अभिव्यक्ति की अनुभूति / शब्दों की व्यंजना / अक्षरों का अंकन / वाक्यों का विन्यास / रचना की सार्थकता / होगी सफल जब कभी / हम झांकेंगे अपने भीतर

रविवार, 18 मार्च 2012

जलाराम ने सबको है तारा

मेरी पहली किताब
"जला सो अल्लाह" से

वीरपुर है भक्तों का प्यारा 
जलाराम ने सबको है तारा 
सेवा में बीता जीवन सारा 
संतों में स्थान है न्यारा 

रघुवंश का अनूठा अवतारा 
माता का जला दुलारा 
सदाव्रत का दिया है नारा 
दुखियों का है तारणहारा 

भूखे को माना प्राणों से प्यारा 
भक्तों को कष्टों से है उबारा 
मन से जिसने भी पुकारा 
उसकी भक्ति को है स्वीकारा 

प्रभु राम का है सेवक प्यारा 
भेदभाव से किये किनारा 
संकट में सभी को देते सहारा 
जलाराम को पूजे जग सारा 

-दिनेश ठक्कर "बापा"
एक टिप्पणी भेजें