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गुरुवार, 9 अगस्त 2012

छपरवा के आदिवासी विद्यार्थियों को मदद की पहल

(दिनेश ठक्कर "बापा")
अचानकमार प्रोजेक्ट टाइगर क्षेत्र के तहत आने वाले वन ग्राम छपरवा में बुधवार, आठ अगस्त को बिलासपुर रोटरी क्लब के पदाधिकारियों ने दस्तक देकर आदिवासी विद्यार्थियों को मदद करने की अनुकरणीय पहल की. छपरवा स्थित अभ्यारण्य शिक्षण समिति हायर सेकेंडरी स्कूल के बैगा आदिवासी सहित अन्य जाति के मेधावी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति तथा बुनियादी सुविधाएं देने के लिए विवरण संग्रहित किया गया है. यहाँ के विद्यार्थियों को खेल सामग्री भी वितरित की गई. रोटरी क्लब, बिलासपुर के अध्यक्ष देवाशीष घटक और सह सचिव गोपाल सिंहल ने बुधवार को वन ग्राम छपरवा जाकर रोटरी क्लब के नए एजेंडा को मूर्त रूप देने का सिलसिला आरम्भ किया है. रोटरी क्लब ने इस वर्ष दो मेधावी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने का निर्णय लिया है. इसके अलावा सुविधाविहीन स्कूल को गोद लेकर समस्त शैक्षणिक साधन उपलब्ध कराने का भी फैसला लिया गया है. पिछले दिनों बिलासपुर प्रवास के दौरान रोटरी क्लब के अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष कल्याण बनर्जी ने भी इस दिशा में सेवा कार्य किये जाने की मंशा जाहिर की थी. उन्होंने बिलासपुर शाखा से ऐसे सेवा कार्यों की अपेक्षा भी की थी. इसी कड़ी में बिलासपुर रोटरी क्लब के अध्यक्ष देवाशीष घटक और सह सचिव गोपाल सिंहल  बुधवार को सुबह दस बजे समाजसेवी और वरिष्ठ पत्रकार कमल दुबे के मार्गदर्शन में वन ग्राम छपरवा पहुँच कर आदिवासी विद्यार्थियों से रूबरू हुए. उन्होंने शाला परिसर में उनसे तमाम तकलीफों का ब्यौरा लिया. बिजली और बुनियादी सुविधाओं से वंचित इस वन ग्राम की हाई स्कूल और यहाँ अध्ययनरत गरीब आदिवासी विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं. इस स्कूल के मानसेवी प्राचार्य और समाजसेवी पी. डी. खैरा ने रोटरी क्लब की इस अनुकरणीय पहल की सराहना की है. गौरतलब है कि पी. डी. खैरा दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफ़ेसर रह चुके हैं. वे एक लम्बे अरसे से छपरवा लमनी क्षेत्र में रह कर वहां के बैगा आदिवासियों और उनके बच्चों के उत्थान जैसे सेवा कार्यों में निस्स्वार्थ भावना से जुटे हुए हैं.
छपरवा की अभ्यारण्य शिक्षण समिति हायर सेकेंडरी स्कूल में इस वक्त विभिन्न जाति के ५४ विद्यार्थी अध्ययनरत हैं. इनमें बैगा, कंवर, गोंड़, पनिका, रावत, कोल, लोहार, धोबी और मुस्लिम जाति के विद्यार्थी शामिल हैं. यहाँ अब केवल तीन बैगा आदिवासी विद्यार्थी मंगल सिंह, सुनीता और शामवती पढ़ रहे हैं. इसके पहले यहाँ के कुछ बैगा विद्यार्थी अच्छे  अंक प्राप्त कर उत्तीर्ण हुए थे. बारहवीं कक्षा के बाद अब वे उच्च शिक्षा की तरफ अग्रसर हुए हैं. वे प्रतियोगी परीक्षा में भी पास हुए हैं. इसी स्कूल से बैगा विद्यार्थी रतन सिंह ने गत वर्ष बारहवीं में ४५ फीसदी अंक प्राप्त किये थे. वह गणित का छात्र है. इसके पिता वन ग्राम लमनी में खेतिहर मजदूर हैं. समाजसेवी पत्रकार कमल दुबे ने इसे प्रेरित करते हुए अपने खर्च पर प्री पालीटेक्नीक टेस्ट परीक्षा दिलवाई थी, जिसमें वह चयनित भी हो गया है. अब वह पीईटी की तैयारी कर रहा है. अभी उसने कोटा के कालेज में प्रवेश लिया है. इसी तरह गोंड़ आदिवासी विद्यार्थी काशीराम ने इस बार दसवीं की परीक्षा में ७० फीसदी अंक हासिल किये थे. छपरवा की इस स्कूल के विद्यार्थी गणित विषय के साथ अंग्रेजी में भी निपुण हो गए हैं. इस स्कूल का लोकार्पण २३ जून २००८ को हुआ था. वन ग्राम विकास अभिकरण योजना के तहत इसे वन विभाग द्वारा इस समय संचालित किया जा रहा है. मुंगेली के कलेक्टर टी. सी. महावर ने भी गत दिनों इस स्कूल के विद्यार्थियों की मदद के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा है.     

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