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बुधवार, 31 अक्तूबर 2012

पहली बार जंगल से बाहर निकल बाहरी दुनिया देखी आदिवासी विद्यार्थियों ने

छत्तीसगढ़ के अचानकमार प्रोजेक्ट टाइगर एरिया के तहत आने वाले वन ग्राम छपरवा स्थित अभ्यारण्य शिक्षण समिति हायर सेकेंडरी स्कूल के आदिवासी विद्यार्थियों को गत दिवस बस में शिवरीनारायण और सिरपुर ले जाकर वहां के पुरातात्विक स्थलों की गौरवमयी धरोहर से अवगत कराया गया. इस स्कूल के मानसेवी प्राचार्य और समाजसेवी पीडी खैरा के नेतृत्त्व में गए दल में ४६ विद्यार्थी थे, जिनमें २० छात्राएं भी शामिल थीं. इसमें कई निर्धन आदिवासी विद्यार्थी ऐसे थे, जो पहली बार वन क्षेत्र से बाहर निकल कर बाहरी दुनिया के संपर्क में आये. जंगल से बाहर आकर वे छत्तीसगढ़ के ऐतिहासिक स्थल के प्राचीन पुरा धरोहर और समृद्ध विरासत से रूबरू होकर बिलकुल नया अनुभव प्राप्त किया. 
इस भ्रमण दल में कक्षा नवमीं, दसवीं और ग्यारहवीं के बीस विद्यार्थी पहली बार अपने जंगल निवास क्षेत्र से बाहर निकल कर नए और पुरा संपदायुक्त परिवेश से साक्षात्कार कर असीम आनंद और नया अनुभव प्राप्त किये . इस स्कूल के कक्षा ग्यारहवीं के मेधावी विद्यार्थी काशीराम पुरचाम,मुकेश साकेत, मनीष कंवर, बैगा छात्रा शामवती, कक्षा दसवीं की बैगा छात्रा सुनीता और कक्षा बारहवीं के छात्र अनिल कुमार की एक राय थी, कि इस तरह के भ्रमण कार्यक्रम से उनके ज्ञान में वृद्धि तो हुई साथ ही छत्तीसगढ़ की प्राचीन नगरी को देखने समझने का अवसर भी प्राप्त हुआ. इस स्कूल के शिक्षक मनीराम पनरिया, योगेश जायसवाल और चाँद सिंह पोर्ते का कहना था कि महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों को देखने जानने के बाद मिले अनुभव से उनके अध्यापन कार्य में विविधता और परिपक्वता आयेगी. प्राचार्य पीडी खैरा ने बताया कि राज्य की विरासत महाकोशल से पहले की है. राज्य की समृद्ध और गौरवशाली विरासत से विद्यार्थियों को अवगत कराना इस प्रवास का मुख्य उद्देश्य था. अनुभव की शिक्षा किताबी शिक्षा से बेहतर होती है. इस भ्रमण कार्यक्रम से हमने जंगल में रहने वाले ठेठ आदिवासी विद्यार्थियों को बाहरी दुनिया के संपर्क में लाकर उन्हें एक नया अनुभव मुहैया कराया है. वनांचल के शैक्षणिक जगत में यह एक अनूठा प्रयोग भी है. इसे सरकार को व्यवहार में लाकर आत्मसात करना चाहिए. पीडी खैर ने बताया कि यह भ्रमण कार्यक्रम बायोस्फियर क्षेत्र के डीएफओ बीपी सिंह ने प्रायोजित किया था.      
-दिनेश ठक्कर 
(दैनिक भास्कर भूमि, राजनांदगांव में प्रकाशित)   
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