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मंगलवार, 21 फ़रवरी 2012

रहस्य के आवरण में रूद्र-शिव की प्रतिमा - (३)

साधारणतः शिव मंदिर पूर्वाभिमुख रहता है, लेकिन जेठानी मंदिर  दक्षिणामुखी है, जो कि अशुभ देवताओं के साथ संलग्न होता है. वैसे जेठानी मंदिर के वास्तु शिल्प को नए सिरे से आंकलित करने के बाद ही यह निश्चित हो पायेगा कि प्रतिमा किस मंदिर की है. बहरहाल, खुदाई के द्वितीय चरण में इस प्रतिमा के खंडित हिस्से जैसे हाथ के नाखून, ऊपर का सर्प, एवं पैर के पास का सर्प मिला है, जिसे एरलडाईट आदि से जोड़ दिया गया है. रसायन विशेषज्ञों के एक दल ने इस मूर्ति का परीक्षण कर उसमें आवश्यक संरक्षात्मक रसायन लगाए हैं. तालागांव की महत्ता को देखते हुए अब इस प्रतिमा को इस स्थान पर सुरक्षित रखने का प्रबंध जरूरी हो गया है. (समाप्त)

-दिनेश ठक्कर
(पत्रिका धर्मयुग, मुंबई के २५ सितम्बर १९८८ के अंक में प्रकाशित)                       
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