रहेगी ।"
कांग्रेस के कार्यकारिणी सदस्य गांधी जी से मिलने मणि भवन आए। बंगाल और उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों से भी बातचीत हुई। गांधी जी ने यूरोप- इंग्लैंड में किए गए काम से वाकिफ कराया। सदस्यों ने अध्यादेशों का सवाल उठाया। सरकार से सही जवाब न मिलने पर 31 दिसंबर की रात को राष्ट्रव्यापी सविनय कानून भंग (असहकार) आंदोलन का एलान किया गया।
वर्ष 1932, दो जनवरी को मणि भवन में गांधी जी को वाइसराय का जवाबी तार मिला। कस्तूरबा और वल्लभ भाई पटेल तब उनके पास बैठे थे। तार पढ़ कर हंसते हुए उन्होंने चुटकी ली - "अब मैं जेल जाने की तैयारी कर रहा हूं।" फिर गांधी जी ने अखबार के जरिए राष्ट्र को संदेश देकर सरकारी चुनौती का जवाब अहिंसा से देने की अपेक्षा की। उधर सरकार मुंबई शासन को गांधी जी की गिरफ्तारी के लिए निर्देश भेज रही थी। गृह मंत्रालय ने गांधी जी को मुंबई में बंदी बनाने की मंजूरी दे दी। राज्यपाल को आदेश दिया गया कि गांधी जी को केंद्रीय यरवदा जेल में बंद कर दिया जाए।
4 जनवरी 1932 को तड़के 3 बजे मणि भवन के सामने पुलिस की दो गाडिय़ां रूकीं। गांधी जी तब छत पर तंबू में अपने बिस्तर पर सो रहे थे। देवदास ने उन्हें जगाया, पुलिस आने की खबर दी। उस रोज उनका मौन व्रत था। वे केवल मुस्कुराए। मीरा बेन ने उनका थैला सम्हाला। उसमें एक छोटा चरखा, एक चटाई, दो हाथ थैले, एक फल की टोकरी, एक जोड़ी चप्पल और दूध की एक बोतल थी। सुबह की प्रार्थना छत पर ही हुई। गांधी जी ने फिर साथियों के लिए विदाई संदेश और निर्देश लिखे। सरदार पटेल के लिए भी पत्र लिखा। तब तक वे सरदार पटेल की गिरफ्तारी से अनभिज्ञ थे। फिर वे देवदास की बांह पकड़ कर नीचे उतरे और पुलिस की गाड़ी तक गए। बगैर विरोध के ही उसमें बैठ गए। तब तक वहां काफी लोग इकट्ठे हो गए थे। नारे लगने शुरू हो गए। 1927 के पचीसवें अधिनियम के तहत गिरफ्तारी की गई थी। गांधी जी को मुंबई से पूना की यरवदा जेल ले जाया गया।
वर्ष 1933, आठ मई को गांधी जी को छोड़ दिया गया। लेकिन 4 अगस्त को फिर गिरफ्तार कर एक साल की सजा दी गई। जेल में हरिजन कार्य की स्वीकृति न मिलने पर गांधी जी ने 16 अगस्त को उपवास शुरू कर दिया। तबीयत बिगडऩे पर उन्हें 23 अगस्त को रिहा कर दिया गया। 19 सितंबर को हरिजन कार्य बाबत गांधी जी मुंबई आए।
वर्ष 1934, कांग्रेस की कार्यकारिणी समिति ने 12 जून को वर्धा में जो रचनात्मक कार्यक्रम बनाया था, उसे गांधी जी ने मुंबई में भी लागू कराने का प्रयास किया। गांधी जी ने अछूत समस्या के समाधान मसले पर डा. आंबेडकर से बातचीत की। गांधी जी ने मुंबई के विदाई भाषण में सवाल उठाया- "मुंबई सचमुच एक खूबसूरत शहर है। लेकिन इसकी सुंदरता कहां है, मलबार हिल में या महालक्ष्मी की कटरा पट्टी में ? मेरा आप लोगों से निवेदन है कि मुंबई के गंदे क्षेत्रों को देखें और महानगर पालिका में जाकर इस संबंध में उनसे तुरंत कार्रवाई करने के लिए विचार विमर्श करें। एक दिन भी आप मलप्रवाह के पास कैसे रहना पसंद करेंगे? 27 और 28 जून, 1934 को गांधी जी की मौजूदगी में कांग्रेस कार्यकारिणी की बैठक हुई जिसमें दलितों के बारे में मुद्दे उठाए गए। मणि भवन में गांधी जी का यह अंतिम निवास था।
प्रस्तुति : दिनेश ठक्कर
(5 अगस्त 1997 मंगलवार को जनसत्ता, मुंबई में प्रकाशित)